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सर्वानुमति नहीं बनी तो विपक्ष बनेगा विलेन

सार

    संसद नारी शक्ति वंदन का इतिहास बनाने जा रही है. महिला आरक्षण कानून बन चुका है. अब तो उसे समय से लागू करनेके लिए कानून बनना है. इसके लिए विशेष सत्र हो रहा है..!!

janmat

विस्तार

    संसद नारी शक्ति वंदन का इतिहास बनाने जा रही है. महिला आरक्षण कानून बन चुका है. अब तो उसे समय से लागू करने के लिए कानून बनना है. इसके लिए विशेष सत्र हो रहा है. 

    पीएम नरेंद्र मोदी नारी शक्ति वंदन विधेयक पर सर्वानुमति के लिए सभी दलों से सहयोग मांग रहे हैं. तो विपक्ष से इसके विरोध में आवाज आ रही हैं. सोनिया गांधी इसे राजनीतिक लाभ के लिए बता रही हैं. परिसीमन की राजनीति भी इसमें बताई जा रही है.

    लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के रिजर्वेशन को अब रोका नहीं जा सकता है. अगले लोकसभा चुनाव में हर हालत में इसका पालन होगा. जब नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 में लाया गया था, तब विपक्ष ने राष्ट्रीय जनगणना और उसके बाद परिसीमन के बाद इसे लागू करने के प्रावधानों पर ऐतराज किया था. विपक्ष की मांग थी कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए. उस समय तो बीजेपी की केंद्र सरकार ने इसे नहीं माना, लेकिन अब प्रधानमंत्री नारी वंदन सम्मेलन में यही कह रहे हैं, कि सरकार विपक्ष की मांग को ही पूरा कर रही है. जब मूल विधेयक में सभी दलों ने सहयोग किया था तो अब इसे लागू करने की प्रक्रिया में भी सर्वानुमति का इतिहास बनाया जाए. 

    विपक्ष इसे बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी लाभ लेने के लिए बीजेपी के प्रयास के रूप में देख रहा है. जब महिला आरक्षण का मूल विधेयक पास किया गया था तब भी ऐसे ही आरोप लगाए गए थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम में यह सही साबित नहीं हुआ. बीजेपी को कोई लाभ नहीं मिला. यहां तक कि उसे स्पष्ट बहुमत भी नहीं मिल पाया. महिला आरक्षण एक व्यवस्थागत परिवर्तन है. इसे जो करेगा उसको राजनीतिक लाभ दीर्घकालीन तो हो सकता है, लेकिन तात्कालिक परिणाम से इसको जोड़ना गलत है.

    देश का मानस इस पर तो बन गया है, कि महिलाओं का रिजर्वेशन लोकसभा, विधानसभा में क्रियान्वित होने में अब देर नहीं होनी चाहिए. महिला रिजर्वेशन को लागू करने की प्रक्रिया का बड़ा मुद्दा है. अभी सरकारविशेष सत्र में जो विधेयक लाने जा रही है, उसमें नई राष्ट्रीय जनगणना की प्रतीक्षा किए बिना पुरानी जनगणना के आधार पर ही परिसीमन कर आरक्षण को अमल  में लाने का प्रावधान है. विपक्ष की यही मांग थी.

    महिला रिजर्वेशन पर कांग्रेस सहित सभी दल कई दशकों से काम कर रहे थे. कांग्रेस ने ही इसे राज्यसभा में पारित कराया था. लोकसभा में इसलिए नहीं ला पाई क्योंकि उनके पास बहुमत नहीं था और सहयोगी दल इसके खिलाफ थे. हर राजनीतिक दल और नेता की ऐसे कदम उठाने की लालसा होती है, जो इतिहास बन सके. जब नए संसद भवन में काम प्रारंभ हुआ, तब पीएम मोदी ने सबसे पहला कानून नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित कराकर इसे नई संसद के इतिहास की बुनियाद से जोड़ दिया. उस समय सभी दलों में सहयोग किया. महिला आरक्षण 33% दिया गया है. पहले से ही यह लगभग तय था, कि जब आरक्षण को लागू किया जाएगा तब लोकसभा-विधानसभा की सीटें बढ़ाई जाएंगी. सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है. जनगणना जो कोरोना के कारण विलंबित हुई. अब राष्ट्रीय जनगणना प्रारंभ हुई है, लेकिन इसके नतीजे की प्रतीक्षा करने पर महिला रिजर्वेशन 2029 में लागू करना संभव नहीं हो पाएगा. 

    महिला रिजर्वेशन का कानून बनने के पहले भी परिसीमन को लेकर सरकार और  विपक्ष के बीच में मतभेद बने हुए थे. परिसीमन डीलिमिटेशन मुख्य रूप से उत्तर दक्षिण के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जनसंख्या नियंत्रण और संघीय संतुलन को लेकर रहे हैं. दक्षिणी राज्यों का कहना है, कि जनसंख्या नियंत्रण के उनके बेहतर प्रयासों के कारण  डीलिमिटेशन में उनके राज्यों को दंडित होने की आशमका है. विपक्षी दलों का आरोप है कि दक्षिणी राज्यों की संसदीय सीटें घट जाएंगी. हिंदी भाषी राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने से संघीय ढांचे के कमजोर होने की संभावना है. क्षेत्रीय पार्टियां अपने राज्य विशिष्ट पहचान और प्रभाव कम होने की आशंका जता रही हैं. 

   एनडीए के सहयोगी टीडीपी के नेता आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी दक्षिणी राज्यों की आशंकाओं पर बात उठाई थी. कांग्रेस और दूसरे दल भी इसी तरह की बातें आगे बढ़ा रहे हैं. अब सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की दिशा मेंआगे बढ़ रही है. ऐसा बताया जा रहा है कि इसी तरह का विधेयक विशेष सत्र में लाया जा रहा है. 

    सोनिया गांधी ने इसके लिए लेख लिखा है. उन्होंने एक मुद्दा यह भी उठाया है कि महिला रिजर्वेशन में कोटे के अंतर्गत ओबीसी महिलाओं का कोटा तय किया जाना चाहिए. संविधान में केवल एससी, एसटी के लिए लोकसभा-विधानसभा में सीटों का आरक्षण है. इसमें ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था नहीं है. 

    नारी शक्ति वंदन के राजनीतिक दर्शन को आगे लाने का इतिहास पीएम नरेंद्र मोदी दर्ज कर चुके हैं. महिला रिजर्वेशन कानून बन चुका है. अब तो केवल उसका  क्रियान्वयन होना है. सभी राजनीतिक दलों को इस क्रांतिकारी कानून को अमल में लाने में अपना सहयोग देना ही होगा., अगर कोई विलेन के रूप में इतिहास में अपना नाम दर्ज करना चाहता है तो उसके पास मौका है लेकिन अब महिला रिजर्वेशन लागू  होकर ही रहेगा. 

        कानून निर्माण की प्रक्रिया और डेवलपमेंट में महिलाओं का नेतृत्व ना केवल दिखना चाहिए बल्कि वास्तविक रूप से स्थापित होना चाहिए. महिला आरक्षण लागू करते समय राजनीतिक दलों को वंशवाद से बचना पड़ेगा. स्थापित राजनीतिक परिवारों की महिलाओं को ही इसका लाभ देकर नए कानून के उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो सकती. कमोवेश सभी दलों में कांग्रेस में तो राजनीतिक परिवारों के युवाओं का ही वर्चस्व है. अगर यही महिला रिजर्वेशन में भी हुआ तो फिर सारी एक्सरसाइज नारी शक्ति वंदन के युग को इतिहास बनाने से चूक जाएगी.

   पीएम मोदी ने महिला आरक्षण का कानून बनाने का इतिहास बना दिया है. उसे लागू करने का इतिहास भी उनके खाते में ही जाएगा. इससे संसदीय व्यवस्था में कितना सुधार होगा यह तो वक्त पर ही पता चलेगा.