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अमृत का चक्कर, राहु को कटाना पड़ा सिर 

सार

AI समिट दुनिया में भारत को उसका लीडर बना गई तो दूसरी तरफ कांग्रेस और उसके लीडर को शर्टलेस साबित कर गई..!!

janmat

विस्तार

    AI समिट के दिल्ली डिक्लेरेशन पर दुनिया की महाशाक्तियों समेत 88 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए. डिक्लेरेशन पर जितना प्रभावी अमल होगा, भारत उतना ही AI में अपनी धाक जमाने में सफल होगा. दुनिया के सारे AI के दिग्गज दिल्ली में जुटे तो कांग्रेस को कुछ तो करना ही था. इस बार तो यूथ कांग्रेस ने ऐसा प्रदर्शन किया जो उनकी पार्टी को ही शर्टलेस कर गया. 

    पॉलिटिक्स में कई बार कैलकुलेशन गलत हो जाते हैं. गलती स्वीकार करना ही लोकतंत्र है जो यूथ कार्यकर्ता प्रदर्शन में थे, वहां के प्रतिभागियों ने तो उन्हें खुद ही सजा दे दी. लेकिन अब कानून भी अपना काम कर रहा है. कांग्रेस को इससे लाभ होगा या नुकसान. यह तो अगला लोकसभा चुनाव ही बताएगा.

    पौराणिक कथाओं में एक कथा अमृत के चक्कर में राहु के  सिर कटाने की है. कांग्रेस ने भी AI समिट में व्यवधान से अमृत चखने की कोशिश की, लेकिन उसे तो विष ही मिलता दिखाई पड़ रहा है. जो कार्यकर्ता लीडर के बहकावे में आ गए थे, वे अब अपनी कानूनी लड़ाई खुद लड़ेंगे. देश की छवि खराब करने का आरोप भी उन्हें परेशान करेगा. राष्ट्र तो बोलेगा नहीं, लेकिन उनका मन तो जरुर बोलेगा. जिन भी कांग्रेस जनों का मन बोला है, वह सब पार्टी से दूर चले गए हैं.

    आंदोलन तो लोकतंत्र का प्राण है. शमशान घाट में अगर कोई डीजे बजा आंदोलन करता है, तो फिर वैसे ही पिटाई होगी जैसे कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों की हुई. पहले तो यह सवाल खड़ा हुआ कि इस प्रदर्शन पर क्या राहुल गांधी की सहमति है लेकिन जब राहुल गांधी ने वैसा ही पोस्ट किया जैसा प्रदर्शनकारियों की टीशर्ट में छपा हुआ था. तब देश को समझने में कोई भ्रम नहीं रहा कि यह उनकी ही AI उपज है. कांग्रेस को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) कहा जाता है. अब बीजेपी एआईसीसी को एंटी इंडिया कम्युनिस्ट कांग्रेस कह रही है.

    इस कारनामे पर बीजेपी जहां-जहां प्रदर्शन कर रही है, वहां टकराहट को कांग्रेस ऊर्जा के रूप में देख रही है. इतना नेगेटिव थॉट प्रोसेस कांग्रेस में ही हो सकता है. उसके प्रदर्शन को एंटी इंडिया माना जा रहा है. मौका मिला है तो बीजेपी लोगों के बीच संदेश दे रही है कि कांग्रेस ने देश का अपमान किया है. अब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन को गंदा और नंगा बताया है, वह लोगों के मन मस्तिष्क को प्रभावित कर रहा है. 

    महात्मा गांधी ने एक धोती पहनकर देश की आजादी के लिए आंदोलन किया. उन्होंने देश की गरीबी के प्रतीक के रूप में वस्त्र छोड़े थे. कांग्रेस की तरह शानदार कपड़ों के नीचे गंदी टीशर्ट पहनकर राजनीति नहीं की थी. कांग्रेस ने AI  समिट को तो अपमानित किया ही है. महात्मा गांधी को शर्टलेस बताकर राष्ट्रपिता को भी अपमानित किया जा रहा है.

    राजनीति में तो हर पार्टी को जन भावनाएं समझ आती हैं. यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. अगर कांग्रेस के साथ उनके गठबंधन का कोई भी दल इस नंगे प्रदर्शन पर साथ नहीं खड़ा हो रहा है, तो इसी से कांग्रेस को समझ जाना चाहिए, कि जन भावनाएं इस प्रदर्शन के खिलाफ हैं. पीएम ने भी इस बात को उठाया कि मीडिया को कांग्रेस के पाप के लिए विपक्ष के रूप में ढंकने की जरूरत नहीं है, जिस भी दल का पाप है उसका नाम स्पष्टता के साथ लिया जाना चाहिए.

     अब तो कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना भी निरर्थक सी लगती है. उनकी जिद् उन्हीं मुद्दों पर आगे बढ़ने की है जो पार्टी की गर्दन काटते हैं. कितने बड़े नेता पार्टी छोड़ गए फिर भी कांग्रेस और उसकी नेता ना सुधारना चाहते हैं और ना ही अपनी कोई गलती स्वीकारना चाहते हैं.

    कांग्रेस देश की ग्रैंड ओल्ड पार्टी है. उसका जनाधार राष्ट्रीय स्तर पर अभी भी बना हुआ है. उसके गठबंधन के जितने भी सहयोगी हैं, वह कितने भी असहज हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अपने राजनीतिक विरोध के लिए कांग्रेस के सहारे पर ही चल रहे हैं. राजनीति खासकर विपक्ष की भूमिका सुर्ख़ियों तक सीमित हो गई है. कुत्ता आदमी को काटे यह तो सामान्य घटना है. अब तो राजनीति आदमी कुत्ते को काटे ऐसी फील देने वाले मुद्दे और आचरण पर सिमट गई है.

    लोकतंत्र तुलना पर जीता है. चुनाव परिणाम इसी पर आते हैं. वैसे तो राजनीति का खेल किसी भी अच्छे व्यक्ति के लिए सक्सेस देने वाला नहीं है. जनमत अपने विवेक से तुलना कर देश के लिए उचित का निर्णय कर लेता है.

    भारत सरकार की AI  समिट को अपना पॉलिटिकल गैम्बिट बनाने के लिए कांग्रेस को खुश होने से कोई रोक नहीं सकता है. सभी दलों के मतदाता विभाजित हैं. बुद्धिजीवी और मीडिया भी दलों के हिसाब से बंटे हुए हैं. सब उसी हिसाब से वैसी ही कथाएं बताते हैं.

    जो जमीन से जुड़ा नहीं है, जो भारत की खुशबू से परिचित नहीं है, जो जन भावनाओं से डिस्कनेक्ट है, जिस पार्टी के पास प्रदर्शनों की रणनीति बनाने वाले सुलझे नेता नहीं हैं, उनको तो AI की सबसे ज्यादा जरूरत है. AI तो अब आया है, लेकिन कांग्रेस के पूर्वजों ने AI को इस कमेटी से पहले ही जोड़कर घोषित कर दिया था. 

    एंटी इंडिया बनने की बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाना ही अमृत की चाहत में सिर कटाने की राहु की कथा दोहराने से बचा सकता है.