मप्र के जंगल अब साल और सागौन के साथ-साथ चंदन वृक्षों के लिए होगा प्रसिद्ध


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स्टोरी हाइलाइट्स

वित्तीय संक्रमण से उबरने वन विकास निगम द्वारा आय में वृद्धि के प्रयास..!!

भोपाल:  मप्र अब साल और सागौन जैसे महंगे वनोपज के साथ-साथ चंदन के वृक्षों के लिए भी प्रसिद्ध होने जा रहा है। वन विकास निगम द्वारा चंदन उत्पादन के लिए एक विशेष योजना तैयार की गई है। राज्य वन विकास निगम द्वारा आय में वृद्धि के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर चंदन वृक्षारोपण की पहल की जा रही है, जिसकी शुरुआत बैतूल जिले में 10 हेक्टेयर भूमि से की जा चुकी है। इस परियोजना से 15 साल की अवधि में 90 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित आय होने का अनुमान है, जो चंदन की उच्च मांग और मूल्य पर आधारित है। 

 निगम के एमडी एचयू खान ने बताया कि सफेद चंदन मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों विशेषकर सिवनी छिंदवाड़ा, भोपाल, सागर इत्यादि में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध है। सफेद चंदन प्रजाति के वृक्ष का व्यावसायिक उपयोग किया जाता है तथा इससे प्राप्त होने वाले पौधों से सुगंधित काष्ट एवं तेल से अच्छा आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है। 

2027 में 50 हजार चंदन लगाने का टारगेट

एक अनौपचारिक चर्चा में निगम के एमडी खान ने बताया कि आगामी वर्ष 2027 में लगभग 50000 पौधा तैयारी का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। वर्ष 2025 में राज्य वन विकास निगम के एमडी रहे वीएन अंबाड़े के द्वारा रामपुर-भतोड़ी परियोजना मंडल में 10 हेक्टेयर चंदन का रोपण कराया गया था।  मौजूदा एमडी खान अब बड़े पैमाने पर चंदन के वृक्षारोपण कराने जा रहें हैं। खान ने बताया कि आगामी 2 वर्षों में वन विकास निगम के समस्त परियोजना मंडलों में चंदन रोपण को विस्तारित किया जायेगा। इसी अनुक्रम में वर्ष 2026 में छिंदवाड़ा एवं सिवनी परियोजना मंडलों में 10-10 हेक्टेयर में 5-हजार पौधों को रोपण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। निगम के अनुसार छिंदवाड़ा परियोजना मंडल के लावाघोघरी रोपणी (छिंदवाड़ा) में पौधों की तैयारी हेतु आगामी वर्ष 2027 में लगभग 50000 पौधा तैयारी का लक्ष्य भी निर्धारित किया जा रहा है।

2025 में कर्नाटक से लाए थे उच्च गुणवत्ता के पौधे

 चंदन के प्रारंभिक वर्षों में पौधों की वृद्धि के लिए मेजबान प्रजाति (Host) का होना भी आवश्यक रहता है जो पौधों की वृद्धि में अत्यंत आवश्यक एवं सहायक है। वर्ष 2025 में चंदन के पौधों का जो रोपण किया गया था उसके लिए उच्च गुणवत्ता के पौधों को कोलार डिविजन (कर्नाटक) से प्राप्त किया गया है। खान ने बताया कि वर्तमान में लावाघोघरी रोपणी (छिंदवाड़ा) में जो चंदन पौधे तैयार किये गये हैं, उसके लिए उच्च गुणवत्ता के बीज (केएफआरआई) त्रिशूर से प्राप्त किये गये हैं। भविष्य में भी लावाघोघरी रोपणी, छिंदवाड़ा परियोजना मंडल को एक मानक रोपणी के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक चंदन प्रजाति के पौधे तैयार किया जा सके। 

निगम को प्रति 10 हेक्टेयर से मिलेगा 35 करोड़ का राजस्व

चंदन के वृक्षों का विदोहन 12 से 15 वर्ष के पश्चात किया जाता है। यानि 15 वर्ष पश्चात् उससे प्राप्त होने वाली आय लगभग 30-35 करोड़ 10 हेक्टेयर से संभावित रहेगी। सागौन वृक्षों के साथ इनका भी विदोहन करने से चंदन के रोपित पौधों को किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं होगा। चंदन प्रजाति के पौधों से प्राप्त होने वाली हार्ट वुड की बाज़ार की कीमत लगभग 9000 प्रति किलो है। 15 वर्षों में इसकी गोलाई 45 से 50 सेमी. तक हो जाती है तथा इस अवधि के पश्चात् इसका पातन आसानी से किया जा सकता है। पातन चक्र की अवधि कम होने के कारण इससे कम समय में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। 10 हेक्टेयर के वृक्षारोपण क्षेत्र में यदि 500 पौधों का रोपण प्रति हेक्टेयर के आधार पर किया जाता है तो लगभग 5000 पौधों की आवश्यकता रोपण हेतु रहती है, जिसमें रोपण रख-रखाव एवं सुरक्षा 15 वर्षों तक करने में लगभग 63 लाख रूपयों का अनुमानित व्यय रहेगा।