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रजिया सुल्तान (Razia Sultan)

रजिया सुल्तान

रजिया बेगम दिल्ली के सुल्तान अल्तमश की बेटी थी। उसके कई भाई थे. लेकिन सारे विलासी, अयोग्य थे। उनमें से एक भी ऐसा न था जो दिल्ली की सल्तनत सँभाल सके। सुल्तान अल्तमश ने जिन्दगी के आखिरी दिनों में अपनी वसीयत में रजिया बेगम को दिल्ली की सुलताना बनाने की बात लिख दी थी। साथ ही तुर्क सरदारों से यह बात मनवा भी ली थी।
लेकिन अल्तमश की मृत्युके बाद तुर्क सरदारों की संस्था चालीस' ने अपनी मनमानी और षड्यंत्र करके रजिया के भाई रुकनुद्दीन को दिल्ली का सुलतान बनवा दिया। चालीस संस्था रजिया के औरत होने के नाते उसके मातहत रहने की विरोधी थी, इसलिए उसने अल्तमश की वसीयत की परवाह न की।


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रुकनुद्दीन कुल 6 महीने 7 दिन दिल्ली का सुलतान रहा। उसकी विलासिता और अयोग्यता से भरी जिन्दगी उसे ले डूबी। तब लाल जोडा पहनकर रजिया ने जनता से सहयोग की प्रार्थना की और जनता ने उसे दिल्ली की सुलताना बनाए जाने की स्वीकृति दे दी। इस तरह रजिया बेगम सुल्ताना बनीं।
इसके बावजूद तुर्की सरदार उसके विरुद्ध थे। राजपूत सरदार भी रजिया को नहीं चाहते थे। रजिया को राजपूतों पर नियन्त्रण के लिए लड़ना पड़ा और उसे विजय हासिल हुई। लखनौती से देवल तक सारे अमीरों और उमरावों ने भी रजिया सुलताना की सत्ता को स्वीकार किया।
इसके बाद रजिया सुल्तान ने राजपद की प्रतिष्ठा के लिए और राज्य की मजबूती के लिए अनेक सुधारवादी कदम उठाए। उसने बुरका उतारकर कोट, चूड़ीदार पायजामा और टोपी पहनकर जनता के सामने आना, घुड़सवारी-तीरंदाजी करना, शिकार खेलना तथा सेना-संचालन के कामों को अपनाया।
राजकीय ऊँचे पदों में परिवर्तन करके कुछ लोगों को हटाया, कुछ को बिठाया। सेनाध्यक्षों, सूबेदारों की नियुक्ति की। अबीसीनिया निवासी जमालुद्दीन याकूत, पर उसका जो हव्सी था, विशेष प्रेम था। उसे रजिया सुलताना ने घुड़सवार सेना का प्रधान बनाया, जिससे अपने को ऊँचा समझने वाले तुर्क सरदार नाराजहो गए।
अन्तत: तुर्क सरदारों के चालीस संगठन ने रजिया के विरुद्ध षड्यंत्र रचने शुरू कर दिये और उसके खिलाफ तरह-तरह की अफवाहें फैलाने लगे। यहाँ तक कि कई सूबेदारों ने भी रजिया के विरुद्ध विद्रोह किए, जिन्हें रजिया ने दबा दिया।
आखिर अप्रैल, 1240 में रजिया ने भटिंडा की ओर कूच किया। वहाँ एक षड्यंत्र के तहत याकूत की हत्या कर दी गई। रजिया बच निकली, लेकिन बाद में कैदी बना ली गई। तुर्क सरदारों ने मुजहबुद्दीन बहराम शाह को दिल्ली की गद्दी पर बिठा दिया। नाजुक हालातों में रजिया ने भटिंडा के सूबेदार अल्तूनिया से विवाह कर लिया।
इससे तुर्क सरदार रजिया के सख्त खिलाफ हो गए और उन्होंने रजिया और अल्तूनिया, दोनों की हत्या की योजना बनाकर अल्तूनिया की हत्या कर दी, लेकिन रजिया भाग निकली और जंगल में डाकुओं ने रजिया को भी मार डाला।
रजिया सुल्तान ने तीन साल, 6 महीने 6 दिन शासन किया यह समय काफी कम है, किन्तु रजिया ने अपनी नीति कुशलता से स्वयं को योग्यतम शासिका सिद्ध कर दिया। रजिया का शासन काल सन् 1236 से 1240 तक माना जाता है।

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