हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से हुई मौतों के मामले में सुनवाई की। मामले को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि इस घटना से पूरे देश में शहर की इमेज खराब हुई है। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि इंदौर सफाई में नंबर वन है, फिर भी ऐसी घटना हुई। कोर्ट अब तय करेगा कि यह क्रिमिनल एक्ट है या सिविल लाइफ का।
पिटीशनर और हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रितेश ईरानी ने बताया कि भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों और बीमारियों को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में करीब तीन पिटीशन फाइल की गई थीं, जिन पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया।
रितेश ईरानी ने बताया कि हाई कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा मौतों की संख्या पर दी गई स्टेटस रिपोर्ट पर संबंधित डिपार्टमेंट को फटकार लगाई। कोर्ट ने पूरी घटना को बहुत गंभीर बताया। कोर्ट ने इंदौर जैसे साफ-सुथरे शहर में ऐसी घटना पर हैरानी जताई। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि सभी को साफ पानी और सही इलाज मिले।
इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से बीमार पड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। सात लोगों की मौत की ऑफिशियली पुष्टि हो चुकी है, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 17 है। अभी, अलग-अलग अस्पतालों में 110 मरीज़ों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 15 ICU में हैं।
पुराण डेस्क