पन्ना के बफर जोन में हुई सागौन कटाई में रेंजर को बचाने पर फील्ड डायरेक्टर को नोटिस


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स्टोरी हाइलाइट्स

जवाब देने के लिए हॉफ ने दी तीन दिन की मोहलत..!!

भोपाल: पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर नरेश यादव को वन बल प्रमुख (हॉफ) वीएन अंबाड़े ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में यादव से तीन दिन में जवाब मांगा है कि बफर जोन में हुई सागौन की कटाई में आरोपी रेंजर अमर सिंह को अब तक आरोप पत्र क्यों जारी नहीं किया? इसके पहले हॉफ अंबाड़े ने नर्मदापुरम सीसीएफ अशोक कुमार को भी ढाई करोड़ मूल्य की सागौन कटाई पर डीएफओ मयंक गुर्जर को आरोप पत्र जारी नहीं करने पर भी नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।

13 जनवरी को पन्ना फील्ड डायरेक्टर नरेश यादव को दिए नोटिस में कहा गया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन में अजयगढ़ कटरा हार क्षेत्र में लाखों के सागौन कटाई प्रकरण में आरोपी अमर सिंह, रेंजर पन्ना बफ को आरोप पत्र न जारी कर संरक्षण देने के संबंध में शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें कहा गया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के संवेदनशील बफ्र क्षेत्र में लाखों के सागौन पेड़ कटाई मामले में पिछले वर्ष जुलाई 2025 में संरक्षण शाखा के एपीसीसीएफ द्वारा आरोपी अमर सिंह, रेंजर के विरूद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये थे, परन्तु आपके द्वारा इस प्रकरण में लंबे समय से उचित कार्यवाही न कर उसको दबाया गया जो कि टाइगर रिज़र्व प्रबंधन की शुचिता पर सवाल खड़ा करता है। वन बल प्रमुख ने जारी नोटिस में फील्ड डायरेक्ट को निर्देशित किया है कि घटना में आज दिनांक तक क्या कार्रवाई की गई है? संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही न करने का औचित्यपूर्ण प्रतिवेदन 3 दिवस के भीतर भेजें। यह शिकायत वन्य प्राणी एक्टिविस्ट अजय दुबे ने की थी। 

सीसीएफ कुमार ने आरोप पत्र भेजा पर स्पष्टीकरण नहीं

इसके पहले नर्मदा पुरम के अकेले एक बीट छिपीखापा में ढाई करोड़ से मूल्य से अधिक की सागौन कटाई पर  23 दिसंबर को नर्मदा पुरम सीसीएफ अशोक कुमार को नोटिस जारी कर वन बल प्रमुख अंबाड़े ने तत्कालीन डीएफओ मयंक गुर्जर को आरोप पत्र नहीं देने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था। इस नोटिस के बाद अशोक कुमार ने अत्यंत सतही तौर पर डीएफओ के खिलाफ आरोप पत्र बना कर भेज दिया किन्तु आज दिनांक अपना स्पष्टीकरण नहीं भेजा है। जबकि सीसीएफ का यह कृत्य निर्देशों की अवहेलना करना गंभीर अनुशासनहीनता, आदेशों की अवमानना तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने के दायरे में आता है।