क्या कुण्डलिनी जागरण खतरनाक है?

कुंडलिनी शक्ति: एक चमत्कारिक और विलक्षण ऊर्जा है|

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ये माना जाता है कि कुंडलिनी को छेड़ना खतरनाक है| इसके कुछ कारण हैं जिसकी चर्चा आगे करेंगे|  कुंडलिनी को लेकर अनके तरह कि बातों और भ्रम के पीछे इसकी व्याख्या करने वालों की अज्ञानता है| इसके बारे में लिखने वाले व्यक्ति ठीक उसी तरह हैं जैसे कोई व्यक्ति तैरना सिखाए और वो कभी खुद न तैरा हो| योगी कहते हैं कि योग के जरिए कुंडलिनी को जागृत किया जा सकता है| मान्त्रिक मंत्र के जरिए कुंडलिनी जागरण का दावा करते हैं| तांत्रिक तंत्र के जरिए कुंडलिनी जागृत करने का दावा करते हैं| 

सचाई यह है कि कोई भी विधि या शक्तिपात किसी भी व्यक्ति की कुंडलिनी जागृत नहीं कर सकती यदि वह व्यक्ति कुंडलिनी जागरण का पात्र ना हो | शक्तिपात के लिए देने और लेने वाले दोनों योग होना चाहिए| कुंडलिनी चेतना शक्ति है जिससे बलपूर्वक जागृत किया ही नहीं जा सकता| कुंडलिनी त्रिगुणात्मक चेतना शक्ति है, जिसके तीन भाग हैं आत्म-शक्ति, मन-शक्ति और प्राण-शक्ति एक कार की यात्रा तभी शुरू हो सकती है जब कार (स्थूल शरीर) सही सलामत हो|  साथ ही पर्याप्त फ्यूल(प्राण) और ड्राइवर(आत्मा व मन) जागृत हो|   

कुण्डलिनी(चेतना) =आत्म-शक्ति+ मन-शक्ति + प्राण-शक्ति

सामान्य मनुष्य में भी कुण्डलिनी जागृत होती है लेकिन स्वास प्रश्वास, भोजन, पाचन व् सांसारिक कार्य हेतु इस स्थति में चित्त की  प्रवत्तियां बहिर्मुखी होती हैं| इसे चेतना कि सुप्त अवस्था कहा जाता है| एसा इसलिए क्यूंकि व्यक्ति इस शक्ति के वास्तविक स्वरुप व् कार्यों को नहीं जानता न ही ये त्रिगुणात्मक स्वयम अन्तर्मुखी होकर क्रियाशील है| कभी-कभी व्यक्ति विभिन्न विधियों और प्रयोगों से अपनी प्राणशक्ति को विचलित करने में कामयाब हो जाता है| लेकिन आत्म शक्ति और मनशक्ति जागृत नहीं होती|

ऐसे में कुंडलिनी का सिर्फ 33 फ़ीसदी हिस्सा जागृत होता है| इस अकेली प्राण शक्ति की हलचल से व्यक्ति को अनेक अनुभव होते हैं लेकिन ये पूर्ण जागरण नहीं है और ये खतरनाक भी है| क्रियाशील प्राण व्यक्ति के मेरिडियन यानि उर्जा चैनल्स में गति करने लगता है| लेकिन उसे नियंत्रित करने वाली आत्म शक्ति और मन-शक्ति के सक्रिय न होने के कारण प्राण अनियंत्रित हो जाता है| जिस तरह ड्राइवर के बिना चलने वाली कार कहीं भी गिर सकती है उसी तरह से यह प्राण किसी भी चक्र में जाकर अटक सकता है|
मूल आधार केंद्र में प्राण ऊर्जा का भंडार मौजूद है इस भंडार से शरीर को सामान्य जरूरतों के मुताबिक ऊर्जा मिलती रहती है|  इस ऊर्जा को सही मात्रा में कब और कैसे विभिन्न चक्रों तक ले जाना है यह कुंडलिनी(चेतना) शक्ति के मन और आत्मा स्वरूप को मालूम है| इसीलिए कुंडलिनी जागरण में इस त्रिपुर सुंदरी को  इसके तीनों भाग के साथ जागृत करने को ही पूर्ण जागरण माना जाता है|

जब कुंडलिनी जागरण में आत्मा मन और प्राण की  गति अंतर्मुखी हो जाती है| और यह अंतर्मुखी शक्ति स्वयं ही व्यक्ति के आध्यात्मिक रूपांतरण में लग जाती है तब इसे कुंडलिनी की क्रियाशीलता कहते हैं|

अतुल विनोद:-

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