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घूमते राजनीतिक चक्र का केंद्र “चुनाव”

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sat , 25 Jul

सार

वैसे  केंद्र सरकार ने 18 सितंबर से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, केंद्र की बनाई कमेटी एक देश एक चुनाव के कानूनी पहलुओं पर गौर करेगी..!

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विस्तार

देश का राजनीतिक चक्र अपनी गति से घूम रहा है। दोनों मुख्य गठबंधन ने अपने-अपने निर्णय अपनी-अपनी तर्ज़ पर लिए हैं। राष्ट्रीय जनतंत्रिक गठबंधन के मुख्य धड़े भाजपा ने 'एक देश-एक चुनाव' पर कमेटी बना दी है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। जल्द ही इसका नोटिफिकेशन जारी होगा । वैसे  केंद्र सरकार ने 18 सितंबर से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। केंद्र की बनाई कमेटी एक देश एक चुनाव के कानूनी पहलुओं पर गौर करेगी। साथ ही इसके लिए आम लोगों से भी राय लेगी। 

दूसरी ओर इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल अलायंस की तीसरी बैठक के दूसरे दिन 13 सदस्यों की कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई है और तय किया है कि आने वाले चुनाव में तानाशाही-जुमलेबाजों के खिलाफ लड़ेंगे। भय मुक्त भारत बनाने की बात करते हुए इस बात पर चिंता भी व्यक्त की है कि सरकार ने अचानक संसद का विशेष सत्र क्यों बुलाया है?

इस घटनाक्रम से सवाल पैदा होता है,  क्या आम चुनाव अपने तय समय से पहले दिसंबर-जनवरी में कराए जा सकते हैं? यह एक महत्त्वपूर्ण सवाल है, सरकार और भाजपा के भीतरी संकेत ऐसे नहीं हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी कई बार दोहरा चुके हैं कि वह जनादेश का सम्मान करते हैं, लिहाजा वह पूरी अवधि तक प्रशासन में रहेंगे और चुनाव तय वक्त पर ही कराए जाएंगे, लेकिन विपक्ष के बड़े नेताओं नीतीश कुमार और ममता बनर्जी ने मध्यावधि चुनाव की आशंका जताई है। दोनों क्रमश: बिहार और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री हैं। खुफिया सूचनाएं उन तक भी पहुंचती हैं। दोनों नेताओं ने ‘इंडिया’ गठबंधन को जल्द ही एकजुट करने और साझा रणनीति तय करने के आग्रह किए हैं। ममता बनर्जी का इतना दावा भी है कि चुनाव प्रचार के लिए भाजपा ने हेलीकॉप्टर भी बुक कर लिए हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति हो सकती है कि विपक्षी गठबंधन आकार भी न लेने पाए और चुनावों का शंखनाद कर दिया जाए। विपक्षी नेताओं की दलीलें हैं कि जिस तरह मोदी सरकार ने रसोई गैस का सिलेंडर 200 रुपए सस्ता किया है और ‘उज्ज्वला योजना’ वालों को 400 रुपए सस्ता सिलेंडर मिलेगा। इसी के साथ यह भी घोषणा की गई है कि 75 लाख महिलाओं को ‘उज्ज्वला योजना’ के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन और भरा गैस सिलेंडर भी दिए जाएंगे। इससे लाभार्थियों की कुल संख्या 10.35 करोड़ हो जाएगी। यह मोदी सरकार का ही दावा है। इन घोषणाओं को ‘राखी का तोहफा’ प्रचारित किया जा रहा है। बहरहाल भारत में रसोई गैस का सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों की कुल संख्या 33 करोड़ से कुछ अधिक है, लिहाजा ‘उज्ज्वला’ के लाभार्थियों की संख्या बेहद महत्त्वपूर्ण है। इसके अलावा, भाजपा नेतृत्व ने मध्यप्रदेश और राजस्थान में पराजित सीटों पर अभी से उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। वे चुनाव प्रचार में भी जुट गए हैं।

भाजपा नेतृत्व ने अपने पार्टी काडर को अलर्ट भी कर दिया है और बूथ स्तर के असंख्य कार्यकर्ताओं को गृह मंत्री अमित शाह संबोधित कर रहे हैं। उनसे फोन पर भी संवाद किए जा रहे हैं। दरअसल यह भाजपा की पुरानी रणनीति रही है कि वह चुनाव के लिए हमेशा तैयार रहती है। इनसे मध्यावधि चुनाव के आसार स्पष्ट नहीं होते, लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण सूचना यह है कि जनवरी में मकर संक्रान्ति के आसपास प्रधानमंत्री मोदी को अयोध्या के भव्य राम मंदिर के एक हिस्से का उद्घाटन करना है। यहीं राम लला की मूर्तियां स्थापित की जानी हैं, लिहाजा वे प्राणवंत मानी जाएंगी। भाजपा इस संवेदनशील और आस्थामय मुद्दे को व्यापक स्तर पर भुनाना चाहेगी, लिहाजा चुनाव अप्रैल-मई के तय वक्त पर ही होंगे। 

‘इंडिया’ गठबंधन अभी तक एक निश्चित आकार और ताकत ग्रहण नहीं कर सका है। गठबंधन का अध्यक्ष, संयोजक तय होने के साथ-साथ सचिवालय और सीटों के बंटवारे का शुरुआती फैसला नहीं हो सका  है । गठबंधन का साझा न्यूनतम कार्यक्रम भी बेहद जरूरी है, प्रधानमंत्री पद का चेहरा फिलहाल तो तय नहीं होगा, क्योंकि अपने-अपने प्रभाव के क्षेत्रों में प्रधानमंत्री पद के लिए अपने-अपने नेता के शोर मचाए जा रहे हैं। 

कारण कुछ भी हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में एक बहस छिड़ गई है कि क्या मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं। ऐसे चुनाव कोई अभूतपूर्व और अप्रत्याशित नहीं होते, क्योंकि 1971, 1980, 1984, 1991, 1998, 1999 और 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विभिन्न कारणों से मध्यावधि चुनाव करा चुके हैं। उनकी जीत भी हुई और उनके दल पराजित भी हुए। बहरहाल मौजूदा परिदृश्य बिल्कुल भिन्न है।