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अगड़े-पिछड़े दलित सब का यही है कहना, ईमानदार नेता सख्त सरकार ही है चुनना

सार

यूपी चुनाव में प्रचार अभियान चरम पर है| प्रथम चरण का मतदान 10 फरवरी को होना है| जाति, धर्म, माफिया, मंदिर, मस्जिद, कब्रिस्तान, गर्मी, सर्दी, दंगा, पलायन, पाकिस्तान, जिन्ना सब कुछ प्रचार में छाए हुए हैं| “बाबा और दो लड़के” एक दूसरे पर हर रोज नए-नए डायलॉग से हलाकान किए हुए हैं|

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विस्तार

यूपी में जनता का मूड जानने के लिए प्रयागराज में गंगा-जमुना संगम के किनारे बसी कल्पवासी नगरी में मतदाताओं के रुख पर चर्चा की गई| कल्पवासी नगरी में कल्पवासियों के अलावा हर स्नान पर्व अमावस्या, बसंत पंचमी पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आए और गंगा स्नान का लाभ उठाया| 

प्रयागराज मेला क्षेत्र मिनी यूपी जैसा है| यूपी का कोई ऐसा जिला नहीं होगा जहां के श्रद्धालु माघ मास के महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व पर नहीं पहुंचते हैं| मिनी यूपी  धर्म नगरी में अगड़े-पिछड़े, दलित सभी समुदाय के लोग धार्मिक आनंद में मग्न हैं| चुनाव पर चर्चा में उनके मुद्दे जो निकल कर आए उसके आधार पर जनमत का विश्लेषण किया  जा रहा है|

जन मन का सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार का निकला| सभी लोगों का यह कहना था कि ईमानदार नेता के लिए ही मतदान करेंगे| कुशीनगर के कन्हैयालाल ने कहा, कि हर जगह भ्रष्टाचार से  लोग ऊब गए हैं| ईमानदार नेता ढूंढो तो मोदी-योगी के अलावा किसी भी दल में कोई नेता शायद ही दिखाई पड़ता हो|

मोदी और योगी की ईमानदार छवि उनकी सबसे बड़ी यूएसपी है| इन दोनों नेताओं के सामने अखिलेश यादव, मायावती या कांग्रेस के नेता मुकाबले में कहीं भी नहीं टिकते| खास बात यह है कि जनता भी मोदी और योगी को ईमानदार मानती है| यह दोनों नेता काफी लंबे समय से सत्ता की राजनीति में शिखर पर हैं| गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ ही प्रधानमंत्री के रूप में 20 साल तक सरकार में रहने वाले नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई कुछ भी आरोप लगा सकता है लेकिन भ्रष्टाचार के संबंध में आज तक उन पर कोई भी आरोप नहीं लगा पाया|

ऐसी ही स्थिति योगी आदित्यनाथ की भी है| अखिलेश यादव और दूसरी पार्टी के नेता योगी के खिलाफ चुनाव में लगातार जहर उगल रहे हैं, लेकिन यह विरोधी नेता भी योगी पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सके| जनता के मन में  ईमानदार नेता चुनने का संकल्प निश्चित रूप से भाजपा के पक्ष में मतदान का संकेत कर रहा है|

वैसे तो यूपी के चुनाव में जातीय राजनीति चरम पर है| हर दल जाति नेताओं को साधने में पूरी ताकत लगाए हुए है| अखिलेश यादव ने शुरू में भाजपा सरकार के मंत्रियों को तोड़कर सपा में शामिल कर लिया था| इसके कारण ऐसा माहौल बन रहा था कि शायद पिछड़ी जातियां भाजपा से कट रही है|

कुशीनगर के संदीप पटेल का कहना है कि सपा के पिछड़े वर्गों की राजनीति की असलियत इसी बात से समझी जा सकती है, कि स्वामी प्रसाद मौर्य को अपनी पडरौना सीट बदलकर फाजिलनगर जाना पड़ा| जिस सीट से वे विधायक हैं, वहां कांग्रेस के ताकतवर ओबीसी नेता आर पी एन  सिंह के भाजपा में शामिल  होने से सपा की जाति गणित गड़बड़ा गई है| अपर्णा यादव का बीजेपी में शामिल होना भी सपा और अखिलेश के परिवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है| गोरखपुर के गिरीश शर्मा कहते हैं कि अखिलेश यादव ओवरकॉन्फिडेंस में है, अखिलेश यादव का अति मुस्लिमवाद और  माफियाओं को टिकट देना उनकी जाति राजनीति के मिलते लाभ को भी कमजोर कर रहा है|

जनमत के मूड में दूसरा बड़ा मुद्दा कानून व्यवस्था का उभरा | विश्लेषण की सटीकता के लिए यह विशेष रुप से ध्यान रखा गया है कि अगड़े-पिछड़े, दलित सभी वर्गों की भावनाओं को शामिल किया जाए ताकि निष्कर्ष में गलती की संभावना कम से कम हो| 

आजमगढ़ के कन्हैया लाल कहते हैं कि योगी सरकार की सबसे बड़ी सफलता गुंडा और माफिया राज खत्म करना है| आज सारे गुंडे माफिया को योगी सरकार ने करारा सबक सिखाया है| जनता चाहती है कि, शांति से बिना गुंडागर्दी के उनको जीने का मौका मिले|

इस मामले में योगी सरकार सफल दिखाई पड़ती है| आज बेटियां, महिलाएं स्वछंदता से आगे बढ़ रही हैं| गुंडई का माहौल अब यूपी में नहीं है| माफिया और गुंडागर्दी के मामले में सपा का रिकॉर्ड खराब माना जाता है|

महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर सभी वर्गों के लोग कहते हैं, कि महंगाई से सभी परेशान हैं| रोजगार की समस्या भी काफी है| प्रतापगढ़  से आये राजाराम कहते हैं कि जीवन सुरक्षित रहेगा तो किसी न किसी तरह पेट भर ही लेंगे|

गरीबों को दिए जा रहे प्रधानमंत्री आवास, उज्जवला गैस, निशुल्क खाद्यान्न वितरण योजना से भाजपा ने मतदाताओं को आकर्षित किया है| किसी भी सरकार ने आम लोगों को निजी स्तर पर लाभ पहुंचाने के लिए पहले इस तरह की योजनाएं लागू नहीं की थी|

ऐसा लगता है अखिलेश यादव मीडिया में ज्यादा फोकस हैं| योगी के शासन चलाने की सख्त स्टाइल  को भी जनता पसंद कर रही है| जनमत के मूड में महिलाएं खुलकर मोदी-योगी का समर्थन कर रही हैं| तीन तलाक का कानून बनाकर भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं के बीच अपनी पहचान बनाई है| इस चुनाव में भी मुस्लिम महिलाओं का कुछ समर्थन भाजपा को मिल सकता है|

पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन और जाटों का समीकरण भी अखिलेश यादव से छूटता दिखाई पड़ रहा है| प्रचार अभियान की शुरुआत में सपा रालोद की दिखती बढ़त दिनों दिन कम होती जा रही है| इसका बड़ा कारण इस अंचल में जाटों और मुस्लिमों की प्रतिद्वंदिता है| जाट स्थानीय स्तर पर मुस्लिमों की ताकत बढ़ाने के लिए बिल्कुल भी काम नहीं करेगा| मुस्लिम और जाट दोनों कौमें इस अंचल में बराबरी की ताकतवर और समृद्ध हैं| जिलों और स्थानीय स्तर पर इन्हीं दोनों कौमों के बीच टक्कर हमेशा बनी रहती है|

कैराना और अन्य शहरों से पलायन का दर्द जाट और हिंदू कभी भुला नहीं सकते| वोटिंग मशीन पर जाट मुस्लिम ताकत बढ़ाने के लिए मतदान करेंगे यह मुमकिन नहीं लगता|

बसपा के कमजोर होने के बाद दलितों का रुझान भी भाजपा की ओर हो गया है| 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव, 2017 के विधानसभा चुनाव में दलितों के समर्थन के कारण ही भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिल सकी| दलितों का ट्रेंड अभी भी भाजपा के साथ बना हुआ लगता है| यह चुनाव जाति की राजनीति करने वाले नेताओं के लिए सबक भी साबित होने वाला है|

भाजपा को विपक्षी विखराव का भी फायदा मिल रहा है| यूपी की प्रत्येक विधानसभा सीट पर कम से कम तीन प्रत्याशी मैदान में है| किसी-किसी सीट पर चार प्रत्याशी ताकत से लड़ रहे हैं| भाजपा अब तक मिले अपने मत प्रतिशत को भी कायम रखने में सफल रहती है तो भी विपक्ष के बिखराव और  विपक्षी मतों के बंटवारे का लाभ भाजपा को मिल सकेगा|

प्रयागराज में बनी मिनी यूपी कल्पवासी नगरी की जनता के मूड पर भरोसा किया जाए, तो भाजपा फिर यूपी में बड़ी जीत दर्ज करने जा रही है|

यह विश्लेषण है सही स्थिति तो चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगी|