सुप्रीम कोर्ट में अब 38 हुए जज, सात साल बाद बढ़ी न्यायधीशों की संख्या


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स्टोरी हाइलाइट्स

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने संबंधी केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, अब देश की सर्वोच्च अदालत में कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जज होंगे..!!

केंद्र सरकार ने देश की न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम जजों की संख्या में इजाफा करने जा रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने संबंधी केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब देश की सर्वोच्च अदालत में कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जज होंगे।  केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 को लागू करके सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दी है।  इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच मई को संसद में सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। 

जजों की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी

सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ रहे मामलों और न्यायिक कार्यभार को देखते हुए जजों की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया था। लंबे समय से इस मांग को कानूनी समुदाय और वरिष्ठ वकीलों द्वारा उठाया जा रहा था ताकि मुकदमों को समय से निपटाने में मदद मिल सके। आखिरी बार 2019 में ये संख्या बढ़ाई गई थी जब मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 कर दिया गया था। 

लंबित मामलों को निपटाने में मिलेगी मदद

इधर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने भी इसे सकारात्मक और जरूरी कदम बताया. उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना समय की मांग है और इससे लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने में मदद मिलेगी. उन्होंने आगे कहा कि इस कदम से मुवक्किलों के साथ-साथ कानूनी समुदाय को भी लाभ होगा। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुमित गहलोत ने भी इस फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि केवल जजों की संख्या बढ़ाने से लंबित मामलों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में करीब 95 हजार मामले लंबित हैं, ऐसे में न्यायिक सुधार बेहतर केस मैनेजमेंट और तकनीकी सुधारों की भी आवश्यकता है।