विकास और अंतर्क्रिया (Evolution and Involution)

विकास और अंतर्क्रिया

वृक्ष के विकास में बीज की सक्रिय भूमिका अन्तर्निहित होती है। इस प्रकार विकास प्रक्रिया एक अन्तक्रिया की पूर्व कल्पना कर लेती है। विश्व के विकास में विश्वात्मा की सक्रिय भूमिका होती है, जो इसके केन्द्र में अन्तक्रिया होता है तथा इसमें व्याप्त भी होता है। बीज ही वृक्ष होता है, क्योंकि वृक्ष बीज का ही विकसित रूप होता है। विश्वात्मा, एक और केवल एक ही, है तथा उसका कोई नाम और वर्ग नहीं है, यद्यपि वह स्वयं को असंख्य प्रकार से व्यक्त कर देता है तथा उसका अनेक प्रकार से वर्णन किया जाता है। विशुद्ध चेतना परम सत्य है। केवल वही अन्तिम सत् तत्त्व है। परमात्मा सत्, चित् (परम चेतना) आनन्द है।

Evolution and Involution

Evolution of the tree involves the active role of the seed. Thus, evolution presupposes some sort of involution. The evolution of the Cosmos involves the mysterious functioning of the Supreme Power dwelling at its center and also permeating it. The seed is the tree as the tree is just the evolved form of the seed. The Supreme Power is one and only one and has no denominations although It manifests Itself in myriad ways and is described variously. Pure Consciousness is Absolute Truth.

That alone is existent ultimately. The Supreme Being is Truth (Sat). Consciousness (Chit) and Bliss (Anand).

PURAN DESK



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



नवीनतम पोस्ट



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ