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सस्ता हुआ डीजल-पेट्रोल..! मोदी ने छीना विपक्ष से मुद्दा  

सार

पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में जो आग लगी थी उस पर वित्त मंत्री ने पिछले दिनों राहत की जो बौछार की उससे सभी ने ठंडक महसूस की है..!

janmat

विस्तार

देश में सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में जो आग लगी थी उस पर वित्त मंत्री ने पिछले दिनों राहत की जो बौछार की उससे सभी ने ठंडक महसूस की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सस्ता ईंधन करने के ऐलान को प्रधानमंत्री मोदी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। ऐसा लगा मानो ईंधन के दाम घटने पर मानसून भी प्रसन्न हो गया और आसमान पर बादल छाए और राहत की बारिश करने लगे।

लेकिन इसे केंद्र सरकार की तरफ से राहत की बेमौसम बारिश भी माना जा रहा है। क्योंकि अभी किसी राज्य में कोई चुनाव नही हैं। लेकिन महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में अलबत्ता सर्वोच्च अदालत के आदेश पर जून में पंचायत व नगरीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं। मगर बिना किसी जन आंदोलन के ईंधन के सस्ता करने पर राजनीतिक हलकों में हैरत जरूर हो रही है।

इस बीच एक अफवाह यह भी चली कि मप्र सरकार ने भी डीजल पेट्रोल पर टैक्स घटाया है। जब पड़ताल की गई तो वह फर्जी साबित हुई। लेकिन लोगों का ख्याल है कि ओबीसी आरक्षण और पंचायत व नगर सरकारों के चुनाव के चलते शायद मुख्यमंत्री मामा शिवराज भी सबके ख्याली पुलाव को सही साबित कर दें।

वैसे यूक्रेन - रूस युद्ध के चलते आशंका यह थी कि अभी ईंधन के दाम नहीं घटेंगे। असमय - बिना की वजह के ईंधन को सस्ता कर मोदी सरकार ने एक नई लाइन खींचने की भी कोशिश की है। बहुत संभव है सरकार को या खबर लगी हो क्विड डीजल पेट्रोल के मुद्दे पर विपक्ष देश में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है इसलिए सरकार के खिलाफ माहौल बनाने वाले गुब्बारे की दाम घटाकर मोदी ने पहली हवा निकाल दी उसके पहले मुख्यमंत्रियों से बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार अपने हिस्से के टैक्स में कमी कर डीजल पेट्रोल सस्ता कर सकते हैं।

मगर इस पर किसी भी राज्य भी ने दाम नहीं घटाएं। पहले से आर्थिक तंगी से दो चार हो रहे भाजपा शासित राज्यों ने भी टैक्स में कोई कटौती नही की। इंतजार के बाद केंद्र सरकार ने अचानक दाम घटाकर सबको इसके पीछे कारण खोजने के लिए एक मुद्दा दे दिया। बहरहाल प्रतिबंध झेल रहे रूस से सस्ता तेल लेकर मोदी सरकार अपनी जनता की थोड़ी मुश्किल कम करती जरूर दिख रही है। 

योगी की धमक और मामा की बमक-

भाजपा शासित राज्य के दो मुख्यमंत्री खूब चर्चाओं में है। गुंडे बदमाशों की कमर तोड़ने के लिए अवैधानिक कारोबारियों को 24 घंटे में काबू में करने का उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी का अल्टीमेटम खूब सुर्खियां बटोर रहा है। उन्होंने कहा कि जो गुंडे बदमाश शहरों से लेकर कस्बों तक गैर कानूनी तरीके से स्कूटर कार स्टंट और यात्री वाहनों का संचालन करते हैं। उन पर कठोर कार्रवाई की जाए आर्थिक वितरण की कमर तोड़ दी जाए ताकि समाज विरोधी गतिविधियां बाबू में लाई जा सके।

साथ ही जिन अपात्र लोगों के पास मुफ्त और सस्ते राशन पाने के कार्ड बने हुए हैं। वह अपने राशन कार्ड जमा करा दें अन्यथा उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी। इसमें उनके खिलाफ बाजार दर से राशन की कीमत वसूलने की बात की गई। इसका असर यह हुआ इस सरकारी दफ्तरों में अपात्र राशन कार्ड धारियों की जमा करने के लिए कतारें लग गई।

यह देख कर आम लोगों को अच्छा लगा उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जबरदस्त धमक है।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मामा शिवराज सिंह अपने प्रशासन को जगाने और सक्रिय करने के लिए सुबह 6:30 बजे मुख्यमंत्री निवास में बैठक कर कलेक्टर एसपी और वरिष्ठ अधिकारियों से वीडियो कॉलिंग कर जनता की दिक्कत कम करने के लगातार निर्देश दे रहे हैं।

एक तरह से यह उन्होंने सोते हुए अफसरों को मुस्तेद करने का नवाचार शुरू किया है। जनता की नब्ज पकड़ने वाले मुख्यमंत्री के रूप में जान शिवराज सिंह की अलग पहचान है। अब जनता उम्मीद कर रही है कि मामा जिस तरह से अधिकारियों क्लास लेकर काम करने के लिए विवश कर रहे हैं उससे लगता है कानून व्यवस्था बेहतर होगी और भ्रष्टाचार में कमी आएगी। 

कांग्रेस को कमल का डर दिखा रहे हैं नाथ-

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ साफगोई के लिए मशहूर है पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस के एक बैठक में अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए भाजपा और उसके संगठन की खासियत बताई।उन्होंने कहा कांग्रेस को भाजपा से नहीं बल्कि उसके संगठन से खतरा है। लब्बोलुआब है था कि हमें भाजपा का संगठन ही हरा सकता है। इसलिए मंडल स्तर पर कार्यकर्ता और जनता से संपर्क व संवाद करने की जरूरत है।

जनता के हित में संघर्ष करने में कांग्रेस आगे आती है तो फिर जीतने से कोई नहीं रोक सकता। उनकी ये नसीहत अच्छी तो है लेकिन इस पर अमल करने की शुरुआत खुद कमलनाथ और प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से करने की जरूरत है। कार्यकर्ताओं को प्रतीक्षा है कि कौन नेता अपने भाषाओं पर सबसे ज्यादा अमल करके बताता है।