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असमय मौतें रोकना सबकी जिम्मेदारी  

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Wed , 20 Apr

सार

भारत के अतिरिक्त दुनियाभर में हर साल चार करोड़ से अधिक लोग इन बीमारियों के कारण मौत के शिकार हो जाते हैं..!

janmat

विस्तार

प्रतिदिन-राकेश दुबे

07/09/2022

आज़ादी के ७५ साल बाद भी औसत भारतीय के ७०  साल की उम्र से पहले गैर-संचारी रोगों से मर जाने की आशंका बनी हुए है| यह निष्कर्ष भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन में सामने आया है |यूँ तो यह अध्ययन हर वर्ष किया जाता है, पर उपलब्ध  आंकड़े कुछ  पुराने  हैं| ये आंकड़े दर्शाते हैं कि  हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर गैर संचारी (गैर संक्रामक) रोगों की वजह से बोझ बढ़ता जा रहा है| ये रोग अनुवांशिक, शारीरिक, पर्यावरणीय और व्यावहारिक कारकों की वजह से हो रहे  हैं| विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय रोग, कैंसर, दमा व अन्य सांस की बीमारियां और डायबिटीज इस श्रेणी के मुख्य रोग हैं| भारत के अतिरिक्त  दुनियाभर में हर साल चार करोड़ से अधिक लोग इन बीमारियों के कारण मौत के शिकार हो जाते हैं|

स्थिति की गंभीरता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर होने वाली सभी मौतों में इनका हिस्सा ७१ प्रतिशत से अधिक है| भारत में भी हालत बेहद गंभीर है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा  जारी एक पिछली  रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में होने वाली मौतों में गैर संचारी रोगों का हिस्सा १९९०  में ३७.९ प्रतिशत था, जो २०१६  में बढ़ कर ६१.८ प्रतिशत हो गया |इसके  बाद से इसमें कोई कमी नहीं आई है, मामले बढे ही हैं | भारत में असमय मौतों की संख्या के प्रतिशत में कमी का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है |

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि भारत में लगभग ५८  लाख लोग हर साल इन रोगों से मौत का शिकार बन जाते हैं, अब  स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि हर चार में से एक भारतीय के ७०  साल की उम्र से पहले गैर-संचारी रोगों से मर जाने की आशंका रहती है| राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि असमय मौतों की संख्या में २०२५ तक २५  प्रतिशत की कमी की जाये|
अब तो इस स्वास्थ्य संकट पर प्राथमिकता से ध्यान देना जरूरी हो गया है| दिल का दौरा और कैंसर तो महामारी की शक्ल लेते जा रहे हैं| डायबिटीज आम बीमारी बनती जा रही है|बदलती जीवन शैली ने इन बीमारियों को बढ़ाने में सबसे अधिक योगदान दिया है| वायु प्रदूषण सांस की बीमारियों के साथ हृदय रोग और अनेक तरह के कैंसर का कारण भी बन रहा है| खाने-पीने की चीजों में रसायनों का बेतहाशा इस्तेमाल एक बड़ी समस्या बन चुका है|

इस तरह के रोग अन्य रोगों या संक्रमणों को भी अधिक जानलेवा बना देते हैं| 

कोरोना दुष्काल के दौर में इन बीमारियों को मौतों का सबसे बड़ा कारण बताया गयाहै |इनकी रोकथाम की सबसे पहली जिम्मेदारी व्यक्ति की खुद  है| उसे अपने रहन-सहन में वांछित सुधार लाना चाहिए तथा स्वास्थ्य पर बहुत ध्यान देना चाहिए| संतुलित भोजन, कसरत, घूमना-टहलना, शारीरिक मेहनत करना, तम्बाकू व शराब से परहेज और डॉक्टर से सलाह जैसे उपाय हमें असमय मौत के मुंह में जाने से बचा सकते हैं|

दुष्काल और विभिन्न रोगों में वृद्धि ने आज इस आवश्यकता को रेखांकित किया है कि हमारी स्वास्थ्य सेवा में तीव्र सुधार व विस्तार होना चाहिए| संविधान में वर्णित इस अधिकार के विषय में  सरकार के ओर से भी प्रयास हो रहे हैं, पर उसमें अधिक निवेश अपेक्षित है| इसके बावजूद पहली जिम्मेदारी तो हमारी अपनी है |