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मोदी का पैगाम, देश की “दौलत” देश के नाम, जनजातीय नायकों का “सम्मान” “पुनर्जागरण” का अभियान..सरयूसूत मिश्र 

सार

नरेंद्र दामोदरदास मोदी 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री हैं, 7 साल भारत के 60 साल के शासन पर भारी, मोदी ने पूर्व सरकारों की ऐतिहासिक भूलों को न केवल सुधारा, बल्कि सुधारने की पीड़ा और जहर को स्वयं पिया, मोदी लगातार अपने काम और आचरण से अपना यह पैगाम साबित कर रहे हैं कि “देश के गौरव” को प्रणाम और देश की दौलत देश के नाम...

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विस्तार

काशी विश्वनाथ और गंगा के बुलावे पर होठों पर नमामि गंगे और हाथों में तिरंगा लेकर काशी पहुंचे नरेंद्र दामोदरदास मोदी 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री हैं| यह 7 साल भारत के 60 साल के शासन पर भारी है|नदियों की धारा मोड देने जैसे ऐतिहासिक क्रांतिकारी कार्यों को अंजाम देना शायद दृढ़ प्रतिज्ञ मोदी के अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के लिए संभव नहीं था| मोदी ने पूर्व सरकारों की ऐतिहासिक भूलों को न केवल सुधारा है, बल्कि सुधारने की पीड़ा और जहर को स्वयं पिया है| मोदी लगातार अपने काम और आचरण से अपना यह पैगाम साबित कर रहे हैं कि “देश के गौरव” को प्रणाम और देश की दौलत देश के नाम. 

मोदी का भी परिवार है. राजनीति में परिवारवाद के मोदी खिलाफ हैं| राजनीति से निजी स्वार्थ साधने के वे प्रबल विरोधी हैं| जो स्वयं राजनीति और देश के संसाधनों से निजी लाभ लेने की परिपाटी को तोड़ने में पूरी ताकत लगा रहा हो, उससे सत्ता से लाभ लेने वाली ताकतें कैसे खुश रह सकती हैं| “ना खाऊंगा न खाने दूंगा” मोदी सिद्धांत कईयों के लिए सिर पर चट्टान गिरने जैसा साबित हो रहा है| कोई मोदी को हिटलर कह रहा है तो कोई उनके कपड़ों, चश्में  की आलोचना को अपनी राजनीतिक ताकत समझ रहा है| देश का जनसमर्थन मोदी की सबसे बड़ी ताकत है| सामान्य परिस्थितियों में किसी भी जन नेता को इतना व्यापक जन समर्थन नहीं मिला था| इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद आम चुनाव में विशेष परिस्थितियों के कारण उस समय की पार्टी को जन समर्थन मिला था. 

मोदी के सामने दो रास्ते थे, वह देश हित में पुरानी भूलों को सुधारते अथवा जैसा चल रहा है वैसा चलने देते, और सत्ता का आनंद उठाते, लेकिन मोदी ने बदलाव को चुना, कठिन और चुनौतीपूर्ण कामों को अंजाम देकर, नये भारत का मार्ग प्रशस्त किया| भौतिक प्रगति में शिक्षा, स्वास्थ्य अधो संरचना और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से कितनी प्रगति हुयी यह तो विशेषज्ञों के आकलन का विषय है| लेकिन नए भारत का मनोबल, आत्मविश्वास और “जोश” आसमान छू रहा है| देश के विदेशी दुश्मनों को सर्जिकल स्ट्राइक जैसे, उनके घर में घुसकर सबक सिखाने का हौसला, नए भारत की नई कहानी है| आज दुनिया में भारत के प्रधानमंत्री ने भारत के महत्व और प्रासंगिकता को अब तक के सबसे अहम मुकाम पर पहुंचाया है| भारत की ऐतिहासिक गलतियों के कारण चीन भारत के लिए सिरदर्द बना हुआ है|

लेकिन भारत के जोश ने चीन के भी होश उड़ा रखे हैं| आधुनिक संसाधनों से लैस होकर सेना दुगुनी ताकत दिखा रही है| भारत में मोदी का प्रधानमंत्री बनना इतिहास का वह मोड़ है जहाँ से नए और आधुनिक भारत के नए सफर की शुरुआत हुई है| राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तब भी पुरानी सरकार की राजनीतिक शैली में आमूल-चूल बदलाव लाया गया गया है| देश की राजनीति कभी कांग्रेस वर्सेज़ आल हुआ करती थी आज भाजपा वर्सेस ऑल हो गई है| राजनीति की मुख्य धुरी भाजपा बन गई है| भारत और भाजपा आज देश की जरूरत सिद्ध हो रहे हैं|

नरेंद्र मोदी ने काला धन और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए नोटबंदी जैंसा ऐतिहासिक कदम उठाने का साहस दिखाया| भारत के कर ढांचे को बदल दिया गया| जीएसटी की शुरुआत मोदी की बहुत बड़ी सफलता है| प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का उदय “भारत उदय” का प्रतीक बनता जा रहा है| भाजपा और संघ की  सेवा भले ही मोदी का नेतृत्व उभारने की बुनियाद में हो, लेकिन प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व की दृढ़ता, गरीबों के प्रति दृष्टिकोण और विकास की अवधारणा, व्यापक बदलाव लाने में सफल रही है| आधुनिक भारत के इतिहास में वर्ष 2014 टर्निंग पॉइंट है|

प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए नरेंद्र मोदी को देश की समस्याओं, देश के इतिहास ,संस्कृति, धर्म के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की बहुत गहरी समझ है. समझ ही काफी नहीं होती, देश और समाज के हित में अपनी सोच को राजनीतिक हानि लाभ के  गणित से समझे बिना उसे लागू करने का दृढ़ संकल्प भी होना चाहिए जो नरेंद्र मोदी ने अपने हर निर्णय में साबित किया है| जहां देशभक्ति उनमें कूट-कूट कर भरी है, वहीं भारतीय जीवन दर्शन के अनुरूप देश को आगे बढ़ाने में भी वह अद्भुत क्षमताओं का परिचय दे रहे हैं| सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास का उनका नारा उनके सारे राजनीतिक दर्शन का सार है|

उनकी आश्चर्यजनक क्षमता और दृढ़ता को देखते हुए देश के अनेक राजनीतिक दलों में बदहवासी बढ़ती जा रही है| वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में जितने चतुर हैं उतने ही देश की समस्याओं के समाधान में भी|कोरोना महा संकट में उन्होंने जिस तरह देश को उबारा और दुनिया के कई देशों को मदद पहुंचाई उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हो रही है| नरेंद्र मोदी की आलोचना आरएसएस का एजेंडा तत्परता से लागू करने के लिए भी विरोधी करते हैं|

आज जहां दुनिया के विकसित राष्ट्र अभी भी कोरोनावायरस से जूझ रहे हैं वही भारत काफी हद तक टीकाकरण और कोरोना व्यवहार अपना कर उससे बाहर आने में सफल रहा है| नमामि गंगे अभियान भारत की सांस्कृतिक आत्मा का अभियान बना है| “मेक इन इंडिया” “स्वच्छ भारत अभियान” “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियान देश में बुनियादी बदलाव का माध्यम बन रहे हैं| जन धन योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना नें  नए भारत में लोगों के दिलों में अपना स्थान बनाया है| हर गरीब को इन योजनाओं का लाभ सुनिश्चित हुआ है|

कश्मीर से धारा 370 हटाने का हिमालयीन काम मोदी ने करके दिखाया है| नागरिकता संशोधन एक्ट के लिए मोदी सरकार का विरोध कौन सी ताकतें कर रही हैं यह समझ से परे है| कोई भी देश अपने देश में रहने वाले नागरिकों का रिकार्ड संधारित करता है, लेकिन भारत में यह काम आजादी के इतने समय तक तो हुआ नहीं, जब मोदी सरकार ने इस दिशा में पहल की तो उसका विरोध किया गया, दूसरे राजनीतिक दलों ने भी इस विरोध को हवा दी|

एक विषय कृषि विधेयकों का है, जिस पर मोदी को आलोचना का शिकार बनाया जा रहा है, जो विधेयक अभी लागू ही नहीं हैं, उसको लेकर  आंदोलन और गतिरोध करना देश के विकास की गति को बाधित करना जैसा है| नरेंद्र मोदी ने जो एक बात साबित कर दी है वह यह है कि उनकी कितनी भी आलोचना की जाए, लेकिन अगर उनका निर्णय देश हित में है, तो वह किसी भी कीमत पर बदलते नहीं हैं| उनको डराना और झुकाना सच के साथ बहुत आसान है, लेकिन स्वार्थ के साथ तो नामुमकिन है, आज देश में मोदी है तो मुमकिन है का विश्वास कायम हुआ है| भारत की बेचैनी को मोदी समझते हैं और देश के लिए मोदी की बेचैनी को भारत समझता है| मोदी आज देश का भरोसा बन गये हैं|  भारत के विकास और मोदी के विरोध की राजनीति पर किसी कवि की कविता बहुत सटीक बैठती है 

“हवा का काम है चलना दिए का काम है जलना” |  
वह अपना काम करती है मैं अपना काम करता हूं ||

जनजातिय गौरव दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भोपाल आगमन, भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनेगा| ना केवल मध्यप्रदेश में, बल्कि पूरे देश में “बिरसा मुंडा” की जयंती “जनजाति गौरव दिवस” के रूप में 15 नवंबर को मनाई जा रही है| यह निर्णय लेने का इतिहास भी प्रधानमंत्री मोदी ने ही रचा है| हबीबगंज स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम करने का श्रेय  निश्चित ही नरेंद्र मोदी को जाएगा|  भोपाल के गौड़ राज्य की रानी जिसे पुरातत्व का विषय मान लिया गया था, जिसके बलिदान और गौरव को भुला दिया गया था, उसको अब पूरी दुनिया भारत के एयरपोर्ट स्टाइल में बने सबसे पहले स्टेशन के रूप में रानी कमलापति के नाम से जानेगी| 

देश के अंदरूनी और बाहरी तत्व  एक नई शैली में भारत में विभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं| सामाजिक स्तर पर समाज को बांटने का षड्यंत्र किया जा रहा है| मोदी इससे अनभिज्ञ हैं ऐसा नहीं है| सिविल सोसाइटी को बांटने की कोशिश को सख्ती से रोकने की जरूरत है| भाजपा और संघ के लिए देश का सामाजिक और सांस्कृतिक एकीकरण सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है|