पट्टे की सीमा से बाहर और स्वीकृत मात्रा से अधिक किया गया खनन, फिर फिलिंग कर छुपाया


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स्टोरी हाइलाइट्स

बीजेपी नेता अशोक विश्वकर्मा के परिवार पर 600 करोड़ के अवैध और एक्सेस खनन का आरोप..!

MMDR अधिनियम की धारा 4(1) के उल्लंघन पर टिकरिया में अवैध खनन का गंभीर आरोप
भोपाल। कटनी के बीजेपी नेता अशोक विश्वकर्मा के परिवार पर जिले की मुड़वारा तहसील के ग्राम टिकरिया में खनन पट्टों की स्वीकृत सीमाओं से बाहर और निर्धारित वार्षिक उत्पादन क्षमता से अधिक किए गए खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता सर्वज्ञ चतुर्वेदी का कहना है कि यह पूरा मामला खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के तहत बिना कानूनी अधिकार के खनन की श्रेणी में आता है, जिसे कानूनन स्वतः अवैध माना जाता है।

शिकायत के अनुसार, ग्राम टिकरिया में शंकरलाल विश्वकर्मा और पूरनलाल विश्वकर्मा के नाम से संचालित खनन पट्टों में वर्षों से लगातार स्वीकृत पट्टा सीमाओं का उल्लंघन किया गया। आरोप है कि खनन कार्य न केवल स्वीकृत खसरा नंबरों से बाहर किया गया, बल्कि पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) में निर्धारित वार्षिक उत्पादन सीमा से कई गुना अधिक मात्रा में खनिज निकाला गया।

धारा 4(1) क्या कहती है

MMDR अधिनियम की धारा 4(1) के तहत कोई भी व्यक्ति बिना वैध खनन पट्टा, या स्वीकृत पट्टे की शर्तों का उल्लंघन करते हुए, खनिज का उत्खनन नहीं कर सकता। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि पट्टे की सीमा से बाहर और स्वीकृत मात्रा से अधिक किया गया खनन, कानून की दृष्टि में बिना अधिकार के खनन है, चाहे वह पट्टा धारक द्वारा ही क्यों न किया गया हो।

50 लाख मीट्रिक टन से अधिक अवैध खनन का दावा

सैटेलाइट इमेज, खनिज परिवहन के आंकड़ों और पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के आधार पर किए गए आकलन में आरोप लगाया गया है कि शंकरलाल विश्वकर्मा द्वारा लगभग 32.60 लाख मीट्रिक टन और पूरनलाल विश्वकर्मा द्वारा करीब 17.80 लाख मीट्रिक टन खनिज का उत्खनन स्वीकृत सीमा से अधिक और पट्टे से बाहर किया गया। इस तरह कुल अवैध उत्खनन 50.40 लाख मीट्रिक टन से अधिक बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला

शिकायत में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ‘कॉमन कॉज बनाम भारत संघ (2017)’ के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि धारा 4(1) का उल्लंघन कर किया गया कोई भी खनन अवैध है और ऐसे खनिजों के 100 प्रतिशत मूल्य की वसूली अनिवार्य है, भले ही बाद में क्षेत्र की बहाली कर दी गई हो।

600 करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान

यदि अवैध रूप से निकाले गए खनिज का मूल्यांकन ₹1,200 से ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन की दर से किया जाए, तो इसकी अनुमानित कीमत ₹600 करोड़ से अधिक बैठती है। इसमें रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (NMET) और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शामिल नहीं है।

कठोर कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता सर्वज्ञ चतुर्वेदी ने मांग की है कि धारा 4(1) के उल्लंघन को आधार बनाकर
* तत्काल GPS/GIS आधारित सीमांकन और विस्तृत निरीक्षण कराया जाए,
* जांच पूरी होने तक खनन कार्यों को निलंबित किया जाए,
* वर्ष-वार अवैध उत्खनन की मात्रा तय की जाए,
* अवैध खनन किए गए खनिजों के 100% मूल्य की वसूली की जाए,
* और दोषी पाए जाने पर खनन पट्टों को समाप्त कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।