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पलायन नहीं, पलटवार के लिए पलटन करें तैयार

सार

गलत लोग, गलत सोच और गलत नीति स्वर्ग को भी कैसे नर्क में बदल देते हैं, कश्मीर इसका उदाहरण है। नापाक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के राजनीतिक दुकानदार कश्मीर में आस्तीन के सांप की भूमिका वर्षों से निभा रहे हैं..!

janmat

विस्तार

धारा 370 समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करते हुए राज्य का विभाजन करने का जो क्रांतिकारी कदम उठाया गया था, उससे कश्मीर में न केवल शांति का माहौल बना था बल्कि विकास की नई बयार भी बहना शुरू हो गई थी।

परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव भी जल्द ही होने की संभावना दिखने लगी है, इसीलिए अलगाववादी सोच वाले राजनीतिज्ञ जो अभी तक दुबके हुए थे, उन्होंने फिर आतंकी गतिविधियों से अपने जनाधार को जगाने का अफसोसजनक काम शुरू कर दिया है। 

कश्मीर में 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं के साथ आतंक की जो खौफनाक घटनाएं हुई थीं, उसका नमूना फिल्म 'कश्मीर फाइल्स' में देश ने देखा। फिल्म के माध्यम से देश की भावनाएं कश्मीर से जुड़ीं और कश्मीर में बदलाव को राष्ट्रव्यापी समर्थन मिलने लगा।

यह परिवर्तन देख कर जाहिल पड़ोसी पाकिस्तान ने अपने कश्मीरी गुर्गों के जरिये पंडितों और हिंदुओं की टारगेट किलिंग का खौफनाक दौर शुरू किया है। आतंक की टारगेट किलिंग की अप्रोच पहले की घटनाओं से जुदा है। सॉफ्ट टारगेट का कत्लेआम कर पंडितों और हिंदुओं में डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। 

पंडितों का डरना स्वभाविक है लेकिन कश्मीर के लिए कश्मीरी पंडित और गैर हिंदुओं ने अब तक जो बलिदान दिया है, उसकी सफलता का समय आ गया है।  टारगेट किलिंग आतंकवादियों का अंतिम हथियार है। इसका मुकाबला ताकत के साथ कर लिया गया तो फिर कश्मीर नए रूप में हमारे सामने होगा। 

कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं ने पहले भी बहुत बलिदान दिया है और आज भी उनको बलिदान होना पड़ रहा है लेकिन मातृभूमि के लिए बलिदान भारतीय संस्कृति है। कश्मीर से हिंदुओं के पलायन नहीं बल्कि पलटवार करने के लिए हथियारबंद पलटन बनाकर सामने आने की जरूरत है। जो लोग चेहरे पर कपड़ा लगाकर पिस्तौल से गोली दागते हैं, वे बहुत डरपोक होते हैं। पलटवार के लिए हमने सिर पर कफन बाँध लिया तो फिर वह कहीं दिखाई नहीं पड़ेंगे। 

कश्मीर में पंडितों और हिंदुओं के साथ टारगेट किलिंग की जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं वह ‘कश्मीर फाइल्स पार्ट -2 ’ मानी जा सकती हैं। कश्मीर फाइल्स फिल्म में तो रील में दृश्यों को फिल्माया गया लेकिन आज तो वास्तव में कश्मीरी पंडित और हिंदू हर रोज आतंक के लिए बलिदान हो रहे हैं।  

डरने नहीं, डराने की जरूरत है। कश्मीर काफी आगे बढ़ गया है। अब कोई टारगेट किलिंग भारत को टारगेट से भटका नहीं सकती है। जहां तक पाकिस्तान का सवाल है वह तो खुद मौत के मुहाने पर खड़ा हुआ है। किस दिन पाकिस्तान टूट जाए कहा नहीं जा सकता। आज वहां पेट्रोल ₹200 लीटर से ज्यादा हो गया है। राजनीतिक घमासान सड़कों पर है। आर्थिक हालत रसातल में पहुंच चुके हैं। यासीन मलिक को भारत में सजा मिलती है तो पाकिस्तान में मातम मनाया जाता है। 

कोई भी अमन पसंद और प्रगतिशील व्यक्ति सबसे ज्यादा जाहिल पड़ोसी से परेशान होता है। उसके पास सब कुछ होता है लेकिन जाहिल पड़ोसी उसे दुख देने में कोई कमी नहीं रखता। भारत देश भी जाहिल पड़ोसी पाकिस्तान का दुःख भुगत रहा है। अब तो ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान पर एक सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, हर रोज एक सर्जिकल स्ट्राइक करना पड़ेगा। 

कश्मीरी पंडितों के कत्लेआम को हम हत्याएं नहीं कह सकते। बल्कि यह तो मातृभूमि के लिए कश्मीरी पंडितों की शहादत है। मातृभूमि के लिए कई कौमें खत्म हो जाती हैं। भारत राम और कृष्ण के वंशजों का देश है। महाराणा प्रताप और राणा सांगा हमारे आदर्श हैं। हमारी सेनाओं ने कितनी बार पाकिस्तान को धूल चटाई है। हर कश्मीरी पंडित आज सेनानी की भूमिका में है। वह शहादत जरूर दे रहा है लेकिन उसकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। 

जम्मू कश्मीर का इतिहास बताता है की महाराजा हरी सिंह और मेहर चंद महाजन के शासनकाल में शासन में मुस्लिमों की भागीदारी नहीं के बराबर थी। शेख अब्दुल्ला ने शासन में मुस्लिमों की भागीदारी के लिए आंदोलन करके खुद ताकत हासिल की। उनका कौमी आंदोलन ही बाद में राजनीतिक दल के रूप में नेशनल कांफ्रेंस के नाम से काम करने लगा। कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से भगाने का जो भाव पैदा हुआ वह शेख अब्दुल्ला के कौमी आंदोलन के दौरान ही पनपा और पला। शेख अब्दुल्ला के बेटे फारुख अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री रहते 1990 में हिंदुओं पर अत्याचार चरम पर पहुंच गया। 

केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 खत्म कर राज्य को विभाजित करने का जोखिम भरा फैसला लिया था और उसे लागू करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है  और ना आगे छोडी जाएगी। आतंकवादी टारगेट किलिंग के जरिए आखरी लड़ाई लड़ रहे हैं। स्थितियां भले डरावनी हो लेकिन इसी डर से आगे जीत है। पाकिस्तान और उनके  गुर्गों के ‘गजवा ए हिंद’ की मंशा कश्मीर में कभी भी पूरी नहीं होगी। जीतेगा कश्मीर, कश्मीरियत जीतेगी, कश्मीरी पंडित ही कश्मीर का चेहरा होगा। 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कश्मीर में टारगेट किलिंग की घटनाओं पर आज दिल्ली में बड़ी बैठक ले रहे हैं। निश्चित ही इसमें निर्णायक कदम उठाने की ओर सरकार बढ़ेगी। कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत कदम उठाए जाएंगे। आतंकियों को नेस्तनाबूद करने के अंतिम प्रहार के कदम उठाए जाएंगे। 

किसी कवि ने कहा है-

"अब भी समय है संभल जा पाक, छोड़ दे कश्मीर के सपने वरना तू हो जाएगा खाक" 

कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार तुरंत रोका जाना चाहिए। नरसंहार के पीछे की राजनीति पर भी तगड़ा अटैक किया जाना जरूरी है।

कश्मीर के हालात पर यह कविता बहुत मौजू है-

नरसंहार का यह स्वरूप दुनिया में है सबसे गंदा, किंतु कुछ भेड़ियों ने इसे बना लिया है धंधा।