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सितारे,गणना और प्रधानमंत्री 

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Mon , 18 Jun

सार

नरेंद्र मोदी के स्थान पर किसी अन्य की ताजपोशी की बात भी उन्हीं सितारों की गणना के आधार पर की जा रही थी, जो ज्योतिष के मूल स्तंभ हैं, सही मायने में ज्योतिष पूरी दुनिया में हैं..!!

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विस्तार

और नरेंद्र मोदी तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बन गए, उनकी ताजपोशी को लेकर ज्योतिषी दो ख़ेमों में बँटे थे। आधार ज्योतिष, उसकी गणना और उसका विश्लेषण था। नरेंद्र मोदी के स्थान पर किसी अन्य की ताजपोशी की बात भी उन्हीं सितारों की गणना के आधार पर की जा रही थी, जो ज्योतिष के मूल स्तंभ हैं। सही मायने में ज्योतिष पूरी दुनिया में हैं। दुनियाभर में अपने-अपने विश्वास, अंधविश्वास, टोने-टोटके हैं। प्रसिद्ध लोग भी मानते हैं कि इससे लाभ होता है।एक प्रश्न - विदेशों में भी अब यह प्रचलन बढ़ रहा है, क्या वहां भी जीवन में टहल रही परेशानियों के कारण, सुरक्षा घेरा बनाने के लिए, भविष्य में होने वाली अप्रिय घटनाओं से बचने के लिए ऐसा किया जा रहा है? पश्चिमी देशों की तरह वैवाहिक संबंधों को हमारे यहां भी चुनौती माना जाने लगा है? समाज में भौतिक विकास के साथ, विदेशी दृष्टिकोण उग रहे हैं, उन्हीं से बचने के लिए ज्योतिष की सहायता ली जा रही है?

वैसे राजनीतिक और  वैवाहिक रिश्ते, ज्योतिषीय सलाह और उपायों से सचमुच लाभान्वित होते रहे हैं। विवाह के संदर्भ में तो सच  यह है कि वर्तमान जीवनशैली में, घर चलाने के लिए पति-पत्नी दोनों को काम करना पड़ रहा है। जिससे आपसी नोक-झोंक, परेशानी, तनाव बढ़ रहे हैं। दोनों चुपचाप अपने-अपने शांत रास्ते अख्तियार कर रहे हैं, क्योंकि दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है। अकेले रहने की दुश्वारियां अधिक चुनौतीपूर्ण हैं, विशेषकर महिलाओं के लिए। व्यावसायिक स्तर पर, विवाह संस्था खतरे में तो है, हालांकि अभिभावक यही चाहते हैं कि किसी तरह उनके बच्चों की शादी चलती रहे।

यदि संभावित परिस्थितियां और घटनाएं, ज्योतिषी पहले बता देगा, तो क्या विवाह का या राजनीति का किला फतह करने जा रहे लोगों का आत्मविश्वास कम नहीं होगा? उन्हें जरा-जरा सी बात के लिए खास दिन, मुहूर्त पर निर्भर रहना होगा। ज्योतिषी के निरंतर संपर्क में रहना होगा। समझदार, व्यावसायिक ज्योतिषी अपनी सेवाओं के एवज में भुगतान भी लेगा। जिंदगी की स्वाभाविक परेशानियों और आकस्मिक दुखों को झेलने, निपटने की नैसर्गिक शक्ति कमजोर हो जायेगी। संघर्ष के चंगुल में पहले से फंसा व्यक्ति, भविष्य के बारे में चिंतित होना शुरू हो जायेगा, तब सभी क्या चाहेंगे? यह तो सकारात्मक मानवीय सोच को कमजोर कर, बाजार के हवाले करने की कोशिश है, जिससे बचना लाजमी है।

समाज में इन दिनों एक नयी ज्योतिषीय सलाह दी जा रही है। कुंडली को दिखाकर, सलाह मानकर, समझ और जानकर व्यापार और प्रेम करना शुरू करें। यदि विवाह तो सितारों के अनुसार पहले से सुनिश्चित होता है। यह बात दीगर है कि सामंजस्य और विच्छेद के माहिर सलाहकार मानते हैं कि शादी एक व्यवस्था है।