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लापरवाही और लेटलतीफी का खामियाजा भुगतता Bhopal, गली-गली बने बाजारों से लोगों का चैन और सुकून छीना…अतुल पाठक

अतुल विनोद अतुल विनोद
Updated Fri , 20 Jul

सार

Bhopal को प्रकृति ने क्या नहीं दिया, खूबसूरत वादियां, बेहतरीन मौसम, झीलों और प्राकृतिक संसाधनों की खदान। पूर्वजों ने हमें ऐतिहासिक संरचनाएं दी। इंजीनियरिंग की सर्वोत्कृष्ट मिसाल दी।

janmat

विस्तार

Bhopal को प्रकृति ने क्या नहीं दिया, खूबसूरत वादियां, बेहतरीन मौसम, झीलों और प्राकृतिक संसाधनों की खदान। पूर्वजों ने हमें ऐतिहासिक संरचनाएं दी। इंजीनियरिंग की सर्वोत्कृष्ट मिसाल दी।

सुनियोजित विकास की शुरुआत दी। लेकिन हम भोपाल की खूबसूरती और प्राकृतिक संसाधनों को संजोकर नहीं रख पाए। हमने Bhopal को बिगाड़ दिया, Bhopal की खूबसूरती, चैन और सुकून नष्ट करने में, इसके संसाधनों का बेदर्दी से शोषण करने में, हमारे नागरिक पीछे नहीं है। न सिर्फ नागरिक बल्कि नेता, मंत्री, अफसर सब भोपाल का शोषण करने में आगे रहे।

अफसरों और नेताओं के संरक्षण में पनपे माफियाओं ने जहां जगह मिली वहां झुग्गी बस्तियां तान दी, जहां जगह मिली वहां कॉलोनी काट दी। तालाब के कैचमेंट एरिया का ख्याल नहीं रखा, नदी के किनारों को नहीं बख्शा, कई नालों को लील गए। ये "भोपालासुर" अब भी शहर को डस रहे हैं।

आजादी के बाद से लेकर अब तक Bhopal, कुछ इस तरह से कुचला गया है कि उसे गहराई से देख लिया जाए तो रूह कांप जाए। इसलिए अब भोपाल में नेता, मंत्री, अफसरों के निरीक्षण नहीं होते, इसलिए अब मुख्यमंत्री या प्रभारी मंत्री विकास कार्यों का गहराई से निरीक्षण करने नहीं निकलते हैं।

स्मार्ट रोड उस तरह है जैसे किसी रोगी को गहने पहना दिए जाएं।

Bhopal को तबाह कर दिया गया है, इसकी मूल संरचना को नष्ट भ्रष्ट कर दिया गया है। Bhopal शायद ही उन लोगों को माफ करें जिन लोगों ने शहर की कमान संभाली। चाहे वह भोपाल के कलेक्टर रहे हों, महापौर पार्षद या विधायक। सूबे के मुख्यमंत्री हों या भोपाल का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री। Bhopal ने इन्हें क्या नहीं दिया? लेकिन इन्होंने अपनी जिम्मेदारी ढंग से नहीं निभाई। निभाई होती तो इतना बेतरतीब विकास नहीं दिखता। माफिया भस्मासुर की तरह इसे नहीं लील पाते।

अब तो भोपाल का नाम बड़ा है दर्शन छोटे। भोपाल जगह जगह बेतरतीब विकास और सत्यानाश की गवाही दे रहा है। दूसरे राज्यों की राजधानियों को देखिए? कहाँ से कहाँ पहुँच गए यहां एक दो ढंग के फ्लाईओवर नहीं बन पाए।

नए मास्टर प्लान में लेटलतीफी का नतीजा यह है कि भोपाल में मास्टर प्लान की सड़कों पर कॉलोनियां बन गई है। जगह-जगह झुग्गी बस्तियां तन गई है। 

आज भी यह सिलसिला जारी है।

भोपाल शहर में रहवासी क्षेत्रों में बेतरतीब ढंग से बाजार विकसित हो गए हैं। इन बाजारों का उल्लेख न तो मास्टर प्लान में मिलता है ना ही नगर निगम की इन्हें कोई अनुमति है। यूं तो रोजगार व्यक्ति का हक है, लोगों ने अपना फायदा तो खूब देखा लेकिन शहर के नियम कायदों को ताक पर रख दिया।

कोलार में अनेक कॉलोनियों में मार्केट बन चुके हैं। गुलमोहर की रोड के किनारे आवासीय भवनों की अनुमति दी गई थी लेकिन दुकानें खोल ली गई है। नेहरू नगर, साकेत नगर, इंद्रपुरी बैरागढ़ में भी आवासीय क्षेत्रों में दुकानें और कार्यालय बना दिए गए हैं।

अवधपुरी, शिव मंदिर क्षेत्र, विद्यासागर कॉलेज के सामने तक आवासीय क्षेत्र में शायद कोई ऐसा मकान नहीं है जहां दुकान न खोली गई हो। घर घर में दुकान खोली गई है 80 फिट रोडों पर हर जगह आपको दुकानें दिखाई दे जाएंगी। अंदर भी कॉलोनियों में दुकान खोल दी गई है।

मार्केट के नाम पर आरक्षित जगहें खाली पड़ी हैं और मकानों में दुकानें खुल चुकी है। सुनियोजित विकास के लिए बाजार कॉलोनी से हटकर किसी एक स्थान पर होने चाहिए। सरकार ने बाजार विकसित किए नहीं।

भोपाल में कहां व्यावसायिक क्षेत्र है और कहां रहवासी इसका अंतर करना बहुत मुश्किल है। एमपी नगर या शिवाजी नगर अरेरा कॉलोनी हो या अन्य कोई स्थान। रचना नगर, गौतम नगर, अशोका गार्डन हर जगह आवासीय क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियां जारी हैं। अंदरूनी सड़कें बदहाल हैं लिंक रोड्स पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं इनमें इतनी लेयर्स डल चुकी हैं कि सड़कें मकानों के तल से काफी ऊपर हो गयी हैं।

आखिर कैसे Bhopal का सुनियोजित विकास होगा। जो तबाही अब तक हुई है क्या वह आगे रुक सकेगी? 

क्या जिम्मेदारों के कान में जूं रेंग सकेगी या आंखें बंद और कान बहरे हो चुके हैं।