उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर आई है। प्रयागराज माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या महास्नान उत्सव के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सरस्वती संगम स्नान का मुद्दा गरमा गया है। खबर है, कि शंकराचार्य मौन व्रत ले रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि रविवार 18 जनवरी को हुई घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्न-जल त्याग दिया है।
वे अपनी आगे की रणनीति का ऐलान कर सकते हैं। इस बीच, रविवार को पूरे माघ मेला इलाके में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोकने का मामला चर्चा का विषय रहा, जिससे गरमागरम बहस हुई। पुलिस और प्रशासन द्वारा उनकी पालकी रोकने के बाद से ही शंकराचार्य का गुस्सा भड़क गया।
मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगाने जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने पर हंगामे की खबरें आईं। शंकराचार्य के समर्थकों ने इस घटना का विरोध किया, जिससे पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी हाथापाई हो गई। संगम के किनारे करीब तीन घंटे तक गहमागहमी चलती रही।
घटना से गुस्साए शंकराचार्य ने अपने समर्थकों के साथ त्रिवेणी मार्ग पर शंकराचार्य शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया। सूरज डूबने के बाद शंकराचार्य ने मौन व्रत रखा। ऐसी भी खबरें हैं कि शंकराचार्य और उनके समर्थकों ने अन्न-जल त्याग दिया है।
बता दें, कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार सुबह करीब 9:47 बजे अपने अनुयायियों के साथ संगम नोज पहुंचे। इस दौरान शंकराचार्य पालकी पर सवार थे, जबकि उनके अनुयायी पैदल चल रहे थे। मौनी अमावस्या पर भारी भीड़ को देखते हुए संगम नोज पर बैरिकेड्स लगाए गए थे। पुलिस अधिकारियों ने शंकराचार्य को बैरिकेड्स के पास ही रोक दिया।
शंकराचार्य से कहा गया कि वह पालकी में स्नान के लिए नहीं जा सकते और उन्हें पैदल जाने को कहा गया। संगम नोज की दूरी करीब 50 मीटर थी। अनुयायियों ने विरोध में धक्का-मुक्की शुरू कर दी। विरोध संगम वॉच टावर तक पहुंच गया।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "हम करीब 40 साल से संगम स्नान के लिए आ रहे हैं। शंकराचार्य बनने के बाद पिछले तीन साल से हम पालकी पर आ रहे हैं।" वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि भक्त दर्शन करने के लिए पास आ जाते हैं, जिससे भगदड़ मच जाती है। लोग पालकी पर दूर से ही दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन हमें पैदल चलने के लिए मजबूर करके बेइज्जत करना चाहते थे।"
शंकराचार्य शिविर के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भगदड़ कराकर उन्हें मारने की साजिश की थी। बिना वर्दी के पुलिस वाले उन्हें वहां से ले गए। उन्होंने कहा कि वह तभी स्नान करेंगे जब बदसलूकी करने वाले अफसर उन्हें ससम्मान ले जाएंगे। पिछले कुम्भ में उन्होंने भगदड़ के लिए सरकार को जिम्मेदार बता दिया। इसीलिए, उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने मेला छोड़ देने की चेतावनी भी दी।
शंकराचार्य की पालकी को नहाने के दौरान रोके जाने की घटना के बारे में प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि वह 200 फॉलोअर्स के साथ संगम नोज जाना चाहते थे। उन्हें संगम पर पालकी से उतरकर 20 फॉलोअर्स के साथ नहाने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनके सपोर्टर्स ने पुलिस वालों के साथ बदतमीज़ी की। इसके बाद कुछ लोगों को हटा दिया गया क्योंकि वे संत थे और उन पर हमला नहीं किया जा सकता था।
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि यह पहले से ही था कहा कि कोई नई परंपरा शुरू नहीं की जाएगी। माघ मेला। उन्होंने कहा कि पूरी घटना का वीडियो देखा जा रहा है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना तब हुई जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के बावजूद आगे बढ़ गई। पालकी जब चौकी से आगे बढ़ी तो मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार को संगम पर भक्तों की भीड़ के कारण पालकी रोकने का निर्देश दिया। पुलिस कमिश्नर ने शंकराचार्य और उनके अनुयायियों को समझाने की कोशिश की तो बहस शुरू हो गई। इस बीच पुलिस कुछ अनुयायियों को घसीटकर संगम चौकी के अंदर ले गई।
शंकराचार्य का जुलूस संगम तट से लौट रहा था लेकिन हंगामे के कारण उसे फिर रोक दिया गया। हालात बिगड़ते देख जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और मेला अधिकारी ऋषिराज भी मौके पर पहुंच गए। दोनों ने शंकराचार्य से स्नान के लिए पैदल जाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इससे पुलिस और शंकराचार्य के अनुयायियों के बीच काफी नोकझोंक हुई।
पुराण डेस्क