दुःख का कारण क्या है? दुःख कैसे दूर किया जाए? 

दुःख का कारण क्या है? दुःख कैसे दूर किया जाए? 

हर व्यक्ति दुःख से भागता है| दुःख से उसे डर लगता है| दुःख से उसे कंपकपी होने लगती है| मन बेचैन होने लगता है| दुःख से दर्द पैदा होता है| इसलिए दुःख से सभी भागना चाहते हैं|

लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं जो दुःख से जागते हैं| दुःख से भागने की बजाय दुःख को जागने का मौका बनाना ज्यादा बेहतर होगा| 

महान लोगों ने दुःख को ईश्वर की प्रेरणा और अपने जागरण का मौका बनाया| दुःख में उन्होंने अपनी अंतर चेतना को जागृत किया|अपने संकल्प शक्ति को विकसित किया| उनके अंदर का साहस प्रकट हुआ संवेदनाएं प्रखर हुई और पुरुषार्थ की बदौलत उन्होंने प्रगति की|

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दुःख
दुःख से जागृत हुई आत्म चेतना में उपलब्धियों के नए अवसर प्रकट होते हैं| तपस्वी कहते हैं कि दुःख देवों के हाथ का हथोड़ा है जो चेतना को नई दृष्टि देता है| विकास और परिष्कार के नए द्वार खोलता है| साधु संतों ने, दरवेश और फकीरों ने, भगवान से हमेशा दुःख के वरदान मांगे|

कहते हैं कि जो सुख के बीच पले बढ़े हैं वह परिष्कार और पवित्रता का दुर्लभ सौभाग्य नहीं पाते|

यह सौभाग्य उन्हीं को मिलता है जो पीड़ाओं में पलते हैं जो दुःख के दरिया में बहते हैं| जो बदनामी के क्षणों में प्रभु भक्ति में जीना और गुमनामी के अंधेरों में प्रभु चिंतन करते हुए मृत्यु के आगोश में जाना चाहते हैं| उन्हें ही परमात्मा मिलन का अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है|

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EDITOR DESK



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