दोस्तों लखनऊ जिसे नवाबों के शहर के नाम से जाना जाता है। दोस्तों आज हम जानेंगे जाने अनजाने लखनऊ को कुछ विस्तार से। यहाँ के सर्वप्रसिद्ध राजा मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम थे जिनके पूर्वजों ने ही अवधकी स्थापना की थी । भगवान श्रीराम के १२१ पूर्वजों और वंशजो का वर्णन लखनऊ स्थित राजकीय संग्रहालय मे सुरक्षित है । लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहु सांस्कृतिक भी जाना जाता है।
लखनऊ भगवान राम की विरासत थी जिसे उन्होंने अपने भाई लक्ष्मण को समर्पित कर दिया था,जिसे पहले लक्ष्मणावती, लक्ष्मणपुर या लखनपुर के नाम से जाना गया, जो बाद में बदल कर लखनऊ हो गया। शहर के बीच से गोमती नदी बहती है, जो लखनऊ की संस्कृति का हिस्सा है। यहां से अयोध्या भी मात्र 80 मील दूरी पर स्थित है। लखनऊ भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। कानपुर के बाद यह उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। 2006 मे इसकी जनसंख्या 2,541,101 तथा साक्षरता दर 68.63% थी।आज का लखनऊ एक विकासशील शहर है जिसमें एक आर्थिक विकास दिखता है इसे पूर्व की स्वर्ण नगर (गोल्डन सिटी) और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। यहाँ के नवाबों द्वारा शिष्टाचार, खूबसूरत कविता, संगीत और बढ़िया व्यंजनों को हमेशा खाश महत्व दिया गया। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो भारत में ही नही बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। अवध के शासकों ने लखनऊ को अपनी राजधानी बनाकर इसे समृद्ध किया। आज के इस लखनऊ को एक खाश और नया रूप नवाब आसफ़ुद्दौला ने 1775 ई. में दिया था। लेकिन आगे चलकर लॉर्ड डलहौज़ी ने अवध का बिना युद्ध ही अधिग्रहण कर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया। सन 1920 में प्रदेश की राजधानी को इलाहाबाद से बदल कर लखनऊ कर दिया गया।
लखनऊ की जनसंख्या
लखनऊ भारत के सबसे साक्षर शहरों में से एक है। यहां की साक्षरता दर 82.5% है, स्त्रियों की 78% एवं पुरुषों की साक्षरता 89% हैं।वैसे तो लखनऊ शहेर में देश के कोने कोने से लोग आकर रहते हैं लेकिन लखनऊ की ज्यादातर जनसंख्या उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके से है। यहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के अलावा बंगाली, दक्षिण भारतीय एवं आंग्ल-भारतीय लोग भी बसे हुए हैं। यहां की कुल जनसंख्या का 77% हिन्दू एवं २०% मुस्लिम लोग हैं।शेष भाग में सिख, जैन, ईसाई एवं बौद्ध लोग हैं।भूगोल लखनऊ शहर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अनूठा संगम है हा एक ओर शहरी क्षेत्र अपनी चमक धाम और लाइट की जग-मगाहट लोगों को आकर्षित करती है तो वंही दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र के हरे-भरे खेत, आम, अमरूद आदि के बाग मन मोह लेते हैं। लखनऊ पूर्वी ओर बाराबंकी जिला है, पश्चिमी ओर उन्नाव जिला, दक्षिणी ओर रायबरेली जिला है तो इसके उत्तरी ओर सीतापुर एवं हरदोई जिले हैं। लखनऊ शहर भूकम्प क्षेत्र तीसरे स्तर में आता है।
व्यापार
लखनऊ शहर हर किस्म की खेती व व्यापार किया जाता है लेकिन लखनऊ के आम की देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में एक अलग ही पहचान है, खासकर दशहरी आम जिसका एक अलग ही स्वाद और सुगंध है वैसे तो आप को लखनऊ के हर तरफ आम के बागान देखने को मिल जाएंगे लेकिन यहां के मशहूर मलिहाबादी दशहरी आम को विशेष दर्जा प्राप्त हो चुका है मलिहाबादी आम को यह विशेष दर्जा भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री कार्यालय, चेन्नई ने एक विशेष क़ानून के अंतर्गत दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मलिहाबादी दशहरी आम लगभग 6,253 हैक्टेयर में उगाए जाते हैं और 9,658.39 टन उत्पादन होता है।
लखनऊ का सिर्फ आम ही नही यहां का चिकन भी पूरी दुनिया में मशहूर है जी हां लखनऊ के चिकन जिसे लखनवी आरी-ज़रदोज़ी भारत के साथ -साथ पूरी दुनिया में सराही जाती रही है, आरी-ज़रदोज़ी का काम नवाबों के समय से चला आ रहा है, जो व्यापार आज पूरी दुनिया में छाया है, चिकन का काम आप पुराने लखनऊ एवं चौक जैसे क्षेत्रों खूब देखने को पायेंगे। लखनऊ के चिकन का रंग बॉलीवुड एवं हॉलीवुड के फ़िल्मी जगत में खूब देखने को मिलता है। लखनवी चिकन वाले कारीगरों का आर्थिक नुकसान न हो, इसलिए केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय की टेक्सटाइल कमेटी ने चिकन को भौगोलिक संकेतक के तहत रजिस्ट्रार ऑफ जियोग्राफिकल इंडिकेटर के यहां पंजीकृत करा लिया है।
पतंग-उद्योग, तम्बाकू का औद्योगिक उत्पादनकर्ता रहा है। इनमें किमाम आदि प्रसिद्ध हैं। इनके अलावा इत्र, कलाकृतियां जैसे चिन्हट की टेराकोटा, मृत्तिकाकला, चाँदी के बर्तन एवं सजावटी सामान, सुवर्ण एवं रजत वर्क तथा हड्डी-पर नक्काशी करके बनी कलाकृतियों के लघु-उद्योग बहुत चल रहे हैं।
लखनऊ मेट्रो
दिल्ली की तरह लखनऊ में भी यातायात के लिए मेट्रों की शुरूआत हो चुकी है। लखनऊ में मेट्रो रेल शुरु होने के बाद सड़कों पर यातायात काफी कम हुआ है।लखनऊ में मेट्रों के लिए सुनिष्चित किये गये मार्ग |
- अमौसी से कुर्सी मार्ग,
- बड़ा इमामबाड़ा से सुल्तानपुर मार्ग,
- पीजीआई से राजाजीपुरम
- हज़रतगंज से फैज़ाबाद मार्ग
- आलमनगर
- मल्हौर
- उत्तरटिया
- ट्रांस्पोर्ट नगर
- दिलखुशा
- गोमतीनगर
- बादशाह नगर
- मानक नगर
- अमौसी
- ऐशबाग जंक्शन
- लखनऊ सिटी
- डालीगंज और
- मोहीबुल्लापुर
- बख्शी का तालाब
- काकोरी
अब मीटर गेज लाइन ऐशबाग से आरंभ होकर लखनऊ सिटी, डालीगंज एवं मोहीबुल्लापुर को जोड़ती हैं। मोहीबुल्लापुर के अलावा अन्य स्टेशन ब्रॉड गेज से भी जुड़े हैं। अन्य सभी स्टेशन शहर की सीमा के भीतर ही हैं, एवं एक दूसरे से सड़क मार्ग द्वारा भी जुड़े हैं।
खानपान
लखनऊ अपनी खानपान के लिये भी दुनिया भर में मशहूर है लखनऊ का चिकन सिर्फ पहनने में ही नही खाने में भी कुछ कम नही अकबरी गेट पर मिलने वाले हाजी मुराद अली के टुण्डे के कबाब का हर कोई दीवाना है फ़िल्म कलाकार से लेकर खिलाड़ी हर कोई खाने के लिए बेताब रहता है। वंही 1805 में स्थापित राम आसरे हलवाई की मक्खन मलाई एवं मलाई-गिलौरी, प्रकाश कुल्फ़ी भी कुछ कम नही। लखनऊ की चाट देश की बेहतरीन चाट में से एक है। लखनऊ में विभिन्न तरह की बिरयानियां, कबाब, कोरमा, नाहरी कुल्चे, शीरमाल, ज़र्दा, रुमाली रोटी और वर्की पराठा और रोटियां आदि हैं, जिनमें काकोरी कबाब, गलावटी कबाब, पतीली कबाब, बोटी कबाब, घुटवां कबाब और शामी कबाब प्रमुख हैं। इसके अलावा अन्य नवाबी पकवानो जैसे 'दमपुख़्त', लच्छेदार प्याज और हरी चटनी के साथ सीख-कबाब और रूमाली रोटी का तो जवाब नहीं है। और खाने के अंत में विश्व-प्रसिद्ध लखनऊ के पान जिनका कोई सानी लखनऊ के अवधी व्यंजन जगप्रसिद्ध हैं। यहां ऐसी ही रोटियां यहां के एक पुराने बाज़ार में अनेको प्रकार की रोटियां आज भी मिलती हैं, अकबरी गेट से नक्खास चौकी के पीछे तक फुटकर व सैकड़े के हिसाब से शीरमाल, नान, खमीरी रोटी, रूमाली रोटी, कुल्चा जैसी कई तरह की रोटियां मिल जाएंगी। कई पुराने नामी होटल भी इस गली के पास हैं, जहां अपनी मनपसंद रोटी के साथ मांसाहारी व्यंजन भी मिलते कहा जाता है कि तंदूरी पराठा की खोज लखनऊ में ही हुई है।लखनऊ एक ऐतिहासिक धरोहर
पूरा भारत ऐतिहासिक धरोहर का एक संग्रह है जंहा कोने-कोने पे ऐतिहासिक इमारतें और स्थमिलेंगे जो भारत का इतिहास बायां करते हैं। भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य में बसे प्रदेश की राजधानी लखनऊ इतिहास के पन्नों में एक खाश अहमियत रखता है राजधानी में बहुत सी इमारतें है जो इतिहास की गवाही देती हैं लखनऊ में ज्यादातर इमारतें नवाबों ने बनवाई थी इनमें बड़ा इमामबाड़ा एवं छोटा इमामबाड़ा प्रमुख है। इस इमामबाड़े का निर्माण आसफउद्दौला ने 1784काल राहत परियोजना के अन्तर्गत करवाया था।यह विशाल गुम्बदनुमा हॉल 50 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा है। यहां एक अनोखी भूल भुलैया है। इसके अलावा छोटा इमामबाड़ा, जिसका असली नाम हुसैनाबाद इमामबाड़ा है मोहम्मद अली शाह की रचना है जिसका निर्माण 1837में किया गया था। इसे छोटा इमामबाड़ा भी![]()