मुंबई में होगी नए तरीके से कोरोना की जांच: आवाज से होगी कोरोना मरीजों की पहचान, एआई सॉफ्टवेयर से घर बैठे होगा टेस्ट; 30 मिनट में नतीजा

मुंबई में होगी नए तरीके से कोरोना की जांच: आवाज से होगी कोरोना मरीजों की पहचान, एआई सॉफ्टवेयर से घर बैठे होगा टेस्ट; 30 मिनट में नतीजा

देश में बड़ते हुए कोरोना के मरीजों की पहचान के लिए मुंबई में अब नए तरीके से जांच होगी| मुंबई में पहली बार आवाज के आधार पर काेराेना का परीक्षण होने जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) 1000 लोगों पर Pilot project से शुरुआत करेगी| इस जांच में ऐप आधारित तकनीक से कोरोना के लक्षणों की जांच करेगी। इस जांच में आधे कोरोना पॉजिटिव मरीज होंगे और आधे कोरोना के संभावित मरीज।


बीएमसी के एडिशनल कमिश्नर का कहना है कि इजराइल और अमेरिका में इस तकनीक से कोरोना के सफलतम टेस्ट किया जा रहा है। जल्द शुरू होने वाला पायलट प्रोजेक्ट सक्सेस रहा तो इसे आगे भी continue रखा जायेगा । अमेरिका की कंपनी वोकलिस हेल्थ इस टेस्ट को कर रही है 

 यह कंपनी भारत में पहले से फार्मास्युटिकल और आईटी दोनों क्षेत्रों में कार्यरत है। जिन कोरोना मरीजों का आवाज का टेस्ट लिया जाएगा, उनका RT-PCR (ड्राई स्वैब के प्रोटेक्टिव ट्यूब में लिए नमूने) टेस्ट भी होगा। लिए गए दोनों टेस्ट की स्टडी की जाएगी कि कौन सा टेस्ट ज्यादा सटीक है और कौन से टेस्ट में रिजल्ट कितनी जल्दी आते हैं।

अमेरिका और इजराइल में पहले से हो रहा टेस्ट

इस टेस्ट को पहले से इजराइल और अमेरिका में किया जा रहा है। इस टेस्ट पर BMC का भरोसा है कि अगर कोई कोरोना पॉजिटिव है, तो उसकी आवाज बदल जाती है। पायलट प्रोजेक्ट के कारण अभी ये टेस्ट मुफ्त में किया जाएगा। कंपनी का कहना है- ‘कोरोना के लिए यह स्क्रीनिंग समाधान सिर्फ सॉफ्टवेयर आधारित है। इसकी सर्वर और डेटा बैंडविड्थ क्षमता इतनी है कि इससे एक दिन में बहुत सारे टेस्ट किए जा सकते हैं। इसके नंबर की कोई सीमा नहीं है।

ऐसे होगा इस्तेमाल

यह बहुत ही आसान प्रिक्रिया है| इसमें आपको एक सॉफ्टवेयर स्मार्टफोन या टैब में डाउनलोड करना होगा। उसमें अपनी आवाज रिकॉर्ड करनी होगी और 30 मिनट में कोरोना का रिजल्ट आ जाएगा। सॉफ्टवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए काम करेगा और घर पर, ऑफिस में या ट्रेवल पर निकलने से पहले खुद टेस्ट करके फायदा लिया जा सकता है। यह टेस्ट शुरुआती लक्षण दिखाने पर कारगर है। इसका विदेशों में 85% तक सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है।’

हेल्थकेयर पर कम भार पड़े इसलिए तकनीक आजमा रहे कई देश

वोकलिस के सीईओ का कहना है कि इस तकनीक का प्रयोग करने वाले देशों ने इस प्रयोग को इसलिए आजमाया ताकि हेल्थकेयर सिस्टम पर पड़ने वाला भार कम किया जा सके। महाराष्ट्र में जिस तेजी से कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। कंपनी का इजराइल, अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों की सरकार के साथ साझेदारी में प्रोजेक्ट सफल रहा है।

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