कुसुम योग : गजकेशरी योग एवं शुभ वासी योग का महासंयोग

कुसुम योग : गजकेशरी योग एवं शुभ वासी योग का महासंयोग

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What is Kusum Yoga in Jyotish?

परिभाषा–लग्न में बृहस्पति, सप्तम भाव में चन्द्रमा तथा दूसरे भाव में सूर्य हो तो कुसुम योग बनता है। फल-ऐसा व्यक्ति अपनी अपने-ज्यादा पर दृढ रहने वाला, धनवान, भूमिपति, राजा के सदृश विख्यात था कितना होता है।

टिप्पणी-कुसुम योग निश्चय ही शक्तिशाली होता है, एक तो बृहस्पति स्वयं लग्न में बैठ कर कुण्डली को काफी महत्त्वपूर्ण बना देता है, दूसरे जब चन्द्रमा सप्तम भाव में होगा तो गुरु-चन्द्र के पार स्परिक संबंध से गज केसरी योग का निर्माण हो जाता है, जो कि अपने ग्रुप में एक प्रबल एवं शक्तिशाली योग है।

इसके साथ ही एक और महत्त्व पूर्ण बात यह है कि दूसरे भाव में सूर्य होने से, बृहस्पति सूर्य से बारहवें भाव में होगा, जो कि ‘शुभ वासी योग’ निर्माण करने में समर्थ है।वासी योग विद्यावान, गुणी एवं चतुर बनाता है तथा जातक को यशस्वी, शत्रु संहारक एवं प्रमुदित बनाये रखने में समर्थ होता है।इस प्रकार देखने पर यह भली-भाँति ज्ञात होता है कि कुसुम योग में दो प्रमुख योगों की विद्यमानता है। वे हैं-गजकेशरी योग एवं शुभ वासी योग।

जब कुण्डली में दो प्रमुख योग होंगे तो निश्चय ही व्यक्ति धनाढ्य होगा ही। कुसुम योग सम्पन्न जातक भूमि सम्बन्धी कार्यों में अधिक सफल होते देखे गये हैं।


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