केंद्र सरकार ने जीएलपी-1 आधारित वजन घटाने वाली दवाओं की अवैध बिक्री और विज्ञापन पर सख्ती बढ़ा दी है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इन दवाओं की निगरानी तेज कर दी है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने व कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सरकार के अनुसार, ये दवाएं चिकित्सीय परामर्श वाली दवा (प्रिस्क्रिप्शन मेडिसिन) हैं, जिनका उपयोग टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के लिए होता है। इनके गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और क्लीनिकों पर इनकी बढ़ती ‘ऑन-डिमांड’ उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जीएलपी-1 आधारित वेट लॉस दवाओं की सप्लाई चेन में अनियमितताओं और बिना डॉक्टर की सलाह इनके इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए देशभर में निगरानी बढ़ा दी थी।
सरकार ने माना था कि हाल के दिनों में इन दवाओं के कई जेनेरिक वर्जन बाजार में आने के बाद इनकी बिक्री रिटेल दुकानों, ऑनलाइन प्लैटफॉर्म, थोक विक्रेताओं और वेलनेस क्लीनिक के जरिए आसानी से होने लगी है। बिना मेडिकल सुपरविजन के इन दवाओं का इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
पुराण डेस्क