• India
  • Thu , Jul , 25 , 2024
  • Last Update 03:58:PM
  • 29℃ Bhopal, India

देश का आर्थिक स्वास्थ्य बेहतरी की ओर ?

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Fri , 25 Jul

सार

सुधार की रफ्तार भी कम होने की संभावना है जो शुद्ध मुनाफे में योगदान देने वाला एक महत्त्वपूर्ण कारक है..!

janmat

विस्तार

देश के आर्थिक स्वास्थ्य की बेहतरी के आँकड़े सामने आए हैं।बैंकों में एन पी ए घट रहा है, शुद्ध लाभ बढ़ रहा है ।देश के 32 सूचीबद्ध निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2023 में 40.56 प्रतिशत बढ़कर 2.29 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया। दोनों तरह के बैंकों ने शुद्ध लाभ दर्ज करने में 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है और कुछ बैंकों ने तो अपना अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है।

सिद्धांत है कि जमा राशि के एक बड़े हिस्से की कीमत फिर से तय होने के साथ ही शुद्ध ब्याज मार्जिन के बीच का अंतर कम होता  है जो बैंक जमाकर्ताओं को किए जाने वाले भुगतान और ऋण पर कमाई जाने वाली रकम होती है। वर्तमान में ऋण दरों में वृद्धि से खुदरा और सूक्ष्म, लघु तथा मझोले स्तर के उद्यमों को दिए जाने वाले ऋण की गुणवत्ता में कुछ परेशानी आ सकती है। सुधार की रफ्तार भी कम होने की संभावना है जो शुद्ध मुनाफे में योगदान देने वाला एक महत्त्वपूर्ण कारक है। 

बंधन बैंक, धनलक्ष्मी बैंक , सिटी यूनियन बैंक और पंजाब ऐंड सिंध बैंक को छोड़कर, सभी सूचीबद्ध बैंकों ने अपनी जून तिमाही के शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की है। निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों में एचडीएफसी बैंक का शुद्ध लाभ करीब 30 प्रतिशत बढ़कर 11,952 करोड़ रुपये हो गया जबकि आईसीआईसीआई बैंक का शुद्ध लाभ करीब 40 प्रतिशत बढ़कर 9,648 करोड़ रुपये हो गया।वहीं ऐक्सिस बैंक का मुनाफा 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 5,797 करोड़ रुपये हो गया है। कोटक महिंद्रा बैंक का 67 प्रतिशत बढ़कर 3,452 करोड़ रुपये और इंडसइंड बैंक लिमिटेड का मुनाफा 32 प्रतिशत बढ़कर 2,124 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड का मुनाफा 61 प्रतिशत बढ़कर 765 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक का शुद्ध तिमाही लाभ 178 प्रतिशत बढ़कर 16,884 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। बैंक ऑफ बड़ौदा का मुनाफा 88 प्रतिशत बढ़कर 4,070 करोड़ रुपये और केनरा बैंक का शुद्ध लाभ 75 प्रतिशत बढ़कर 3,535 करोड़ रुपये रहा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा 108 प्रतिशत बढ़कर 3,236 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। बैंक ऑफ इंडिया का शुद्ध लाभ 176 फीसदी बढ़कर 1,551 करोड़ रुपये हो गया।पंजाब नैशनल बैंक का शुद्ध लाभ तीन गुना बढ़कर 1,255 करोड़ रुपये रहा। अप्रैल में सामूहिक तौर पर निजी बैंकों का तिमाही शुद्ध लाभ 38 प्रतिशत बढ़कर 39,200 करोड़ रुपये और पीएसबी का शुद्ध लाभ 125 प्रतिशत बढ़कर 34,418 करोड़ रुपये हो गया। कुल मिलाकर उद्योग का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 68.5 प्रतिशत बढ़कर 73,618 करोड़ रुपये रहा।

बंधन बैंक को छोड़कर, सभी बैंकों ने अपने परिचालन मुनाफे में वृद्धि दर्ज की है और यह 1.5 प्रतिशत के मामूली स्तर से लेकर 173 प्रतिशत के अधिकतम स्तर तक रहा है। यूको बैंक के अलावा, पांच अन्य पीएसबी ने अपने परिचालन मुनाफे में कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जिसमें एसबीआई ने 98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।कोटक महिंद्रा बैंक 78 प्रतिशत परिचालन लाभ वृद्धि के साथ निजी बैंकों के समूह में सबसे आगे है जबकि तीन अन्य  बैंकों ने कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। कुल मिलाकर उद्योग की परिचालन लाभ वृद्धि, शुद्ध मुनाफे में वृद्धि की तुलना में कम है, जो 68.5 प्रतिशत की तुलना में 42.7 प्रतिशत है।

साफ़ बात है परिचालन लाभ, शुद्ध लाभ के अनुरूप नहीं बढ़ा है। अगर उच्च शुद्ध लाभ में योगदान देने वाला मुख्य कारक पर विचार किया जाए तो इसका संबंध प्रावधान में लाई गई कमी से है और यह विशेष रूप से पीएसबी के लिए। यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को छोड़कर एसबीआई सहित अन्य सरकारी बैंकों ने इस तिमाही में कम ही प्रावधान दिया है। निजी बैंकों द्वारा किए गए प्रावधान में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है लेकिन पूरे उद्योग के लिए इसमें 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है क्योंकि पीएसबी का प्रावधान 20 प्रतिशत तक कम हो गया है।

वैसे इनमें से ज्यादातर बैंक फंसे कर्ज के लिए कम पैसा अलग रख सकते थे क्योंकि उनका एनपीए यानी फंसे हुए कर्ज का स्तर लगातार घट रहा है। पीएसबी ने सालाना और तिमाही आधार पर अपने सकल एनपीए में गिरावट दर्ज की है।

लेकिन,सभी निजी बैंकों के साथ ऐसी स्थिति नहीं है। सिटी यूनियन बैंक ने सालाना और तिमाही आधार पर सकल एनपीए में वृद्धि दर्ज की है जबकि बंधन बैंक, कैथलिक सीरियन बैंक लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक और फेडरल बैंक ने प्रत्येक तिमाही के आधार पर सकल एनपीए में वृद्धि दर्ज की है। पीएसबी के सभी बैंकों का शुद्ध एनपीए प्रावधान के बाद सालाना आधार पर कम हुआ है, लेकिन एसबीआई और पंजाब ऐंड सिंध बैंक के मामले को देखें तो इनमें तिमाही आधार पर मामूली वृद्धि हुई है।