एक अधिकारी की शह हुए ट्रांसफर से अफसरों में भय फैलाने की कोशिश


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स्टोरी हाइलाइट्स

ठाकुर के स्थानांतरण में पीसीसीएफ कैंपा मनोज अग्रवाल की अहम भूमिका मानी जा रही है, कहा जा रहा दोनों की अहं की लड़ाई में अग्रवाल ने एसीएस के कंधे का प्रयोग उन्हें न केवल संरक्षण से भी हटवाया बल्कि एक सीनियर पीसीएफ की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है..!!

भोपाल: जंगल महकमे के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि दो अधिकारियों का ट्रांसफर कर अफसरों में भय फैलाने की कोशिश शुरू हो गई है। बुधवार को जारी ट्रांसफर सूची में पहला नाम विभाष ठाकुर था। ठाकुर के स्थानांतरण में पीसीसीएफ कैंपा मनोज अग्रवाल की अहम भूमिका मानी जा रही है। कहा जा रहा दोनों की अहं की लड़ाई में अग्रवाल ने एसीएस के कंधे का प्रयोग उन्हें न केवल संरक्षण से भी हटवाया बल्कि एक सीनियर पीसीएफ की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। 

इसी प्रकार पिछली वीसी में पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक मोहित सूद अग्रवाल ने अमर्यादित शब्दों में सार्वजनिक रूप फटकार लगाई। जब यह खबर मीडिया में होते हुए वन बल प्रमुख तक पहुंची। पीसीसीएफ अग्रवाल को लगा कि पीड़ित अफसर ने ही अख़बार तक घटना की जानकारी दी। जबकि ऐसा नहीं, उनकी फटकार कई डीएफओ अपने आपको अपमानित महसूस कर रहे थे। 

संबंधित पीसीसीएफ द्वारा पहली बार ऐसा कृत्य नहीं किया। इसके पहले भी अपनी अमर्यादित भाषा से महिला डीएफओ समेत कई डीएफओ, एसडीओ और रेंजर्स को अपमानित कर चुके है।  कुछ अफसरों में दबे स्वर चर्चा होने लगी और अख़बार ने उसे प्रकाशित किया। 

आगे ऐसी खबरें न छपे इसीलिए अग्रवाल ने द्वारा एसीएस को मोहित सूद को पन्ना टाइगर रिजर्व हटाने के लिए इंफुलेन्स किया और गुरुवार को सूद को हटाने का सिंगल आदेश जारी किया गया। उन्हें पार्क से हटाकर भोपाल अटैच कर दिया है।सूद के आदेश पर उनके बैच और अन्य डीएफओ को मंथन करना होगा कि वे सीनियर अधिकारी की अपमानित करने वाले शब्दों पर चुप्पी साधे या फिर उसका शालीन तरीके से प्रतिवाद करें।

इनका कहना 

'सबसे पहले तो एक सीनियर पीसीसीएफ को अपने मातहत अधिकारियों के साथ आपत्तिजनक भाषा में बात नहीं करनी चाहिए थी. दूसरा यह की मोहित सूद का तबादला करके अघोषित तौर पर फील्ड के अधिकारियों पर चुप रहने का संदेश दिया जा रहा है। यह घोर आपत्तिजनक है। इस तबादले से एसीएस की समझ पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एक पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी कहने पर यदि वे (एसीएस) विभाग के दूसरे अफसरों को टारगेटेड कर रहें है।  प्रशासनिक नजरिया से आपत्तिजनक है। मैं इसे लेकर सीएस को भी पत्र लिख रहा हूं।

आज़ाद सिंह डबास 
सेवानिवृत एपीसीसीएफ