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हिंदुत्व आईएसआईएस होता तो सलमान की गर्दन पर क्या अभी सिर होता ? हिंदुत्व ही है जो शरणार्थियों को भी देता है समान अधिकार| -सरयूसुत मिश्रा

सार

महान कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी सलमान खुर्शीद से दो कदम आगे निकल गए हैं. वह कह रहे हैं हिंदुइज्म और हिंदुत्व में अंतर है, वह कहते हैं कि अख़लाक़ को मारना क्या हिंदुइज्म है? “बिल्कुल नहीं” किसी को भी बेवजह मारना हिंदुइज्म नहीं है, लेकिन राहुल गांधी को अपने इस्लामिक ज्ञान से यह जरूर बताना चाहिए कि लखनऊ के हिंदू पार्टी के कमलेश तिवारी का सर कलम करने वाली इस्लामी सोच को क्या वह सही मानते हैं? फिरोज खान का पोता जैसे कश्मीरी ब्राह्मण हो जाता है? वैसी ही हिंदुत्व विरोधियों की राजनीतिक धारणा बदलती रहती है|

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विस्तार

महान कांग्रेस के कथित महान विधर्मी सलमान खुर्शीद ने इस्लामिक शिक्षा के ज्ञान से हिंदुत्व के पैरोकार संगठनों को आईएसआईएस और बोको हराम जैसा आतंकवादी संगठन बताया है| हिंदुस्तान में ऐसे बयान और लेखन करने वाले भी सलामत रहते हैं| यह हिंदुत्व जीवन पद्धति की सदाशयता  है. सलमान खुर्शीद को तालिबानी जीवन पद्धति में कोई बुराई नहीं दिखती. तालिबानी इस्लाम शायद उन्हें स्वीकार है. अगर नहीं स्वीकार है, तो उन्हें तालिबानी इस्लाम धर्म और उसकी जीवन पद्धति एवं धर्म ग्रंथों पर सच लिखने की हिम्मत दिखानी चाहिए. यह हिंदुत्व की ही उदारता है कि सलमान खुर्शीद का शिक्षा का धंधा पब्लिक स्कूल के नाम पर देश में फल फूल रहा है| हिंदुत्व पर दशकों से विवाद खड़े किए जाते रहे हैं. देश की सर्वोच्च अदालत उच्चतम न्यायालय ने भी कह दिया कि हिंदुत्व धर्म नहीं भारतीय जीवन पद्धति है|

भारतीय धरा और जनजीवन का प्राकृतिक तत्व है हिंदुत्व. “छिति जल पावक गगन समीरा” से बना भारतीय मनुष्यत्व “हिंदुत्व” जीवन पद्धति से अलग हो ही नहीं सकता| भारत में सारे विवाद की जड़ धर्म और जीवन पद्धति से जुड़ गए हैं. पुश्तों से रहते भारत में हैं, खाते कमाते और अपनी संतति बढ़ाते भारत में हैं, लेकिन भारतीय जीवन पद्धति से परहेज करते हैं. जीवन पद्धति में धार्मिक विचार शामिल हो सकता है, लेकिन उसमें कुछ प्राकृतिक तत्व भी शामिल होते हैं. केवल धर्म की जीवन पद्धति नहीं चल सकती |

महान कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी सलमान खुर्शीद से दो कदम आगे निकल गए हैं. वह कह रहे हैं हिंदुइज्म और हिंदुत्व में अंतर है, वह कहते हैं कि अख़लाक़ को मारना क्या हिंदुइज्म है ? “बिल्कुल नहीं” किसी को भी बेवजह मारना हिंदुइज्म नहीं है, लेकिन राहुल गांधी को अपने इस्लामिक ज्ञान से यह जरूर बताना चाहिए कि लखनऊ के हिंदू पार्टी के कमलेश तिवारी का सर कलम करने वाली इस्लामी सोच को क्या वह सही मानते हैं? फिरोज खान का पोता जैसे कश्मीरी ब्राह्मण हो जाता है ? वैसी ही हिंदुत्व विरोधियों की राजनीतिक धारणा बदलती रहती है| सलमान खुर्शीद को हिंदुस्तान में सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन नहीं बनाया जा रहा है, तो यह केवल हिंदुत्व की उदारता ही है | आजादी के समय जब धर्म के आधार पर पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र बना था, तब बचा हुआ भारत क्या दूसरे धर्म का नहीं हुआ ?

उस वक्त पाकिस्तान और बांग्लादेश में जो हिंदू रह गए थे, उनके साथ क्या शरणार्थी जैसा व्यवहार नहीं किया जा रहा है ? जब उन देशों में बचे हुए हिंदुओं को शरणार्थी जैसा ही माना जाता है, क्या भारत में रह गए मुसलमानों को सामान नागरिक के साथ विशेष दर्जा नहीं मिला है? पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की दुरावस्था और दोयम दर्जा एवं भारत में मुसलमानों की हैसियत की क्या कोई तुलना हो सकती है? हिंदुत्व ही है जो शरणार्थियों को भी समान नागरिक मानती है, और समान अधिकार एवं अवसर देती है|

आज भारत में कितने शरणार्थी निवास कर रहे हैं यह निश्चित करने के लिए बने नागरिक संशोधन क़ानून के विरोध के पीछे क्या सोच है और कौन लोग हैं|  हिंदुत्व जीवन पद्धति “कबीलाई” नहीं, “वसुधैव कुटुंबकम” की संस्कृति है| स्त्रियों को हिंदुत्व में ही पूजा जाता है| हिंदुत्व में  विवाह जीवन का संस्कार है, कोई समझौता नहीं है| हिंदुत्व में बहुविवाह स्वीकार्य नहीं है, जियो और जीने दो हिंदुत्व का ही मंत्र है| “धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो” हिंदुत्व की ही बुनियाद है| हिंदुत्व के सभी त्यौहार राक्षसों और आसुरी प्रवृत्तियों के विनाश की बुनियाद पर आधारित हैं| जीव हत्या पाप है, यह हिंदुत्व की आधारशिला है| जो धर्म और समाज जिहाद, काफ़िर, तलाक, विवाह और धर्म के लिए तालिबानी सोच पर चलता है, उस समाज के लोग हिंदुत्व पर सवाल उठाते हैं, यह कितना हास्यास्पद और विचित्र है! “हिंदू, हिंदुइज्म और हिंदुत्व” सभी सनातन धर्म की कोख से उपजे हैं |

इन सब की बुनियाद सनातन धर्म ही है, जो सनातन धर्म, मुगलों और अंग्रेजों के सामने नहीं झुका उसे सलमानों, रहमानों और राहुलानों के प्रमाण की आवश्यकता नहीं है| हिंदुत्व से आज अचानक परेशानी क्यों हो रही है? देश का सब कुछ राजनीति के हिसाब से चल रहा है या चलाया जा रहा है| आजादी के बाद जो मुस्लिम पाकिस्तान नहीं गए, उन्हें राजनीति का देवदूत मान लिया गया. देवदूतों का तुष्टीकरण राजनीतिक सफलता का सूत्र बन गया| देश में 2014 के पहले तुष्टीकरण का सूत्र सफलतापूर्वक चलता रहा और उसकी दम पर सरकारें हथियाई की गयीं| अलगाववाद की दृष्टि से विचार नहीं करने वाले हिंदुत्व के अनुयायी, सहिष्णु हिन्दू, तुष्टीकरण को देखते, सुनते और झेलते रहे|

हिंदुत्व ने कई हमले और हादसों को भी भुगता है. पचास साल तक देश में  हिंदुत्व के तुष्टीकरण के राजनीतिक अतिवाद को भुगत रहा हिंदू समाज धीरे-धीरे राजनीतिक रूप से सोचने लगा और तुष्टीकरण के खिलाफ खड़ा होने लगा. हिंदुओं में आ रहे वैचारिक बदलाव और अंगड़ाई को राजनीतिक दलों ने समझा और 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हिंदुत्व का राजनीतिक सपना पूर्ण रूप से पहली बार साकार हुआ|

जब दूसरे राजनीतिक दलों ने देखा कि हिंदुत्व के राजनीतिक उभार से उनकी राजनीतिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ने लगा, तो फिर हिंदुत्व की राजनीति के मुकाबले में हिंदुत्व, हिंदू और सनातन धर्म पर ही अनर्गल सवाल खड़े किए जाने लगे. जिन राजनीतिक दलों का राजनीतिक आधार तेजी से खत्म हो गया, वे दल तुष्टीकरण उन्मुखी समाज को अपने साथ फिर से जोड़ने के लिए, हिंदुत्व के खिलाफ कट्टर वाणी बोलने और लिखने लगे|

राहुल गांधी और सलमान खुर्शीद के बयान मुस्लिम परस्ती की पराकाष्ठा लगते हैं, कई बार ऐसा भी लगता है| मुस्लिम कट्टरता, जिहाद और उनके फिदायीन हमलों से डरकर, हिंदुत्व के खिलाफ बोलते हैं, ताकि ये समाज उनके साथ खड़ा रहे| भारत में हिंदू और मुसलमानों के मंदिर मस्जिद के लिए अलग-अलग कानून जो कांग्रेस ने ही बनाया है, उनको गलत कैसे मानेंगे ? मुस्लिम महिलाओं की दुरावस्था के लिए कौन सी राजनीति जिम्मेदार है ?

हिंदुत्व को राजनीति से खुलेआम  जोड़ने से राजनीतिक दलों को बचना चाहिए| राजनीति में हिंदुत्व के उभार के लिए भाजपा से ज्यादा मुस्लिम परस्त राजनीतिक दल और तुष्टिकरण की राजनीति जिम्मेदार है| धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में मुस्लिम परस्ती के कारण, उसके नर्क बनने की कहानी के लिए, कोई किताब पढ़ने या संग्रहालय में जाने की जरूरत नहीं है| हर शहर में “कश्मीरी पंडित” मुस्लिम कट्टरता और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को चीख चीख कर उजागर कर रहे हैं|

कहते हैं कि इतिहास अपने आप को दोहराता है. कश्मीरी पंडितों ने जो भोगा है, वह दूसरा समाज भी भोगने के लिए मजबूर हो सकता है| क्या आज का कश्मीर इसी ओर इशारा कर रहा है? पहले कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि कश्मीर से धारा 370 हटेगी, कश्मीरी पंडित लौटेंगे, लेकिन लौट रहे हैं.  पाकिस्तान और बांग्लादेश से हिंदू शरणार्थी भारत लौट रहे हैं, भारत सरकार ने ऐसे हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए कानून बनाए हैं|

हिंदुत्व के अनुयायियों को कट्टर बनने में भले ही बहुत समय लगे, लेकिन एक बार यह रोग लग गया, तो भारत की धरती पर रहने वालों को अपने को भारतीय और अपनी जीवन पद्धति को हिंदुत्व जीवन पद्धति से मिलाना पड़ेगा| वैसे मुसलमानों का राजनीतिक वजूद तो देश में दोयम दर्जे पर पहुंच ही गया है| इसके लिए ऐसे सलमान ही जिम्मेदार हैं| आज देश की राजनीतिक प्रक्रिया में मुसलमानों का क्या योगदान है? मध्यप्रदेश की सरकार में मुसलमान का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है| जिन राज्यों में मुसलमानों ने अपना एकमुश्त वोट किसी भी दल को देकर सरकार बनवाई है, वहां भी उनका राजनीतिक अस्तित्व दोयम दर्जे में ही है| कौन सा राज्य है जहां राजनीतिक नेतृत्व हिंदू, हिंदुत्व और सनातन धर्म के अनुयायी नहीं कर रहे हों ?

मुस्लिम समाज के मुसलमानों के कारण यह समाज अंततः हिंदू नेताओं के हाथों में ही कठपुतली बना हुआ है| इस समाज को देश की मुख्यधारा में आने के लिए धर्म को जीवन के आचरण तक ही सीमित करना होगा| उन्हें सह-अस्तित्व वाली जीवन पद्धति “हिंदुत्व” के साथ ही चलना पड़ेगा| हिंदुत्व की राजनीति की सफलता से अभी तो चुनचुनी लग रही है, नहीं संभले तो करारा तमाचा अभी बाकी है| जो हिंदू नेता हिंदुत्व को गाली देते हैं वह केवल राजनीति में मुस्लिमों का समर्थन मजबूत करने के लिए ऐसा करते हैं| ऐसे हिंदू नेताओं की भूमिका आज राजनीतिक विदूषक से ज्यादा नहीं दिखाई पड़ती|