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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुरुपयोग रोकिए 

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sat , 25 Jul

सार

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीक मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि एआइ के मामले में भारत सरकार दो पहलुओं पर काम कर रही है- इसकी क्षमता को बढ़ाना तथा सुरक्षा के उपाय करना..!!

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विस्तार

यूँ तो दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के क्षेत्र में बहुत तेजी से प्रगति हुई है। इसके साथ-साथ इसके दुरुपयोग और कुप्रभावों को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीक मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि एआइ के मामले में भारत सरकार दो पहलुओं पर काम कर रही है- इसकी क्षमता को बढ़ाना तथा सुरक्षा के उपाय करना। बीते मार्च में कैबिनेट ने ‘इंडिया एआइ मिशन’ को स्वीकृति दी थी. अगले दो-तीन महीनों में इस मिशन को प्रारंभ होने के आसार दिख रहे हैं।

इसके लिए 10,300 करोड़ रुपये की योजना बनायी गई है। एआइ अनुसंधान को गति देने के लिए 10 हजार से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट की खरीद होगी। साथ ही, अन्वेषण केंद्र, डाटा सेट आदि भी स्थापित होंगे। इस योजना में निजी क्षेत्र की भी भागीदारी होगी। इस मिशन से एआइ के विकास में निवेश बढ़ने की उम्मीद है। 

पहले से ही अनेक स्टार्टअप सक्रिय हैं तथा निजी कंपनियां डाटा केंद्र बना रही हैं। वैष्णव ने ग्लोबल इंडिया एआइ समिट को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि तकनीक तक सभी की पहुंच होनी चाहिए। इस संबंध में भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। बहुत कम समय में एआइ ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपयोगिता साबित की है। विशेषज्ञों की मानें, तो इसकी संभावनाएं असीमित हैं। ऐसे में भारत का यह मिशन बहुत आवश्यक पहल है। सरकार के आगे आने से प्रोग्रामरों, डाटा विशेषज्ञों तथा निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।उल्लेखनीय है कि बीते कुछ वर्षों से केंद्र सरकार ने शोध एवं अनुसंधान के मद में आवंटन बढ़ाने का सिलसिला भी शुरू किया है। 

हमेशा की तरह किसी अन्य तकनीक की तरह एआइ के दुरुपयोग के मामले भी सामने आने लगे हैं। भारत में डिजिटल मसलों से जुड़े कुछ कानून बने हैं और कुछ प्रस्तावित हैं, पर एआइ के क्षेत्र में विशिष्ट नियमन की आवश्यकता है। यूरोपीय संघ ने एक कानून बनाया है तथा अमेरिका में एक आधिकारिक आदेश जारी हुआ है। ऐसी पहलें नियमन का आधार बन सकती हैं, लेकिन जैसा कि वैष्णव ने रेखांकित किया है, प्रभावी तरीके से एआइ के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन और विचार प्रक्रिया की आवश्यकता है। इंटरनेट और कंप्यूटर नेटवर्कों का विस्तार वैश्विक है। कोई अपराधी कहां बैठकर हैकिंग कर रहा है या डाटा चुरा रहा है या धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा है, इसका पता लगाना तथा रोकथाम करना बहुत ही कठिन है।

भू-राजनीतिक तनावों से ग्रस्त विश्व में तकनीक एक बड़ा हथियार भी बन चुकी है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर नियमन और सहकार होना आवश्यक है। भारत डाटा सेंधमारी का बड़ा निशाना है। एआइ के जरिये भी देश का नुकसान करने की कोशिशें हो सकती हैं। ऐसे में विकास के साथ-साथ सतर्कता बरतना भी जरूरी है।