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समाजशास्त्र के नियम तोड़ता यह विवाह

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Fri , 20 Jul

सार

भारत के समाजशास्त्र ने भारतीय पद्धतियों से विवाह संस्कार के प्रकारों को मान्यता दी है..!

janmat

विस्तार

भारत के समाजशास्त्र ने भारतीय पद्धतियों से विवाह संस्कार के प्रकारों को मान्यता दी है| अब इससे हटकर विवाह का एक नया प्रकार सामने आ रहा है| सीधे से शब्दों में इसे ‘सेल्फ मैरिज’ कहा जा सकता है। इसका यह मतलब यही है कि खुद से शादी कर लेना। यह बड़ोदरा की क्षमा बिंदू करने वाली हैं।

खुद के लिए जीने के बहुत से मतलब हैं! अपनी रुचियों का ध्यान रखना, अपने लिए समय निकालना, घर और पति की जरूरतों की पूर्ति करने के साथ उनकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखना। लेकिन, इसके साथ में अपनी पसंद को भी दबने नहीं देना। कुछ असामान्य शादियां पुरुष से पुरुष और महिला से महिला की भी सुनी गई! लेकिन, क्षमा बिंदू जो करने वाली हैं, वो अपने आप में अनोखी घटना है।

उन्होंने अपने आप से ही शादी की घोषणा करके एक नई बहस को जन्म दिया है। यहाँ प्रश्न यह उठता है कि ‘सेल्फ मैरिज’ की जरूरत ही क्यों! वे अपने आपसे प्यार करके बिना शादी का प्रपंच करके भी तो रह सकती थीं! ऐसा नहीं लगता कि ये महज प्रोपेगेंडा है! आश्चर्य, इसे लेकर कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया भी नहीं आई है|

समाजशास्त्र की भाषा में इस तरह की शादी को ‘सोलोगैमी’ नाम दिया जाता है। जिन चंद महिलाओं ने सोलोगैमी’ को अपनाया, उनका कहना है, कि यह खुद का मूल्य समझने और खुद से प्यार करने की तरफ उठाया गया एक बड़ा कदम है। दुनिया के कई देशों की महिलाओं में यह प्रचलित भी  है।

महिलाएं इसे अपनाने की तरफ ज्यादा बढ़ रही है। 24 साल की क्षमा बिंदू खुद से शादी करके एक नई परंपरा को जन्म देने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए कि क्षमा का कहना है कि वे किसी लड़के से शादी करना नहीं चाहती! परन्तु उन्हें दुल्हन तो बनना था। क्षमा के लिए यह सेल्फ एक्सेप्टेंस यानी खुद को अपनाने का एक तरीका है।

प्रशन यह भी उठता है कि महिलाएं आखिर ‘सोलोगैमी’ की तरफ क्यों आकर्षित हो रही हैं? वैसे तो इसके कई कारण हो सकते हैं| इसे एक तरह से पुरुषों के प्रति फ्रस्ट्रेशन भी तो माना जा सकता है! कई महिलाएं ‘सोलोगैमी’ इसलिए अपना रही हैं, क्योंकि वे अकेले में खुद के साथ जितनी खुशी महसूस करती हैं, उतनी वे अपने लाइफ पार्टनर के साथ कभी नहीं कर पाएंगी| दरअसल, ये एक तरह की सोच है, पर ये हर किसी के लिए संभव नहीं! ‘सोलोगैमी’ का अर्थ है, कि वह किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि जीवन से और खुद से ज्यादा जुड़ाव महसूस करती हैं।

बड़ोदरा की क्षमा बिंदू खुद से शादी करके हनीमून पर भी जाएगी! देश में क्षमा बिंदू पहली लड़की है, जो ऐसा कुछ कर रही है। यह देश में होने वाली पहली सोलोगैमी मैरिज है। दुल्हन क्षमा का कहना है, कि मैं कभी भी शादी करना नहीं चाहती थी। लेकिन, दुल्हन बनने का सपना मैंने हमेशा से देखा है। ऐसे में मैंने खुद से ही शादी करने का फैसला किया। जैसे हर कोई किसी न किसी से प्यार करता है, वैसे ही मैं खुद से प्यार करती हूं।

इसलिए मैंने इस शादी का फैसला किया। क्षमा ने शादी के बाद हनीमून की भी प्लानिंग कर रखी है। वो हनीमून के लिए गोवा जाएंगी। उनके इस फैसले से परिवार को कोई आपत्ति नहीं है। उनके माता-पिता बहुत खुले विचारों वाले हैं और उन्होंने क्षमा को यह करने की इजाजत भी दी।

याद कीजिये,फेमस प्रोटागोनिस्ट कैरी ब्रैडशॉ ने खुद से शादी करने का ऐलान किया था। ये कुछ अनोखा था, इसलिए बाद में कई लोगों ने इस शादी को स्वीकार किया। फिर जब कोरोना काल में लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हुए, तब फुरसत की सोच में इस मैरिज को तवज्जो मिली। कई मशहूर सितारे भी अपने पार्टनर से शादी करने से पहले खुद से शादी कर चुके हैं। लेकिन, कानूनी तौर पर देखा जाए, तो इस तरह की शादी को कोई मान्यता नहीं दी जाती।

खासकर भारतीय परम्परा में शादी एक पवित्र बंधन है जिसे दो आत्माओं का मिलन कहा जाता है। लेकिन सोलोगैमी मैरिज विवाह पद्धति को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। इस शादी का भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन खुद से प्यार जताने के लिए शादी जैसी परंपरा के साथ खिलवाड़ करना सही नहीं कहा जा सकता।