खरगोन में 250 तोतों की मौत से हंगामा, फूड पॉइज़निंग का शक; चावल खिलाने पर रोक


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स्टोरी हाइलाइट्स

Indore News: प्रारंभिक जांच के बाद उपसंचालक सोलंकी ने स्पष्ट किया कि यह मामला बर्ड फ्लू या किसी संक्रामक बीमारी का नहीं लगता। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की लापरवाही पर भी नाराजगी जताई गई है..!!

Indore News: खरगोन जिले के बड़वाह में एक्वाडक्ट पुल के पास तीन दिनों में करीब 250 तोतों की मौत से हड़कंप मच गया है। मामला गंभीर होने पर भोपाल तक पहुंचा, जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर पशु चिकित्सा एवं डेयरी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। 

गुरुवार 2 जनवरी की सुबह विभाग के उपसंचालक जीएस सोलंकी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थानीय पशु चिकित्सकों के साथ समीक्षा बैठक की। प्रारंभिक जांच के बाद उपसंचालक सोलंकी ने स्पष्ट किया कि यह मामला बर्ड फ्लू या किसी संक्रामक बीमारी का नहीं लगता। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की लापरवाही पर भी नाराजगी जताई गई है।

उनके अनुसार प्रथम दृष्टया तोतों की मौत का कारण फूड पॉइजनिंग (विषाक्त भोजन) प्रतीत हो रहा है। पशु चिकित्सक मनीषा चौहान ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान मृत तोतों में फूड पॉइजनिंग के स्पष्ट लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि कई बार लोग पक्षियों को ऐसे खाद्य पदार्थ डाल देते हैं, जो उनके पाचन तंत्र के लिए नुकसानदायक होते हैं। 

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इसके अलावा, खेतों में कीटनाशक छिड़काव के बाद वहां से चुगा गया दाना भी पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष के लिए भोपाल और जबलपुर की प्रयोगशालाओं से विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर क्षेत्र के सभी पोल्ट्री फार्मों की जांच की गई, जहां बर्ड फ्लू का कोई लक्षण नहीं मिला। 

निरीक्षण के दौरान उपसंचालक सोलंकी ने वन विभाग के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पुल क्षेत्र में लोगों को दाना डालने से रोकने के लिए वनकर्मियों की ड्यूटी पहले ही लगाई जानी चाहिए थी। एसडीओ से हुई चर्चा का जवाब भी संतोषजनक नहीं रहा। मौके पर बगीचे के बांस और अन्य पेड़ों पर अब भी मृत तोतों के शव लटके मिले, हालांकि जमीन पर कोई नया शव नहीं पाया गया।

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हालांकि, आखिरी नतीजे के लिए भोपाल और जबलपुर की लैब से विसरा रिपोर्ट का इंतजार है। एहतियात के तौर पर, इलाके के सभी पोल्ट्री फार्म की जांच की गई, लेकिन बर्ड फ्लू के कोई लक्षण नहीं मिले।

इंस्पेक्शन के दौरान, डिप्टी डायरेक्टर सोलंकी ने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोगों को पक्षियों को खाना खिलाने से रोकने के लिए ब्रिज इलाके में पहले से फॉरेस्ट कर्मचारियों को तैनात करना चाहिए था। सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) से बातचीत भी संतोषजनक नहीं रही। मौके पर, बगीचे में बांस और दूसरे पेड़ों पर मरे हुए तोते अभी भी लटके हुए देखे गए, हालांकि ज़मीन पर कोई ताज़ा शव नहीं मिला।

डिप्टी डायरेक्टर ने डॉ. जितेंद्र सैत और उनकी टीम को लगातार नज़र रखने के निर्देश दिए हैं। वेटनरी डॉक्टर डॉ. सुरेश बघेल ने बताया कि लोग अभी भी पुल की रेलिंग पर चावल और दूसरी चीज़ें डाल रहे थे, जिन्हें हटा दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कुछ दिनों तक अनाज ना डालें सिर्फ़ साफ़ ज्वार और बाजरा ही डालें।