खजुराहो मंदिर की ‘कामुक मूर्तियों’ हैरान करने वाला इतिहास

भारत के राज्य मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित खजुराहों के मंदिर अपनी अद्भुत शिल्पकला और मूर्तिकला के लिए पूरी विश्व भर में मशहूर है।  इन मंदिरों की दीवारों पर बनी कामोत्तेजक मूर्तियां यहां आने वाले सभी सैलानियों का ध्यान अपनी तरफ आर्कषित करती हैं। खजुराहों में हिन्दू और जैन धर्म के प्रमुख मंदिर है। खजुराहों के मंदिरों का निर्माण चंदेला वंश के शासक चंद्रवर्मन ने करवाया था। खजुराहों के मंदिरों को 950 और 1050 ईसवी के बीच इन प्रसिद्ध मंदिरों का निर्माण करवाया गया।
खजुराहो मंदिरों का इतिहास-
खुजराहो के मंदिर अपनी अद्भुत शिल्पकला व स्थापत्य कला के साथ ही अपनी मुर्ती कला के लिए पूरी दुनियां में प्रसिद्ध है। लेकिन इसे लेकर सभी के मन में एक सवाल उठता है कि आखिर यह मंदिर व इसमें बनी आकृतियां किसने बनवाई थी। इसके निर्माण में कितना समय लगा होगा। लेकिन कहा जाता है कि यह मंदिर किसी श्राप के कारण बनवाया गया था। जिसे चंदेल वंश के राजाओं ने बनवाया था। परिमल रासो के महोबा खंड में चंदेलों की उतपत्ति को लेकर एक कहानी लिखी हुई है। जो उन सभी सवालों के जवाब देती है जो मंदिरों को लेकर हमारे मन में उठते है।
परिमल रासो के अनुसार एक सुंदर कन्या थी जो एक दिन सरोवर में नहाने गई थी। उसे नहाते देखकर आकाश के देवता इंद्रदेव धरती पर आ गए। और हेमवती के सौंदर्य से मोहित हो गए। उन्होंने हेमवती के सौंदर्य का बखान करते हुए उसके साथ आलिंगन करने लगे। जब इंद्रदेव जाने लगे तो हेमवती कामार्य भंग करने का आरोप लगाते हुए उन्हें श्राप देने लगी। तो इंद्र ने कहा कि यह मैने जानबूझकर नहीं किया है।

तुम्हारी सुंदरता इसका कारण है। तुम्हे दुखी होनें की जरूरत नहीं है। खुश रहो तुम्हे एक पुत्र की प्राप्ति होगी। जिसका पूरे विश्व में गुणगान होगा। आपके पुत्र का चंहु और शासन होगा।  और जब आपका पुत्र यज्ञ करके मंदिर बनवाएगा तो आपका पाप खत्म हो जाएगा। जिसके बाद ब्राह्मण महिला हेमवती ने करणावती नदीं जिसका आधुनिक नाम केन नदी है। उसके किनारे पर शरण लेकर अपना पुत्र होनें की प्रतिक्षा करने लगी। समय पर उसके चंद्रमा के समान एक पुत्र हुआ। जिसका नाम चंद्रवर्मन रखा गया। चंद्र वर्मन के जन्म पर कई सारे देवता आए।
जब वह बड़े हुए तो इंद्र देव ने उन्हें एक पारस पत्थर देकर राज करने का आशिर्वाद दिया। परसोमल के अनुसार बताया जाता है कि जब चंद्रवर्मन का विवाह हुआ था तो खुद बृहस्पति व कुबैर देवता उनकी शादी मे शामिल हुए थे। बाद में चंद्र वर्मन ने अपनी मां का कलंक मिटाने के लिए यज्ञ करवाकर 85 मंदिर बनवाए थे। जिसमें से खुजराहों का मंदिर भी एक था। हालांकि इसकी स्थापत्य कला उस जमाने की नहीं दिखाई देती है।

जैसे ही चंदेला शासन की ताकत का विस्तार हुआ था, उनके साम्राज्य को बुंदेलखंड का नाम दे दिया गया था और फिर उन्होंने खुजराहों के इन भव्य मंदिरों का निर्माण काम शुरु किया था। इन मंदिरों के निर्माण में काफी लंबा वक्त लगा था, 950 ईसापूर्व से करीब 1050 ईसापूर्व तक इन मंदिरों का निर्माण किया गया था।

इसके बाद चंदेल वंश के शासकों ने अपनी राजधानी उत्तरप्रदेश में स्थित महोबा को बनी ली थी। वहीं खुजराहों के बहुत से मंदिर हिन्दू राजा यशोवर्मन और ढंगा के राज में बनाए गए थे, जिसमें से लक्ष्मण और शिव जी को समर्पित विश्वनाथ जी का मंदिर काफी प्रसिद्ध है। वहीं 1017 से 1029 ईसापूर्व में गंडा राजा के शासनकाल में बना कंदरिया महादेव का मंदिर खजुराहों के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।
इसके बाद 13वीं से 18 सदी के बीच मध्यप्रदेश के खजुराहों के ऐतिहासिक और अद्भुत मंदिर मुस्लिम शासकों के नियंत्रण में थे। इस दौरान अपनी अद्भुत कलाकृति और शाही बनावट के लिए मशहूर इन मंदिरों को नष्ट भी कर दिया गया था। आपको बता दें कि लोदी वंश के शाशक सिकन्दर लोदी ने 1495 ईसवी में  खुजराहों के कई प्रसिद्ध मंदिरों को ध्वस्त करवा दिया था।
खजुराहो के मंदिर की प्रसिद्धि- 
खजुराहो के मंदिर अपनी अद्दभुत कलाकृतियों तथा कामोत्तेजक मोर्तियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, खजुराहो, मंदिर में शिल्पकला का ऐसा प्रदर्शन किया गया है कि कोई भी व्यक्ति देख कर हैरान हो जायेगा की आखिर ऐसी शिल्पकला इस ढंग से कोण प्रदर्शित कर सकता है, मूर्तियाँ ही नहीं बल्कि पूरे मंदिर में कलात्मक कार्य देखने को मिलता है| खजुराहो, मंदिर के अंदर और बाहरी भागों पर करीब दस प्रतिशत कार्य कामोत्तेजक कलाकृतियों का किया गया है. मंदिरों की लम्बी लम्बी दीवारों पर भी छोटी छोटी कामोत्तेजक कलाकृतियां बनायीं गयी है, खजुराहों के मंदिरों को भव्यता और आर्कषण की वजह से साल 1986 में विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल कर लिया गया था।
खजुराहो का मंदिर की कुछ रोचक जानकारियां- 

 

  • खजुराहो मध्यप्रदेश का एक बहुत ही प्रसिद्ध शहर है, जो विशेष कलाकृति वाली मूर्तियों के लिए विश्व विख्यात है.
  • इन  मंदिरों  की संरचना बहुत ही जटिल है.
  • खजुराहो, मंदिर का नाम खजूर के पेड़ के नाम पर खजुराहो पड़ा.
  • खजुराहो के मंदिर हिन्दू और जैन धर्म को प्रदर्शित करता है.
  • करीब एक हजार वर्ष पूर्व खजुराहो चंदेल राजा की राजधानी हुआ करती थी.
  • चंदेल साम्राज्य के समय में करीब 950 aur 1050 में खजुराहो के मंदिर का निर्माण किया गया था.
  • खजुराहो, मंदिर को 20वीं शताब्दी में पुनः खोजा गया.
  • खजुराहो, मंदिर की दीवोरों और पत्थरों पर कामोत्तेजक शिल्प्कलाये बनायीं गयीं हैं.
  • UNESCO ने 1986 में खजुराहो को विश्व धरोहर में सम्मलित कर लिया था.
  • प्राचीन काल में खजुराहो में 85 मंदिर हुआ करते थे परन्तु प्राकृतिक आपदाओं के कारण आज इन मंदिरों की संख्या 22 रह गयी है.
  • इस मंदिर में भगवान ब्रम्हा, विष्णु, महेश तीनो देवों की मूर्तियाँ हैं.
  • खजुराहो का एक मंदिर करीब 107 फुट ऊंचा है जिसका नाम है कंदरिया महादेव मंदिर. यह अन्य सभी मंदिरों से अधिक प्रसिद्द है.
  • खजुराहो, मंदिर के अन्दर 246 तथा बाहर 646 कलाकृतियाँ है, जो अधिकतर कामुकता को प्रदर्शित करती हैं.
  • 13वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी तक खजुराहो मंदिर मुस्लिम शासकों के नियंत्रण में था.
  • अब इसकी देख रेख UNESCO के हाथ में है, तथा भारतीय पुरातत्व विभाग भी इसके संरक्षण में अपना पूरा सहयोग दे रहा है.

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