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काला धन अपराध, सफेद धन दिलाता लाभ का पद

सार

एमपी कांग्रेस के बुद्धिजीवी नेता सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा द्वारा कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कमलनाथ के पास धन-संपत्ति होने को उनकी सीएम उम्मीदवार के लिए सबसे बड़ी योग्यता बताई है. विवेक तन्खा ने कहा कि कमलनाथ के पास धन-संपत्ति है, हवाई जहाज है और वे सभी संसाधन हैं जो राजनीति के लिए जरूरी होते हैं. इसलिए उनका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार होना कांग्रेस की जरूरत है..!

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विस्तार

इस वक्तव्य पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि क्या आज अकूत धन-दौलत ही नेता होने का पैमाना हो गया है? सीएम शिवराज ने कहा कि लोकतंत्र में लीडर के यह मापदंड नहीं हो सकते. सीएम शिवराज के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कमलनाथ कहते हैं कि सीएम खुद बताएं मेरे पास कौन सी कंपनी या व्यापार है? वहीं कमलनाथ ने कहा कि वह किसी उद्योग, किसी कंपनी या व्यापार के मालिक नहीं है.

राज्य के भाग्य विधाता राजनेताओं के धन-दौलत पर उत्पन्न राजनीतिक विवाद के बाद इस सवाल का उत्तर जानने के लिए कि कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार कमलनाथ का प्रोफेशन क्या है, उनके द्वारा 2019 में उपचुनाव के समय दिए गए शपथ पत्र का अध्ययन करने की जिज्ञासा हुई. इलेक्शन कमीशन के पोर्टल पर जब शपथ पत्र देखने को मिला तब यह जानकर आंखें खुली की खुली रह गईं कि कमलनाथ ने अपना सेल्फ प्रोफेशन पॉलिटिक्स बताया है. मन में यह सवाल पैदा हुआ कि राजनीति सेवा है या प्रोफेशन है?

सामान्य रूप से राजनीति को सेवा के रूप में ही माना जाता रहा है. यह अलग बात है कि अब राजनीति से सेवा का सूत्र विलोपित सा होता दिखाई पड़ रहा है. आज भी पब्लिक पॉलिटिक्स को सर्विस के रूप में ही देख रही है. सवाल यह है कि जो राजनेता राजनीति में सफलता के उदाहरण बने हुए हैं वे राजनीति को सेवा मानते हैं या नहीं मानते हैं. एमपी कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार कमलनाथ के शपथ पत्र पर अगर भरोसा किया जाए तो पॉलिटिक्स उनका प्रोफेशन है. प्रोफेशन मतलब जीवन यापन और रोजी-रोटी के लिए कमाई का जरिया. 

जब राजनेता स्वयं पॉलिटिक्स को प्रोफेशन मानने लगेगा तो राजनीति पेशा बन जाएगी. ऐसे में तो बाकी पेशे की तरह ही इस पेशे का लक्ष्य भी निश्चित रूप से पैसा ही होगा. राजनीति में करप्शन के मामले जिस तरह से उजागर हो रहे हैं उससे भी ऐसा ही लगता है कि राजनीति का लक्ष्य सेवा नहीं बल्कि कमाई हो गया है. इसलिए राजनेता अगर इसे अपना प्रोफेशन बता रहे हैं तो अवचेतन मन से ही सही सच्चाई अपने आप सामने आ रही है.
 
मध्यप्रदेश में कमलनाथ को जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कमान सौंपी गई थी तब से ही यह अवधारणा बनी हुई है कि उनकी धन-दौलत और पार्टी के लिए मनी मैनेजमेंट ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. विवेक तन्खा असाधारण किस्म के बुद्धिजीवी और वरिष्ठ जननेता हैं. उनकी टिप्पणी बहुत मायने रखती है. 

जब कमलनाथ स्वयं यह कह रहे हैं कि उनके पास ना कोई उद्योग है ना कोई व्यापार है तो फिर शपथ पत्र में उन्होंने जो भी संपत्ति बताई है उसे प्राप्त करने का जरिया क्या हो सकता है? सांसद और विधायक के रुप में मिलने वेतन से तो इतनी संपत्ति नहीं एकत्रित हो सकती. किसी भी व्यक्ति की संपत्ति का जरिया उसका प्रोफेशन ही माना जाता है तो निश्चित रूप से जिसका जो प्रोफेशन होगा वही उसकी कमाई का जरिया होगा.

इस विवाद से एक और प्रश्न उत्पन्न हो रहा है कि काला धन तो अपराध माना जाता है लेकिन सफेद धन राजनीति में लाभ का पद दिलाता है. सीएम उम्मीदवार की योग्यता का पैमाना धन-संपत्ति, हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर होने लगेंगे तो फिर लोकतंत्र को धनतंत्र बनने से कैसे रोका जा सकता है? यदि कमलनाथ के पास कोई उद्योग-व्यापार नहीं है तो फिर निजी हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर पर उनकी यात्राओं का खर्च कहां से आता है? जब वे राज्य के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तब भी सरकारी हवाई जहाज खराब होने की स्थिति में उनके द्वारा निजी हवाई जहाज का ही उपयोग किया जाता था. इस बारे में कई बार उनके द्वारा बयान भी दिए गए थे कि वह सरकारी विमान में नहीं बल्कि निजी विमान में यात्राएं करते हैं.

राजनेताओं के सामने उनका प्रोफेशन बताने में बड़ी कठिनाई आ रही है. राजनेताओं के चुनाव में दिए गए शपथ पत्रों का अध्ययन किया गया, तब पाया गया कि अधिकांश नेताओं ने अपने आय के स्रोतों को ही प्रोफेशन के रूप में अंकित किया है. सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने अपने शपथ पत्र में मेंबर ऑफ पार्लियामेंट को प्रोफेशन के रूप में अंकित किया है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रोफेशन के कॉलम में एग्रीकल्चर और हॉर्टिकल्चर के साथ ही आय के अन्य स्रोतों का उल्लेख किया है. किसी भी व्यक्ति के आय के स्रोतों को सामान्य रूप से प्रोफेशन के रूप में ही माना जाता है. लेकिन राजनीति से आय इसमें कैसे शामिल हो सकती है?

एक आम कहावत है. 

उत्तम खेती मध्यम बान
अधम चाकरी, भीख निदान

इसका मतलब है कि सर्वश्रेष्ठ व्यवसाय खेती किसानी है. मध्यम कोटि का व्यवसाय वाणिज्य व्यापार है. नौकरी अधम है किंतु भीख मांगना सबसे निचले कोटि का है. समाज में सामान्यतः नौकरी और व्यापार दो ही प्रोफेशन में सब कुछ समाहित होता है. निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी कार्यपालिका के पदों पर लोकसेवक के रूप में माना जाता है. सभी शासकीय सेवक लोकसेवक ही होते हैं. संसद और विधानसभा के सदस्य भी वेतन और पेंशन प्राप्त करते हैं लेकिन उन्हें यह सुविधाएं विधायिका से प्राप्त होती हैं. इसलिए उन्हें पब्लिक रिप्रिसेंटेटिव माना जाता है. पब्लिक सर्वेंट के रूप में केवल उन्हीं जनप्रतिनिधियों को माना जाता है जो कार्यपालिका में संवैधानिक पदों पर काम करते हैं.

यह बहुत बुनियादी सवाल है कि राजनीति के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का प्रोफेशन क्या माना जाएगा? निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को निश्चित ही वेतन और भत्ते विधायिका से प्राप्त होते हैं इसलिए उनके द्वारा निर्वहन दायित्व के लिए उन्हें जनधन से भुगतान प्राप्त होता है. क्या इसे भी नौकरी के प्रोफेशन के रूप में ही देखा जाएगा? क्या राजनीति को सेवा की बजाय एक कैरियर के रूप में देखा जाएगा? 

देश में लोकतंत्र स्थापित करने के लिए महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और डॉक्टर अंबेडकर जैसे महान नेताओं ने बलिदान क्या यह सोच कर दिया था कि जो व्यवस्था उनके द्वारा कायम की जा रही है उसके रहनुमा उसे प्रोफेशन के रूप में लेकर उसे आय का जरिया  मानने लगेंगे? अगर यह दृष्टिकोण लोकतंत्र स्थापित करने के लिए बलिदान होने वाले महान नेताओं का होता तो शायद वर्तमान की परिस्थितियां निर्मित नहीं हो पाती.

राजनीति को सेवा का जरिया माना जाना चाहिए. इसके लिए नए सिरे से विधान और  प्रक्रियाओं का निर्धारण किया जाना चाहिए. जनसेवा के कार्यों में बिना भागीदारी के राजनीति में किसी को भी अवसर नहीं मिलना चाहिए. राजनीति में आने के लिए पूर्व निर्धारित योग्यता होनी चाहिए. शैक्षणिक योग्यता भी अनिवार्यता के साथ निर्धारित की जानी चाहिए. राजनीति में आ रही गिरावट और इस क्षेत्र को कमाई का जरिया बनाने की मनोवृति को रोकना जरूरी है.

राजनीति में बुद्धिजीवी आने से पीछे शायद इसलिए हट रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र में वर्तमान हालात अच्छे नहीं हैं. जहां धन-दौलत, नेता और पद पाने का आधार हो, वहां कोई  लोकतांत्रिक आचार विचार और सोच का व्यक्ति राजनीति में जाने के लिए कैसे सोच सकता है? राजनीतिक क्षेत्र में शायद परिवारवाद इसीलिए पनप रहा है कि नए लोग अपना करियर दूसरे क्षेत्रों में बनाना ज्यादा पसंद करते हैं. राजनीति को बुद्धिजीवी वर्ग में डर्टी फील्ड के रूप में देखने की प्रवत्ति क्यों बढ़ी है?

राजनीति में धन दौलत के उपयोग और इसे प्रोफेशन के रूप में लेने की बढ़ती प्रवृत्ति लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रही है. जनता के लिए, जनता द्वारा और जनता की लोकतांत्रिक व्यवस्था अब धन के लिए, धन के द्वारा और धन की व्यवस्था के रूप में क्यों स्थापित होती जा रही है? राजनेताओं द्वारा चुनावी शपथ पत्रों में प्रोफेशन के रूप में पॉलिटिक्स का लिखा जाना उस सोच को प्रदर्शित कर रहा है जिसमें प्रोफेशन और कमाई का संबंध है.

राजनीति में भ्रष्टाचार आज सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. जब प्रोफेशन ही राजनीति को मान लिया गया है तो फिर भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति को कैसे रोका जा सकता है? राजनीति सेवा के रूप में फिर से कैसे स्थापित हो इस दिशा में पब्लिक के साथ ही राजनेताओं को भी मनोवृति में बदलाव करना होगा. राजनीति में सेवा को ही विचार और आचार बनाने की जरूरत है.