• India
  • Sat , Apr , 20 , 2024
  • Last Update 05:42:AM
  • 29℃ Bhopal, India

भंग का रंग और उफ्फ़, बड़े फैसले: दिग्गी का, जो था विपक्ष, अब होगा पक्ष, कमलबाबू की दिशा होगी दिल्ली तो शिबबाबू..?

आशीष चौबे आशीष चौबे
Updated Fri , 20 Apr

सार

उड़ते रंग गुलाल के साथ राजनीति की धरती पर बड़ा भूचाल आने जा रहा है. राजनीति के दिग्गज शिव बाबू और कमल बाबू के बीच एक गोपनीय बैठक हुई..!

janmat

विस्तार

उड़ते रंग गुलाल के साथ राजनीति की धरती पर बड़ा भूचाल आने जा रहा है। राजनीति के दिग्गज शिव बाबू और कमल बाबू के बीच एक गोपनीय बैठक हुई, जिसके बाद दोनो नेता एक बडे फैसले की तरफ बढ़े हैं। एक और आवारा खबर के अनुसार सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्गी दादा भी अब अपनी असल पार्टी का हाथ थामने जा रहें हैं। 

खबर जुड़ी है मप्र की राजनीति से..! रोज बदलाव की खबरों से तंग आकर मुख्यमंत्री शिवबाबू ने आखिरकार बड़ा फैसला ले ही लिया है। इस फैसले को लेकर बड़ी भूमिका निभाई नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलबाबू ने..!  होली दहन के बाद दोनो नेताओं ने तय किया है कि शिवराज भाजपा छोड़कर प्रदेश कांग्रेस की कमान सम्हालेंगे। 

शिव बाबू का साफ कहना है कि उहापोह के चलते पक चुके हैं। इसके पहले, भाजपा कोई बड़ा फैसला ले ,वह खुद अपना निर्णय आम कर रहें हैं।आत्मविश्वास से लबरेज शिव बाबू ने दावा किया है कि 'जहां हैं हम-वहां है दम' चूंकि कांग्रेस में जनता के बीच पैठ वाले नेता की कमी है तो वहां, लगातार शासन के चलते भाजपा के खिलाफ एंटीइनकंबेंसी का माहौल भी पनप रहा है। ऐसे में कांग्रेस ही एक बेहतर विकल्प है। 

मुलाकात में कमलनाथ ने भी अपनी पीड़ा बयां की। स्पष्ट किया कि उनका रायता तो जमकर फैला हुआ है। गुटबाजी के चलते लँका लगी पड़ी है और भविष्य में कुछ अच्छा होगा,लगता नही। अब चूंकि दिल्ली में मौका मिल रहा है तो राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद पकड़ लेने में ही भलाई है। सबंध अच्छे हैं तो शिवबाबू मप्र में और कमलबाबू दिल्ली में बैठकर समीकरण सेट करेंगे। 

दिग्गी दादा भी उत्साहित हैं। अपने फैसले को साफ करते हुए एलान किया है कि अब वो भाजपा का हिस्सा होंगे। हालांकि अब तक अपरोक्ष रूप से पार्टी की मदद कर रहे थे लेकिन बेटे का करियर और अपनी उम्र को देखते हुए परोक्ष रूप से पार्टी का हिस्सा होंगे। तीनो नेताओं ने यह भी तय कर लिया है कि रंगपंचमी के बाद अपने अपने फैसलों की दिशा में बढ़ लेंगे। 

होली का माहौल है। भंग का रंग दिमाग के उपरी माले पर पहुंच धिकताना धिकताना कर रहा है। दिमाग का दही हो चुका है और होश फ़ाख्ता। यह जानकारी उसी आलम में हासिल हुई है। "वैसे बुरा न मानो होली है और खबर..उफ्फ़ एकदम पोली है"।