EDITORMay 3, 20211min216

अब्दुल्ला की शादी में बेगाने की तरह दीवाना ना बने कांग्रेस .. वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की समझाइश

अब्दुल्ला की शादी में बेगाने की तरह दीवाना ना बने कांग्रेस .. वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की समझाइश\

बीजेपी की बंगाल की हार से कांग्रेस में ख़ुशी है लेकिन कुछ कांग्रेस नेताओं ने इस पर ऐतराज किया है|

आखिर कब तक बीजेपी की हार पर खुश होगी कांग्रेस?

5 राज्यों के नतीजे कांग्रेस के लिए ठीक नहीं रहे|

इन चुनावों में, खासकर असम एवं केरल में कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी।

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असम, केरल और पुडुचेरी में चुनावी हार और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का सफाया होना न केवल पार्टी, बल्कि पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी बड़ा झटका है। इन नतीजों पर अब पार्टी नेताओं ने ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने ट्वीट कर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है, ”यदि हम (कांग्रेसी) नरेन्द्र मोदी की हार में ही अपनी प्रसन्नता ढूंढते रहेंगे, तो अपनी हार पर आत्म-मंथन कैसे करेंगे।”

संजय झा(कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता) ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन और चुनाव रिजल्ट के बाद पार्टी के रवैये को लेकर निराशा व्यक्त की है। झा ने ट्वीट कर कहा, सबसे बड़ी हताशा कांग्रेस द्वारा पश्चिम बंगाल में अपना आत्मसमर्पण है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। 2016 में, कांग्रेस बंगाल में 44 सीटों और 12.25% वोट शेयर के साथ बड़ी विपक्षी पार्टी थी।

पूर्व मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कहा है, ”मुझे हैरत है कि भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस कब तक दूसरों को धन्यवाद देती रहेगी?”


नतीजे आए राहुल गांधी के लिए बड़ा झटका हैं। वे आत्ममंथन करने के बजाय बीजेपी की हार पर खुशी और विजेताओं को बधाई देने में व्यस्त थ| राहुल गांधी केरल में राज्य इकाई को एक छतरी के नीचे लाने में विफल रहे जिसकी पार्टी को भारी कीमत चुकानी पड़ी। विगत लोकसभा चुनाव में केरल से कांग्रेस अधिकतम सीटें जीती थीं और खुद राहुल गांधी भी प्रदेश से वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं। चुनाव बाद अब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो सकते है।

‘जी 23’ समूह अपना अगला कदम उठाने का इंतजार कर रहा है। तस्वीर साफ होने के बाद कांग्रेस और राहुल गांधी ने अपनी हार मानी और आत्मविश्लेषण करने की बात की। राहुल गांधी ने ट्वीट किया और कहा , ‘‘हम जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। अपने कार्यकर्ताओं और हमें समर्थन देने वाले लाखों लोगों का आभार। हम मूल्यों और आदर्शों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। जय हिंद।’’

असम में एआईयूडीएफ (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) और पश्चिम बंगाल में आईएसएफ (इंडियन सेक्युलर फ्रंट) के साथ गठजोड़ को लेकर भी सवाल उठे हैं। कांग्रेस के लिए बड़ी राहत तमिलनाडु से मिली है जहां उसकी मौजूदगी और द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन ने जीत दर्ज की है।


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