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अमर जवान ज्योति की सही जगह है राष्ट्रीय युद्ध स्मारक

सार

प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी के आसीन होने के बाद ही भूतपूर्व सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन की बरसों पुरानी मांग को पूरा किया गया । देश में पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का श्रेय भी निःसंदेह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही जाता है।

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विस्तार

राष्ट्र आज अपना 73 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और इसे भी एक सुखद संयोग ही माना जाना  चाहिए कि इसी वर्ष 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं जयंती के पुनीत अवसर पर राजधानी स्थित इंडिया गेट पर  नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। निकट भविष्य में ही नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर जैट ब्लैक ग्रेनाइट से निर्मित भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी जिसके निर्माण की जिम्मेदारी बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के महानिदेशक अद्वैत गणनायक को सौंपी गई है।

गणनायक के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के साथ ही संस्थान में नेताजी की  28 फुट फुट ऊंची और 6 फुट चौड़ी भव्य प्रतिमा के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। गौरतलब है कि इंडिया गेट में जिस स्थान पर नेताजी की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने की है वहां कभी अंग्रेज शासकों ने जार्ज पंचम की प्रतिमा स्थापित की थी जिसे स्वतंत्रता प्राप्ति के कुछ वर्ष बाद हटा दिया गया था ।तब से वह स्थान खाली था परन्तु इसके पहले  केंद्र की किसी सरकार ने वहां किसी महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा स्थापित करने की पहल नहीं की।

1971 में पाकिस्तान पर भारतीय सेना की ऐतिहासिक विजय की स्मृतियों को संजोने और तत्कालीन युद्ध में  शहीद हुए भारतीय सैनिकों के सम्मान में इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने किया था लेकिन इंडिया गेट पर केवल उन ब्रिटिश भारतीय सैनिकों के नाम अंकित हैं‌ जो प्रथम विश्व युद्ध और अंग्रेज- अफगान युद्ध में शहीद हुए थे । दूसरी ओर 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया था वहां आजादी के बाद हुए सभी युद्धों में शहीद हुए 25000 से अधिक शहीद सैनिकों के नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित किए गए हैं।

अमर जवान ज्योति अब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में प्रज्जवलित ज्योति में विलीन कर दी गई है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक अब सभी सैन्य समारोहों की आयोजन स्थली बन गया है लेकिन यह तो  निःसंदेह आश्नर्यजनक है कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में प्रज्जवलित ज्योति में अमर जवान ज्योति को विलीन करने का मोदी सरकार का फैसला कांग्रेस पार्टी को नागवार गुजरा है।

कांग्रेस पार्टी सरकार के फैसले को ग़लत ठहराने के लिए इस तर्क  का सहारा ले रही है कि इंडिया गेट पर पांच दशकों से प्रज्जवलित  अमर जवान ज्योति को बुझा दिया गया है । सरकार ने कांग्रेस पार्टी के इस आरोप का खंडन करते स्पष्ट किया है कि अमर जवान ज्योति को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में प्रज्जवलित ज्योति में विलीन किया गया है। चूंकि 1971 के युद्ध में शहीद हुए  भारत सैनिकों के नाम इंडिया गेट में कहीं अंकित नहीं थे  इसीलिए उन शहीद सैनिकों के नाम भी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में  स्वर्णाक्षरों में अंकित किए गए  हैं जिसके लिए मोदी सरकार साधुवाद की हकदार है परंतु कांग्रेस पार्टी को तो मोदी सरकार के हर कदम के पीछे राजनीति दिखाई देती है इसीलिए उसे सरकार के इस फैसले में राजनीति दिखाई दे रही है।

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि" हमारे वीर जवानों के लिए जल रही अमर ज्योति को बुझाया जा रहा है। कुछ लोग देश प्रेम और बलिदान को नहीं। समझ सकते ।" सवाल यह उठता है कि देश प्रेम और बलिदान को मुद्दा बनाकर राहुल गांधी जब  परोक्ष रूप  से मोदी सरकार पर  निशाना साधते का प्रयास करते हैं तो वे यह क्यों भूल जाते हैं कि आजादी के बाद लडी गई सभी लड़ाईयों में शहीद हुए वीर जवानों के सम्मान में नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में ही संपन्न हो चुका था। ‌‌‌‌‌

प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी के आसीन होने के बाद ही भूतपूर्व सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन की बरसों पुरानी मांग को पूरा किया गया । देश में पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का श्रेय भी निःसंदेह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही जाता है। दरअसल कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से यह अपेक्षा तो कभी नहीं की जा सकती थी कि वे मोदी सरकार पर देशप्रेम और बलिदान को न समझने का आरोप लगाने में भी कोई संकोच नहीं करेंगे। इस पूरे हुए पर  यद्यपि कुछ  विपक्षी दलों का साथ कांग्रेस को मिल गया है परंतु अमर जवान ज्योति को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में प्रज्जवलित ज्योति में विलीन करने के मोदी सरकार के फैसले का सेना के अनेक सेवानिवृत्त अधिकारियों ने स्वागत किया है।

यहां यह भी विशेष गौर करने लायक बात है कि सेना के अनेक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों ने भी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में प्रज्जवलित ज्योति में अमर जवान ज्योति को विलीन करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ कहते हैं कि जब इंडिया गेट में अमर जवान ज्योति जलाई गई थी तब हमारे पास कोई युद्ध स्मारक नहीं था। नवनिर्मित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक आजादी के बाद शहीद हुए जवानों को समर्पित है।1971 के भारत -पाकिस्तान युद्ध में अपने शौर्य का प्रदर्शन कर चुके सेवानिवृत्त  लेफ्टिनेंट  जनरल जेबीएस यादव भी सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहते हैं कि अंग्रेजों द्वारा निर्मित इंडिया गेट पर प्रज्जवलित की गई अमर जवान ज्योति अस्थाई व्यवस्था थी ।अब हमारे पास अपना वार मेमोरियल है । अमर जवान ज्योति  एक स्थान पर  ही प्रज्जवलित होनी चाहिए ।