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कुछ लोगों को भारत की प्रगति रास नहीं आ रही

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Mon , 19 Jun

सार

हकीकत में यह सिर्फ दो समुदायों के बीच की लड़ाई नहीं है, इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ताकतें हैं, जो भारत और पाकिस्तान के विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बरकरार रखने की कोशिशों में जुटी हुई हैं..!

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विस्तार

प्रतिदिन विचार-राकेश  दुबे

26/09/2022

जब सारा ब्रिटेन महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार की तैयारी में लगा था, तब वहां के कुछ शहरों में तनाव सुलग रहा था|यह तनाव बनाम हिंदू-मुसलमान झगड़ा था |हकीकत में यह  सिर्फ दो समुदायों के बीच की लड़ाई नहीं है, इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ताकतें हैं, जो भारत और पाकिस्तान के विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बरकरार रखने की कोशिशों में जुटी हुई हैं| भारत और पाकिस्तान दोनों को ब्रिटेन से आजाद हुए ७५ साल हो चुके हैं. इन सालों में इन दोनों देशों की कई पीढ़ियां भी  ऐसे ही इस दौरान ब्रिटेन में गुजर चुकी हैं|

इस बार जब इंग्लैंड के पूर्वी मिडलैंड्स में स्थित लेस्टर शहर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच झड़प हुई, इसके पीछे तात्कालिक कारण वही भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच और भारत की जीत का जश्न था| झड़प के खिलाफ प्रदर्शन हुए और फिर हिंसा भड़क गयी|

एक-दूसरे पर हुए हमले को रोकने में करीब डेढ़ दर्जन पुलिसकर्मी घायल हुए| अब तक कोई ५० लोगों को हिरासत में लिया गया है| २१ साल के युवक युसूफ को चाकू रखने के लिए एक साल की सजा भी हो गयी है, उसने स्वीकार किया कि वह सोशल मीडिया से प्रभावित होकर चाकू लेकर प्रदर्शन में शामिल हुआ था| लेस्टर पुलिस ने सोशल मीडिया से प्रभावित एक और प्रदर्शनकारी को जेल भेजा है|

सब जानते हैं लेस्टर ब्रिटेन के उन शहरों में है, जहां सबसे ज्यादा गैर ब्रिटिश आबादी रहती है| लगभग ३७ प्रतिशत लोग दक्षिण एशियाई मूल के हैं और इनमें से ज्यादातर भारतीय मूल के हैं| पचास साल से ज्यादा वक्त से यहां सभी समुदाय के लोग सौहार्द से रहते आये हैं| इस घटना के बाद यहां के भारतीय और पाकिस्तानी मूल के व्यवसायी चिंतित हैं|

भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा, ‘हम लेस्टर में भारतीय समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा और हिंदू धार्मिक परिसरों एवं प्रतीकों की तोड़फोड़ की कड़ी निंदा करते हैं,’ लेकिन बात यहीं नहीं रुकी|महारानी की अंतिम यात्रा के दिन बर्मिंघम से सटे एक छोटे से शहर स्मिथविक में एक मंदिर के बाहर मुस्लिम समुदाय ने प्रदर्शन की योजना बनायी और उसे सोशल मीडिया पर प्रचारित कर दिया| शहर के हिंदुओं ने पुलिस को सूचना दी और प्रदर्शन का विरोध किया, लेकिन सैकड़ों की तादाद में मुस्लिम युवक मंदिर के बाहर जमा हुए, मंदिर की दीवारों पर चढ़े, हाथापाई की, नारे लगाये. इन हरकतों के वीडियो वायरल हो गये|

सवाल यह है कि जिन ब्रिटिश शहरों में अचानक दो समुदायों के बीच झड़प हुई, वह महज एक छोटी प्रतिक्रिया थी या फिर कुछ अंदर ही अंदर ही पक रहा है? लेस्टर में प्रवासियों में सबसे ज्यादा भारतीय मूल के हिंदुओं की आबादी है और स्मिथविक, जहां घटना घटी है, से सटे बर्मिंघम में सबसे ज्यादा मुसलमान प्रवासियों की तादाद है| ब्रिटिश अधिकारियों ने अपने बयानों में साफ कहा है कि दोनों शहरों में दूसरे शहरों से आये लोगों ने माहौल को भड़काने का काम किया है|

यह टिप्पणी भी विचारणीय है “शोक में डूबे ब्रिटेन में जब सब कुछ स्थिर हो गया था| लोग एक जगह से दूसरी जगह सफर करने से भी परहेज कर रहे थे| वैसे में ऐसे तत्वों को मौका मिला और उन्होंने अपने अपने समुदाय के लोगों को भड़काने का काम किया| निश्चित तौर पर इस तनाव की जड़ में एशिया के दो मुल्कों से आये वे प्रवासी हैं, जो पिछले कुछ समय से ब्रिटेन में अपने-अपने देशों से तनाव और आक्रामकता लेकर आ रहे हैं|” यह बताता है भारत और पाकिस्तान में ७५ वर्ष बाद भी भीतरखाने कुछ सुलग रहा है |

पूरी दुनिया में ऐसी घटनाओं के लिए सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्म फेक न्यूज फैलाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं| पूर्वी लेस्टर सीट से सांसद क्लॉडिया वेबी, चीफ कॉन्सटेबल रॉब निक्सन समेत लेस्टर के मेयर सर पीटर सोल्सबी ने भी साफ कहा है कि शहर में तनाव भड़काने में जिस एक चीज की भूमिका सबसे खतरनाक रही है, वह है सोशल मीडिया| ट्विटर पर घूम रहे वीडियो इस हिंसक माहौल के लिए गंभीर रूप से जिम्मेदार हैं|

एक वीडियो में एक व्यक्ति को मंदिर पर चढ़ कर झंडा नीचे गिराते हुए देखा जा सकता है| सोचिये, अगर यह प्रचारित नहीं होता, तो लोगों में शायद इतनी प्रतिक्रिया नहीं होती| फिर जब इन घटनाओं की और तह में जाते हैं और यहां रह रहे भारतीय मूल के लोगों से बात करते हैं, तो कुछ चीजें साफ दिखती हैं| एक बात पर सभी जोर देते हैं, चाहे वे लंदन सदक के मेयर सुनील चोपड़ा हों या फिर बकिंघमशर के काउंसिलर शरद झा, कि पिछले एक दशक में भारत की हो रही प्रगति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों के लिए चुनौती बन रही है|

इसके साथ ही पिछले कुछ समय से अपने आंतरिक मामलों में भारत ने दूसरे देशों को हस्तक्षेप करने से साफ मना किया है, इससे भी दुनिया का एक धड़ा भारत से चिंतित दिखने लगा है| इसी का परिणाम है कि ब्रिटेन जैसे देश में, जहां भारतीय सद्भाव और सुरक्षा से रहते आये हैं, वहां भी उनके खिलाफ मोर्चे खोले जा रहे हैं|

यहाँ यह  साफ है कि ब्रिटेन में हो रहा हिंदू-मुसलमान का झगड़ा दरअसल सिर्फ दो समुदायों के बीच की लड़ाई नहीं है, इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ताकतें हैं, जो भारत और पाकिस्तान के विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बरकरार रखने की कोशिशों में जुटी हुई हैं| इन घटनाओं को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर की साजिश की कसौटी पर कसने और उसका आकलन करने की जरूरत है| यह महज दो समुदायों की झड़प तक का मामला नहीं है|