झूठे राज्य- अंधा केंद्र: मौत का जीरो डाटा … सियासत में किसको घाटा: अतुल विनोद 

झूठे राज्य – अंधा केंद्र: मौत का जीरो डाटा … सियासत में किसको घाटा: अतुल विनोद 
Atul Vinod Pathak atulyamयह कैसी सरकारें हैं जो अपने ही नागरिकों की मौत के सही कारण को छुपाती हैं ? यह कैसी सियासत है जो सच से पर्दा उठने से इतनी घबराती है? आखिर क्यों किसी राज्य सरकार की हिम्मत नहीं हुई यह बताने की कि उसके राज्य में कितने लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई|

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और यह कैसी केंद्र सरकार है जिसने आंख मूंदकर राज्यों की उस रिपोर्ट को मान लिया जिसमें मौत के कारण में ऑक्सीजन की कमी का जिक्र तक नहीं था| यह वही केंद्र सरकार है जो ऑक्सीजन की किल्लत के बाद उपजे असंतोष को दूर करने के लिए वाय एयर ऑक्सीजन के टैंकर पहुंचा रही थी| रेलों में भर-भर कर ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही थी|


यदि कमी नहीं थी, किल्लत नहीं थी तो फिर इतने बड़े स्तर पर ऑक्सीजन के इंतजाम के लिए ढोंग करने की जरूरत क्या थी ? किल्लत थी और लोग मर रहे थे इसी वजह से तो आप की सांसें फूल रही थी| दिल्ली की सरकार हो या मध्य प्रदेश की| सियासतदान क्यों घबरा रहे थे? क्यों हलचल मची हुई थी? इसलिए कि अस्पतालों की दहलीज पर ऑक्सीजन की कमी से लोग मर रहे थे| हर तरफ तबाही का मंजर था| ऑक्सीजन की कमी से मरते लोगों के परिजनों की आंखों में सिर्फ आंसुओं का समंदर था|

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केंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से दूसरी लहर में मौत होने का केस रिपोर्ट नहीं किया| कैसे उसने यह रिपोर्ट मान ली| और क्यों उसे राज्यसभा में उजागर किया| पहले क्लेरिफिकेशन मांगना था! वास्तव में ऑक्सीजन की कमी के बाद की यह स्थिति राज्य और केंद्र सरकारों की संवेदनशीलता और सत्य की कमी की पराकाष्ठा को दर्शाता है|

ऑक्सीजन
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी केंद्र के दावों पर सवाल खड़े करते हैं| लेकिन क्या वह अपनी राज्य सरकारों से पूछते हैं कि उन्होंने ऑक्सीजन की कमी से मौत का डाटा केंद्र को क्यों नहीं दिया? केंद्र सरकार ने यह दावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट के आधार पर किया|

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ सत्येंद्र जैन कहते हैं कि दिल्ली में दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी की वजह से अस्पतालों में हाहाकार मचा| केंद्र को यह दिखाई नहीं देता| क्या सत्येंद्र जैन बताएंगे कि उन्होंने केंद्र सरकार को क्या रिपोर्ट भेजी है? क्या उन्होंने बताया है कि दिल्ली में कितने लोग ऑक्सीजन की कमी से मारे गए|

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सारे प्रदेश ऑक्सीजन की कमी का ठीकरा केंद्र पर फोड़ रहे थे| क्या आज उनके दावे झूठे हो गए क्यों उन्होंने कोई भी मौत ऑक्सीजन की कमी से रिपोर्ट नहीं की? राज्य झूठे हो गए और केंद्र अंधा हो गया| दिल्ली, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, छत्तीसगढ़ यह सभी राज्य जहां ऑक्सीजन की किल्लत से लोगों की मौत हो रही थी अब कह रहे हैं कि ऑक्सीजन का संकट था लेकिन किसी की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई| गजब हालात हैं यू मौत का सौदा हो गया| आपने तय कर दिया बस निपटारा हो गया|

बिहार में ऑक्सीजन की मांग 14 गुना बढ़ गई लेकिन वहां के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय कहते हैं कि ऑक्सीजन की कमी से बिहार में एक भी मौत नहीं हुई|संबित पात्रा, बीजेपी के प्रवक्ता विपक्ष पर पलटवार करते हैं| स्वास्थ्य राज्यों का विषय है केंद्र डाटा संग्रहित करता है| तो फिर आप ऑक्सीजन की सप्लाई क्यों कर रहे थे ? क्यों राज्यों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजे जा रहे थे ? 

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आप की दुनिया भर में किरकिरी हो रही थी इसीलिए आप युद्ध स्तर पर राज्यों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में लगे हुए थे| लेकिन आपको यह पता नहीं था कि यह किल्लत जानलेवा नहीं है ? आपको यह समझ नहीं आया कि हालात इतने बेकाबू नहीं हुए ऑक्सीजन की कमी से लोगों की जान जा रही है? हमने देखा कि किस तरह से दूसरे दौर में अस्पतालों में बेड फुल हो गए थे| दिल्ली मुंबई लखनऊ इंदौर भोपाल हर शहर में ऑक्सीजन को लेकर मारामारी थी|


जहां ऑक्सीजन मिल रही थी वहां लाइने लगी थी घंटो घंटो लोग परेशान हो रहे थे| अखबारों में खबरें आ रही थी कि ऑक्सीजन की कमी से इतने मरीजों की मौत हो गई| अस्पतालों में एक साथ कई कई मरीजों की जानें गई| लेकिन झूठ की इंतहा देखिए कि देश के किसी भी राज्य ने ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत होने को रिपोर्ट नहीं किया ? 

संजय राऊत के पास शब्द नहीं है? क्या संजय रावत खुलासा करेंगे कि महाराष्ट्र में कितने लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई? देश के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडविया कहते हैं आंकड़े छिपाने का कोई कारण नहीं है तो फिर क्यों आंकड़े छुपाये जा रहे हैं? क्या मंडविया जी ने राज्यों को फिर से रिपोर्ट भेजने को कहा? क्या केंद्र ने आपत्ति की कि राज्य कैसे यह दावा कर रहे हैं कि उनके यहां बिना ऑक्सीजन के कोई मौत नहीं हुई? 

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इस मामले में सियासत उबलेगी यह स्वभाविक है| सियासत के उबलने से जनता नहीं उबलती| राजनीति में बैठे लोग कब सच का सामना करेंगे? यह तो पूरी दुनिया जानती है कि पक्ष और विपक्ष का खेल क्या होता है? आप जब सरकार में होते हैं तो वही करते हैं जो आपको फायदा पहुंचाए? सत्ता और दल बदलते ही आपकी जुबान कैसे बदल जाती है यह देश दशकों से देख रहा है| अब आपके एक दूसरे पर आरोप लगाने से जनता को फर्क नहीं पड़ता|
 

आप केंद्र सरकार में हैं और पलटवार करते हैं करिए, चाहें तार्किक प्रवक्ताओं को मैदान में उतारिए| आप विपक्ष में हैं इसलिए सरकार को कोसिए, विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश कीजिए, लेकिन सच्चाई छुपाने में सभी दलों की सरकारें अव्वल है| अब आपके एक - दूसरे को कोसने और एक दूसरे को एक्सपोज करने के तौर-तरीकों से जनता को असर नहीं होता|आपकी बातें उन्हें उद्वेलित नहीं करती लेकिन आप दोनों की मिली जुली कुश्ती जरूर  एक ईमानदार आम नागरिक को झकझोरती है|
 

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