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भ्रष्टाचार के लालों को नैतिकता का लाल संकेत

सार

राजस्थान में लाल डायरी, राजनीति में भ्रष्टाचार की डरावनी डायरी बन गई है. राजस्थान में तो यह डायरी चुनाव का मुद्दा ही बन गई है. इसी साल होने वाले राज्यों के चुनाव में भी भ्रष्टाचार पर निर्णायक जनादेश की जमीन तैयार होती दिख रही है..!

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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के सीकर में लाल डायरी का मुद्दा उठाकर राजनीतिक भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला किया है. भारत सफेदी की चमक में भ्रष्टाचार के दाग देर तक समझ नहीं पा रहा था.  उसके सामने जो भी चेहरे दिखाई पड़ते थे बिना बारीकी से नजर गड़ाए अंतर करना मुश्किल होता था. भारत के सामने पहला अवसर ऐसा आया है जब कोई ऐसा चेहरा सामने है जिस पर भ्रष्टाचार के दाग या छींटे दूर-दूर तक दिखाई नहीं पड़ते हैं.

पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बातें वैसे ही लगती थी जैसे एक सभा में कई शायर शायरी कहते हैं और दर्शक सभी पर वाह-वाह करते हैं. अब शीर्ष पर नैतिकता का बल भारत के सामान्य नैतिक बल को भी ताकत दे रहा है और भ्रष्टाचार में शामिल चेहरे अस्तित्व के लिए छटपटाते हुए देखे जा सकते हैं.

राजनीति में भ्रष्टाचार कोई नया नहीं है. पहले भी जैन हवाला डायरी इस देश में राजनीतिक तूफान ला चुकी है. कई बड़े-बड़े नेताओं को इस डायरी में नाम आने के कारण अपने पदों से हटना पड़ा था. लोकतांत्रिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के काले अध्याय में यह अध्याय भी है कि हमारे जनप्रतिनिधि पैसा लेकर संसद में अपने मत का उपयोग करते थे. यह काला इतिहास भी कांग्रेस के प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की सरकार को बचाने के लिए रचा गया था.

राजस्थान की लाल डायरी कोई सामान्य आदमी की तरफ से सामने नहीं आई है. अशोक गहलोत सरकार के मंत्री राजेंद्र गुढ़ा बागी हो गए हैं. उन्होंने विधानसभा में लाल डायरी लहराई तो उन पर कांग्रेस के मंत्री और विधायकों ने चढ़ाई कर दी. डायरी फट गई. गुढ़ा को मंत्री पद से हटा दिया गया. विधानसभा से निलंबित कर दिया गया. मीडिया को बताते हुए उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी एक व्यक्ति के यहां आयकर के छापे पड़े थे तब मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि अगर उस करीबी व्यक्ति की डायरी नहीं हटाई गई तो उनकी सरकार के सामने संकट खड़ा हो जाएगा.

राजेंद्र गुढ़ा यह दावा करते हैं कि वे उस करीबी के यहाँ से डायरी दरवाजा तोड़कर निकाल कर लाए थे. उसी डायरी में अशोक गहलोत की सरकार को बचाने और दिल्ली में समय-समय पर दिए गया योगदान तिथि वार राशिवार दर्ज है. राजेंद्र गुढ़ा कह रहे हैं कि उनका नारको टेस्ट करा लिया जाए, सच सामने आ जाएगा. 

कांग्रेस के अंदर लाल डायरी को लेकर मचे घमासान में प्रधानमंत्री भी कूद पड़े. सीकर की सभा में प्रधानमंत्री ने लाल डायरी का मामला उठाते हुए कहा कि अगर इसका सच सामने आ गया तो कांग्रेस के बड़े-बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे. यह लाल डायरी राजस्थान में भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में स्थापित हो गई है. डायरी तो बाद में आई है जनता के सामने तो रोज़ रोज़ भ्रष्टाचार आता रहा है. राजनीति और भ्रष्टाचार शायद एक दूसरे के पूरक हैं. अगर भ्रष्टाचार का मौका राजनीति में नहीं हो तो बिरले ही लोग होंगे जो सेवा के लिए राजनीति क्षेत्र में इतनी विकट मेहनत करने को तैयार होंगे. सोने की चिड़िया भारत को पहले भी लूटा गया है. लोकतंत्र आने के बाद राजनीतिक भ्रष्टाचार ने इस लूट का स्थान ले लिया है.

भारत के लिए यह खुशी की बात है कि देश के प्रधानमंत्री ने आज भ्रष्टाचार क्विट इंडिया का आह्वान किया है. गुजरात के महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को देश छोड़ने के लिए क्विट इंडिया का नारा दिया था. प्रधानमंत्री मोदी ने उसी नारे को आज भ्रष्टाचार क्विट इंडिया के रूप में देशवासियों के सामने रखा है. इसका मतलब है कि जितना नुकसान अंग्रेजों ने इस देश को किया, उससे कम नुकसान भ्रष्टाचार इस देश का नहीं कर रहा है. परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति को भी क्विट इंडिया का नारा देते हुए प्रधानमंत्री कहते हैं कि इस देश के विकास के लिए यह बहुत जरूरी है. भ्रष्टाचार की जांच कर रही एजेंसियों के खिलाफ विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा उठाई जा रही आवाज और उनके बीच की एकता के पीछे भी भ्रष्टाचार से सुरक्षा का धागा ही दिखाई पड़ता है.

राजनीति में भ्रष्टाचार पर राजनीतिक दल चुनाव के समय एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं लेकिन जब भी सरकार में आ जाते हैं तो फिर भ्रष्टाचार पर एक्शन को न केवल भुला दिया जाता है बल्कि उसका रचनात्मक उपयोग शुरू हो जाता है. किसी भी व्यक्ति में किसी लड़ाई का नैतिक बल तभी आएगा जब वह स्वयं उस बुराई से दूर हो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा जनविश्वास हासिल किया है कि भ्रष्टाचार के छींटे उनके करीब नहीं पहुंच सके. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर उनकी आवाज में इसीलिए वह नैतिक बल दिखाई पड़ता है जो लड़ाई में जीतने के लिए जरूरी है.

राजनीति के वह चेहरे अब सियासी सिंहासन बत्तीसी से बाहर ही रहेंगे जिनके चेहरों पर भ्रष्टाचार के दाग जन धारणा में चिपके हुए हैं. भारत की राजनीति संक्रमण काल से गुजर रही है. राजनीति का पुराना दौर अब गुजरे जमाने की बात हो गई है. अब ईमानदार राजनीति ही देश के नेतृत्व का अवसर पाने में सफल हो सकेगी. ऐसा विश्वास मजबूत होता जा रहा है. चाहे राष्ट्रीय स्तर पर हो और चाहे राज्यों के स्तर पर हो, जिन राजनेताओं की छवि भ्रष्टाचार में लिप्त होने की बनी हुई है उन्हें अब अपना राजनीतिक भविष्य उज्जवल मानने की गलती नहीं करना चाहिए. राजनीति से जो कमाना था वह कमा लिया अब वह छिप नहीं सकेगा. नए भारत की आकांक्षाओं में ऐसे चेहरे अब समायोजित नहीं हो सकेंगे. लाल डायरी का लाल संकेत राजनीतिक भ्रष्टाचार के खत्म होने का इशारा है.