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पुलिस कमिश्नर प्रणाली आई शिवराज और इकबाल को बधाई|

सार

जनसेवा हो पुलिस का सर्वोपरि लक्ष्य, ना हो अधिकारों की टांग खिंचाई|

janmat

विस्तार

मध्य प्रदेश आज उन प्रगतिशील राज्यों में शामिल हो गया है जहां पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू है| मध्य प्रदेश पुलिस का 40 साल पुराना सपना साकार हो गया है| भले ही 2 शहरों भोपाल इंदौर मे ही सही, पुलिस को मजिस्ट्रियल पावर मिल गए हैं| पुलिस को नए पावर मिले हैं तो सिविल सेवा के पावर कुछ कम हुए हैं|

देश में पावर का ही सारा संघर्ष है| चाहे राजनीतिक “पावर” हो या प्रशासनिक इसे पाने और चमकाने का सतत प्रयास चलता ही रहता है|  कहने को तो सब कुछ जनहित और जन सेवा के लिए होता है, लेकिन कई बार पॉवर मिल जाने पर जनहित किनारे हो जाता है| समन्वय और सम्मान के बिना कोई भी व्यवस्था परिवार या समाज नहीं चल सकता|

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करिश्माई नेतृत्व और कार्यशैली का सबसे उजला पक्ष है “सबसे समन्वय और सबका सम्मान” | शिवराज की  यह ताकत राजनीति, प्रशासन और समाज में उन्हें हमेशा विजेता बनाती रही है| आईएएस और आईपीएस लॉबी के चक्रव्यूह में फसी पुलिस कमिश्नर प्रणाली आज साकार रूप ले सकी है, तो दोनों अखिल भारतीय सेवाओं के बीच समन्वय और सम्मान बनाने की शिवराज की शैली को ही इसका श्रेय जाता है| 

पुलिस कमिश्नर प्रणाली  से भोपाल और इंदौर में  जमीन पर क्या और कैसा बदलाव आएगा यह तो धीरे-धीरे पता चलेगा, लेकिन दोनों शहरों में पुलिस के साथ-साथ जनता में भी नई प्रणाली को लेकर उत्साह है| अभी जो  प्रारंभिक तथ्य समझ में आए हैं, उन से यह पता चलता है कि देश के दूसरे बड़े शहरों में लागू पुलिस आयुक्त प्रणाली को मिले अधिकार की तुलना में, मध्य प्रदेश की पुलिस आयुक्त प्रणाली को कम अधिकार दिए गए हैं|

नई प्रणाली लाकर आईपीएस को जहां खुश किया गया है वही आईएएस को भी साधे रखा गया है|

40 साल तक पुलिस कमिश्नर प्रणाली को रोकने में सफल रहे आईएएस अधिकारी इस बार चुप हैं| अपनी सेवा के  लीडर को दबे छुपे कोसने के अलावा इस सेवा के सभी अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं| आईएस सर्विस मीट कार्यक्रम निरस्त होने के पीछे ऐसी ही कशमकश को कारण माना जा रहा है|

वैसे आईएएस अधिकारियों को बुरा मानने जैसी कोई बात नहीं है| जब देश के 70 शहरों में यह प्रणाली काम कर रही है तो भोपाल और इंदौर में आ जाने से ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा? मध्यप्रदेश में तो मुख्यमंत्री रहने के बाद मंत्री बनने का भी उदाहरण है|

देश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली का इतिहास आजादी के पहले का है| देश में पुलिस व्यवस्था “पुलिस एक्ट” १८६१ के अंतर्गत संचालित होती है| ब्रिटिश सरकार ने पहला पुलिस कमिश्नर सिस्टम कोलकाता में और उसके बाद मुंबई और चेन्नई प्रेसिडेंसी में लागू किया था| दिल्ली में 77 से 79 के बीच पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हुआ था|

पुलिस कमिश्नर प्रणाली से निर्णय त्वरित हो सकेगा|

पुलिस और सिविल सेवा के बीच कई मुद्दों पर मतभिन्नता के कारण कई बार परिस्थितियां बिगड़ जाती थी| अब शांति व्यवस्था अपराधों की विवेचना रोकथाम में निर्णय त्वरित हो सकेंगे| अब निर्णय और क्रियान्वयन दोनों पुलिस के पास होगा| जितना अधिक पावर उतनी अधिक जवाबदारी| पुलिस आयुक्त प्रणाली में पुलिस की जवाबदारी बढ़ जाएगी| अब विपरीत परिस्थितियों के लिए पुलिस सिविल अधिकारियों पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकेगी|

दोहरी व्यवस्था में निर्णय में होने वाला विलंब अब नहीं होगा|

प्रणाली तो बदल गई, लेकिन केवल प्रणाली बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती, व्यवस्था बदलने के लिए व्यक्ति को बदलना पड़ता है| इसलिए पुलिस आयुक्त के चयन में सरकार को अत्यंत सतर्कता की आवश्यकता होगी|
नई प्रणाली में पुलिस और सिविल सेवा के बीच अधिकारों के बंटवारे और उपयोग पर टकराहट होगी| यह स्वाभाविक प्रक्रिया है कोई नई बात नहीं है|दोनों सेवाओं के बीच नयी प्रणाली शीत युद्ध का कारण नहीं बनना चाहिए| 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सबसे समन्वय और सम्मान  की अपनी शैली को और मजबूत करना होगा| रायचंदों, जयचंदों और छलचंदों से सरकार को सावधान रहना होगा|

पुलिस के लिए पुलिस कमिश्नर प्रणाली बहुत बड़ी उपलब्धि है| पुलिस को अपनी छवि और चेहरे को बदलने के लिए काम करना होगा| पुलिस को जन विश्वास हासिल करना होगा| पुलिस से डर और भय का वातावरण कम करना होगा| मित्र पुलिस की अवधारणा को लागू करना होगा| मारपीट, गाली-गलौज लाठी-डंडे के प्रयोग की प्रवृत्ति से पुलिस को बचना होगा| टेक्नोलॉजी बेस्ड पुलिसिंग को बढ़ाना होगा| पुलिस को साइबर फ्रेंडली बनाना होगा| अपराध और अपराधियों में आ रही विविधता के अनुरूप तकनीकी रूप से पुलिस को दक्ष बनाना पड़ेगा|

पुलिस सुधार की दिशा में पुलिस आयुक्त प्रणाली को एक सार्थक कदम माना जा सकता है| लेकिन यह पूरा पुलिस सुधार नहीं है| पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करना होगा| पुलिस को फिक्स टेन्योर देना होगा| पुलिस की पदस्थापनाओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करना होगा| सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस सुधार के लिए जो गाइडलाइन दी गई है उसका पालन करके ही पूर्ण पुलिस सुधार लाया जा सकेगा|

पुलिस आयुक्त प्रणाली को देश की दो सर्वोच्च सेवाओं के बीच जीत-हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए| जनता सर्वोपरि है अधिकार किसके पास है इससे जनता को कोई लेना देना नहीं है|  जनता को तो शांति व्यवस्था और सुरक्षित वातावरण चाहिए| पुलिसिंग में नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ाने की आवश्यकता है|

नई प्रणाली का इंतजार भले लंबा हो गया, लेकिन क्रियान्वन त्वरित करना होगा| पुलिस कमिश्नर सिस्टम यदि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने को सबसे पहले अभियान के रूप में करता है, और इस क्षेत्र में सुधार सुनिश्चित हो जाता है, तो पुलिस कमिश्नर प्रणाली की सफलता जन-जन तक अपने आप हो जाएगी|

आज शहर की ट्रैफिक व्यवस्था दुरावस्था में है| ऑटो मीटर से नहीं चलते हैं| सामान्य नागरिक लुटता है, चौराहों पर सिग्नल काम नहीं करते, पुलिस कमिश्नर प्रणाली की सफलता और जनता को बेहतर सुविधाओं की शुभकामनाओं सहित|