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डिजिटल कैंपेन, चुनाव का फ्यूचर ट्रेंड, प्रचार पर आयोग नहीं बदले स्टैंड.. सरयूसुत मिश्र 

सार

चुनाव आयोग द्वारा पांच राज्यों के चुनाव में डिजिटल कैंपेन पर राजनितिक बहस शुरू हो गयी है| चुनावों का भविष्य कैसा होगा ? क्या पब्लिक सेफ्टी को देखते हुए फिजिकल कैंपेन को रोका जा सकेगा ? 

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विस्तार

कोरोना के बढ़ते संक्रमण और पांच राज्यों के चुनाव में इलेक्शन और पब्लिक सेफ्टी, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है|  चुनाव घोषणा के साथ 15 जनवरी तक सभाओं,रैलियों और यात्राओं पर रोक लगाकर डिजिटल कैंपेन की चुनाव आयोग की रणनीति पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है| जीवन के हर क्षेत्र में डिजिटल क्रांति हुई है| पिछले 2 सालों से कोरोना संक्रमण के चलते तमाम सुरक्षा उपाय अपनाते हुए जिन भी राज्यों में चुनाव हुए, वहां बाद में यह प्रमाणित हुआ कि भीड़ भाड़ वाली रैलियों और सभाओं ने, कोरोना के सुपर स्प्रेडर का काम किया|  पांच राज्यों में चुनाव घोषणा के पहले, चुनाव आयोग ने सोच समझकर व्यापक विचार विमर्श के उपरांत डिजिटल चुनाव कैंपेन की रणनीति अपनाई है| भले ही अभी कुछ दिनों के लिए रोक लगाई गई है, लेकिन राजनीतिक दल डिजिटल कैंपेन की  तैयारी में जुट गए हैं| चुनाव आयोग को पूरी कोशिश करना चाहिए कि पूरा चुनाव डिजिटल कैंपेन पर आधारित हो|

क्योंकि भविष्य के चुनाव के लिए डिजिटल कैंपेन ही ट्रेंड रहेगा| आयोग को अपने स्टैंड में परिवर्तन नहीं करना चाहिए| 15 जनवरी के बाद पुनर्विचार के समय कोरोना संक्रमण को देखते हुए डिजिटल कैंपेन पर ही अडिग रहना चाहिए|  पिछले सालों में कोरोना संक्रमण को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने कामकाज को डिजिटल बनाने के सुनिश्चित उपाय किए| इन वर्षों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री अनेक विकास कार्यक्रमों का शिलान्यास व उद्घाटन ऑनलाइन, वर्चुअल करते रहे हैं|  सरकारों की बैठकें डिजिटल होती रही हैं| यहां तक कि कैबिनेट की बैठक भी कई बार डिजिटली हुई है| कोरोना काल में सरकारी कामकाज में डिजिटल इंटरवेंशन से जहां संबंधित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, वहीं इससे सरकारी धन  में बचत भी हुई है| जब सरकारें डिजिटल माध्यमों से अपनी सारी जानकारी और सूचनाएं आम लोगों तक पहुंचा सकती हैं, और उनके साथ कम्युनिकेट भी कर सकती हैं, तो फिर चुनाव प्रचार में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

कोरोना में तो ऐसे दृश्य भी सामने आए थे, जहां भारत में रहने वाले बुजुर्ग माता पिता कोविड का शिकार होकर काल कलवित हो गए और विदेशों में जीवन यापन करने वाले उनके बच्चे उनके अंतिम संस्कार तक के लिए नहीं पहुंच पा रहे थे, ऐसी स्थिति में डिजिटल माध्यमों से ही अंतिम क्रिया की रस्मों को संपादित किया गया| परिवार के महत्वपूर्ण समारोह में भी दुनिया के कोने कोने में रहने वाले परिवार के लोग डिजिटल माध्यम से ही शामिल होते रहे हैं| जब व्यक्तियों की लाइफ और रिश्ते सब डिजिटल तकनीकी का उपयोग करते जा रहे हैं तो फिर चुनाव प्रचार डिजिटली करना राजनीतिक दलों के लिए निश्चित ही संभव है|

डिजिटल और सोशल मीडिया की पहुंच आज गांव गांव तक हो गई है| भारत का ऐसा कोई भी गांव नहीं होगा जहां एंड्राइड फोन नहीं हो| यहाँ भी दिन भर फ़ोन पर फेसबुक, व्हाट्सएप चलते ही रहते हैं| अब तो लोग अपने परिवार, करीबी रिश्तेदार और मित्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उसी पर कम्युनिकेट करते हैं| यह बहुत सहजता से संभव होता है| फोटो और वीडियो भी व्हाट्सएप के माध्यम से तत्काल भेजे जा सकते हैं| भारत आज पूरे विश्व में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है| आज दुनिया में भारत को विशेष दृष्टि से देखा जा रहा है| तकनीकी के क्षेत्र में भी भारत की प्रगति दूसरे देशों को अचंभित कर रही है| भारत में डिजिटल क्रांति की शुरुआत भले ही देर  से हुई| लेकिन आज देश की प्रगति के सारे सेक्टर में कार्य व्यवहार पूरी तरह से डिजिटल हो गया है| चाहे बैंकिंग हो, ट्रांसपोर्ट हो, बिजनेस या इंडस्ट्री हो, सब जगह व्यवहार डिजिटली हो रहा है, और इसे ही प्रमुखता दी जा रही है|

चुनाव ही ऐसा फील्ड बचा था जहां परंपरागत रूप से ऐसा माना जाता रहा कि सभाओं और रैलियों के माध्यम से जनता को एकत्रित कर, नेताओं के प्रचार से पार्टियों को अधिक लाभ होगा| जब भी कोई बदलाव होता है, तो परंपरावादी  लोग उस पर बहस मुबाहिसा चालू कर देते हैं| जब भारत में चुनाव मतपत्रों से होते थे और वोटिंग मशीनों से करने की शुरुआत की गई थी| तब भी बहुत सारे सवाल उठाए गए थे| एक दौर था जब मतपत्रों की लूट हर चुनाव में आम घटनाएं हुआ करती थी| इलेक्ट्रोनिक  वोटिंग मशीनों ने चुनाव का नया और पारदर्शी दौर हमें दिखाया है|

दुनिया के सभी विकसित देशों में इलेक्शन केम्पेन डिजिटली ही हो रहे हैं| अमेरिका जैसे राष्ट्र में तो वोटिंग ऑनलाइन शुरू हो गई है| कितने राष्ट्र हैं जहां डिजिटल प्रचार सफलतापूर्वक चल रहे हैं| इससे एक ओर जहां पॉलीटिकल पार्टीज की भाग दौड़ में कमी होती है  वहीं लोगों में डिजिटल और सोशल मीडिया के प्रति अवेयरनेस भी बढती है, जो उनके जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी सिद्ध होती है| केंद्र और राज्य सरकारें डिजिटल साधनों के उपयोग के लिए आम लोगों को जागरूक करने  के कैम्पेन पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं| बड़ी संख्या में देश के लोग आज डिजिटल साक्षर हो चुके हैं| यह बात आम लोगों के समझ में आ गई है कि डिजिटल माध्यम भविष्य का माध्यम होगा| बिना इसके अब जीवन यापन असंभव नहीं तो कठिन जरूर है|

डिजिटल साधनों के कारण आज चीजें इतनी आसान हो गई हैं कि घर बैठे बैंकिंग का काम करो या ट्रेन और हवाई जहाज का टिकट बनाओ, जिसके लिए घंटों लाइन में खड़े होना पड़ता था, वह आज व्यक्ति घर से ही कर पा रहा है| यह डिजिटल क्रांति के कारण ही संभव हो पाया है| चुनाव में डिजिटल क्रांति आज की सर्वाधिक जरूरत है| इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ला कर वोटिंग तो डिजिटल हो गई है| लेकिन प्रचार अभियान अभी भी परंपरागत रूप से हो रहे हैं| इस बार चुनाव आयोग ने डिजिटल कैम्पेन को प्रमुखता दी है| भले ही अभी 15 जनवरी तक सभाओं पर रोक हो, लेकिन इस पर पुनर्विचार आयोग परिस्थितियों के अनुरूप करेगा| उम्मीद की जानी चाहिए कि बढ़ते संक्रमण की  परिस्थितियों आयोग पांच राज्यों में चुनाव केवल डिजिटल कैम्पेन के आधार पर संपन्न कराने में सफल होगा|

अगर ऐसा करने में आयोग को सफलता मिलती है तो भारत में चुनाव की दिशा बदल जाएगी| राजनीतिक दलों की भी हिचक खत्म हो सकेगी| भविष्य में आम सहमति से राजनीतिक दल डिजिटल साधनों पर ही प्रचार प्रसार अपनाएंगे| अभी कुछ दल अपने प्रतिद्वंदी की डिजिटल शक्ति को अधिक मानते हुए चुनाव आयोग से सबको समान अवसर की बात कर रहे हैं, लेकिन इस बात का बहुत ज्यादा आधार नहीं है, क्योंकि राजनीतिक दलों की ताकत उनके कार्यकर्ता और समर्थक होते हैं, आज कोई भी कार्यकर्ता और समर्थक ऐसा नहीं होगा जो डिजिटल पावर का उपयोग नहीं कर रहा हो| चुनाव आयोग से उम्मीद है पांच राज्यों का चुनाव डिजिटल माध्यमों पर प्रचार अभियान से ही कराएगा| भौतिक रूप से सभाएं, रैलियां और यात्राएं इन चुनाव में शायद नहीं हो सकेंगी| ऐसा होता है तो यह भारतीय चुनाव प्रणाली के लिए बड़ी उपलब्धि होगी, जो भविष्य में चुनाव सुधार की दिशा को नया आयाम देगी|