बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: 8 महीने की मादा शावक फरार. प्रबंधन की खुली पोल


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स्टोरी हाइलाइट्स

पिछले 9 महीने से टाइगर मैनेजमेंट की पोल खुलती जा रही है, इसी कड़ी में पतौर स्थित बठान एंक्लोजर में अक्टूबर से रह रही बिन मां की 8 महीने की शावक मंगलवार को फरार हो गई..!!

भोपाल: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व कभी बाघों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक अलग पहचान थी। पिछले 9 महीने से टाइगर मैनेजमेंट की पोल खुलती जा रही है। इसी कड़ी में पतौर स्थित बठान एंक्लोजर में अक्टूबर से रह रही बिन मां की 8 महीने की शावक मंगलवार को फरार हो गई। टाइगर रिजर्व का अमला हाथी दल के जरिए ढूढ़ने में जुटा है। शावक की मां की अक्टूबर में करंट लगने से खतौली में मौत हो चुकी है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन दिन पहले ही एपीसीसीएफ एल कृष्णामूर्ति बांधवगढ़ गए थे और वे फील्ड डायरेक्टर डॉ अनुपम सहाय को निर्देशित किया था कि दोनों शावकों को पतौर के छोटे एंक्लोजर से हटाकर बड़े बाड़े में शिफ्ट कर दें। छोटे बाड़े में दोनों शावक घुटन महसूस कर रहें है। शिफ्ट करने से पहल ही फीमेल शावक फरार हो गई। सूत्र बताते है कि शावक पहले कैज (पिंजरा) पर चढ़ा और उसके बाद उसने छत पर जम्प की और उसके जंगल में छलांग लगा दी। शावक की निगरानी करने वाले देखते रह गए। 

मंडराता मौत का साया: सोन कुत्तों और शिकारियों का डर

बाड़े से बाहर निकलते ही इस शावक पर मौत के खतरे मंडराने लगे हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि अभी मात्र दो दिन पहले ही ताला क्षेत्र के इसी पतौर इलाके के आसपास सोन कुत्तों (वाइल्ड डॉग्स) का एक आक्रामक झुंड देखा गया था। ये जंगली कुत्ते झुंड में हमला करने के लिए कुख्यात हैं और एक अकेले 8 माह के शावक के लिए काल हैं। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के अंदर मौजूद वयस्क नर बाघ (टेरिटोरियल मेल्स) भी इसे अपना प्रतिद्वंद्वी मानकर मार सकते हैं। भूख से तड़पना और शिकार न कर पाना इसकी जान का सबसे बड़ा दुश्मन है

सुरक्षा का 'घेरा' या मासूम के लिए 'कफन'?

जिस एंक्लोजर को इस अनाथ शावक की जान बचाने के लिए 'सुरक्षा कवच' होना था, वह प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण उसके लिए 'कफन' साबित होता नजर आ रहा है। यह शावक अपनी माँ को पहले ही खो चुका है और अभी खुद शिकार करने में पूरी तरह अक्षम है। ऐसे में उसे खुले जंगल में असुरक्षित छोड़ देना उसे सीधे मौत के मुंह में धकेलने जैसा है। रेंजर खुद मान रहे हैं कि फेंसिंग मात्र 5 फीट की थी और केज को उसके पास छोड़कर शावक को खुद भागने का रास्ता दिया गया। पास ही सोन कुत्तों और वयस्क बाघों का साया मंडरा रहा है, लेकिन अधिकारी इसे 'सामान्य' बता रहे हैं।

इनका कहना है:

‘मैं तीन दिन पहले ही लौटा हूं। मैंने फील्ड डायरेक्टर को जल्दी शिफ्ट करने के लिए कहा था।’

एल कृष्णमूर्ति एपीपीसीएफ

"शावक की शिफ्टिंग की प्रक्रिया चल रही थी। जहां शिफ्ट किया जाना था, उस जगह को साफ करवा रहे थे। लेकिन शिफ्ट करने से पहले ही शावक कैज पर चढ़ा और छत से होते जंगल में कूद गया होगा। हाथियों के दल के जरिये ढूढ़ाई हो रही है। उसके पग मार्क दिख रहें है और जल्द ही सुरक्षित पकड़ लेंगे।

प्रकाश वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया