विश्व की उत्पत्ति पर विज्ञान से हजारों साल पहले वेदों में कैसे उजागर हुआ रहस्य? विज्ञान भी हैरान?

अतुल विनोद:

विज्ञान जो एक समय अनीश्वरवाद पर अड़ा हुआ था आज डार्क मैटर के रूप में उस परम शक्ति के स्वरूप को मानने को राजी हुआ है| खास बात ये है कि विज्ञान की श्रृष्टि कि उत्पत्ति की थ्योरी आश्चर्यजनक रूप से वैदिक व्याख्या से मेल खाने लगी है|

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आज विज्ञान कहता है- यह ब्रह्मांड दो चीजों से मिलकर बना है एक वो जो हमें दिखाई देता है जिसको हम विजिबल मैटर(पदार्थ) कहते हैं| जो हमें दिखाई नहीं देता उसे हम इनविजिबल या डार्क मैटर कहते हैं|

डार्क मैटर को ही गॉड पार्टिकल या हिग्स बोसॉन कहा गया|  इसी को धर्म ब्रम्ह, हिरण्यगर्भ, परम शिव,परम चेतना, ईश्वर कहते हैं|
वेद कहते हैं श्रृष्टि की उत्पप्ति पुरुष और प्रकृति के मेल से हुयी पुरुष = (डार्क मैटर) = निराकार ब्रम्ह + प्रकृति = (नार्मल मैटर) = द्रश्यमान पदार्थ|

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विज्ञान सदियों से कहता रहा कि जो दिखाई देता है वही सत्य है और इस जगत में कोई भी अदृश्य सत्ता नहीं है|  लेकिन जैसे-जैसे विज्ञान की रिसर्च आगे बढ़ी तो पता चला इस सृष्टि को गढ़ने में डार्क मैटर का बहुत बड़ा योगदान है|  इतना ही नहीं यह डार्क मैटर इस पूरी सृष्टि को नियमित करने यानि कंट्रोल करने का काम भी करता है|

पूरी दुनिया इस डार्क मैटर से ही संचालित होती है|  खास बात यह है कि एक डार्क मैटर बहुत मैटर करता है| दरअसल इसे  डार्क मैटर जरूर कहा जाता है लेकिन यह ट्रांसपेरेंट मैटर है जिसे हमारी या वैज्ञानिकों की आंखें देख नहीं पाती, लेकिन इसी के कारण सब कुछ वजूद में है|

बिग बैंग थ्योरी के अनुसार जब एक विस्फोट से  ब्रह्मांड में मौजूद अति संघनित गर्म नोर्मल मैटर में विस्फोट हुआ तो ग्रह नक्षत्र और तारों का निर्माण शुरू हुआ|  सूर्य जैसे बड़े तारों के आसपास तारामंडल बने तारा मंडलों के समूहों से मिलकर गैलेक्सियां बनी, गेलेक्सियों के समूह से यूनिवर्स बने, वैज्ञानिकों के मन में एक सवाल लंबे समय से कौंध रहा था कि नार्मल मैटर को किसने बनाया?  लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे कि नोर्मल मैटर को बनाने में किसी अदृश्य सत्ता का हाथ था|
आज विज्ञान खुद कह रहा है कि डार्क मैटर ही वह अदृश्य सत्ता है, जिसने मैटर को बनाया और डार्क मैटर  सृष्टि के निर्माण से पहले से ही विद्यमान था|
एक और बात विज्ञान मान रहा है कि  नॉर्मल मैटर भले ही अलग दिखाई देता हो लेकिन यह भी डार्क मैटर(निराकार ब्रम्ह= गॉड पार्टिकल) से ही पैदा हुआ या एक समय में डार्क और नॉर्मल मैटर एक ही थे |
हम सबके अंदर भी वही मूल डार्क मैटर(God Particle-Higs bosson) मौजूद है जो NORMAL मैटर से पहले से मौजूद था|
इसी अदृश्य सत्ता को विभिन्न धर्मों में ईश्वर या परमपिता कहा गया है|
विज्ञान का ये भी मत है कि डार्क मैटर एक बड़ा पार्टिकल है जो हमे दिखाई नहीं देता और इस दुनिया में 84% डार्क मैटर है| नॉर्मल मैटर सिर्फ 16% है| इस 16% नॉर्मल मैटर को भी यह 84% डार्क मैटर कंट्रोल करता है| यहाँ तक की डार्क मैटर ने ही नार्मल मैटर पैदा किया|
यूनिवर्स के निर्माण के लिए बिग बैंग को स्टार्ट करने में इसी डार्क मैटर (GOD PARTICLE) का योगदान है|  स्टार्स को बनाने वाली प्रायमोडीयल गैस को आपस में जोड़ने का काम भी इसी डार्क मैटर ने किया|
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि डार्क मैटर एक लिविंग एंटिटी है यानी एक “जीवित सत्ता” जिसका प्रभाव हर जगह है| यहां तक कि यह डार्क मैटर मनुष्य के शरीर के अंदर भी है|  लेकिन चूंकी ये पूरी तरह ट्रांसपेरेंट है इसलिए इसके हर जगह होने के बावजूद भी हम उसे देख नहीं पाते|
डार्क मैटर यानी ऐसे तत्व, जो न तो प्रकाश छोड़ते हैं, न सोखते हैं और ना ही परावर्तित करते हैं| इसलिए यह तत्व विज्ञान की खोज से अभी तक परे है|  भारतीय सनातन दर्शन में इसी तत्व को परमात्मा तत्व कहा गया है जो बाकी सभी तत्वों के निर्माण का कारक है| हमारे लिए यही ब्रह्म तत्व है जिसे इतनी आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता|
यदि ब्रह्मांड के सभी दृश्यमान पदार्थों को आपस में मिला दिया जाए तो यह 4% से 16% तक ही है और जो बचा होगा वह डार्क मैटर कहलाएगा|
विज्ञान के मुताबिक अब से 13०० करोड़ साल पहले एक विस्फोट से सृष्टि की उत्पत्ति हुई सृष्टि की उत्पत्ति में इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन की बाढ़ आई उनकी हलचल यानी उनके अंदर अचानक कंपन पैदा होना प्रमुख कारण माना गया| लेकिन यह कंपन पैदा क्यों हुआ आखिर वह कौन था जिसने इलेक्ट्रॉन और प्रोटोंस वाइब्रेट किया?  पूरी सृजन की प्रक्रिया को शुरू करने वाले स्टार्टर को ही डार्क मैटर कहा गया|
यूनिवर्स के निर्माण में एक और रहस्यमय बात यह दिखाई दी कि जब सब कुछ अनियंत्रित था तो फिर अचानक इतनी आकाशगंगाएं और उनमें मौजूद ग्रह नक्षत्र तारे सब नियंत्रित कैसे हो गए?

सब कुछ  स्ट्रक्चर्ड हो गया|  नियमित और नियंत्रित| विज्ञान इस बात को लेकर भी हैरान था कि जिस गैस के ग्रेविटेशनल फोर्स के कारण तारे बने उसमें इतना मास नहीं था कि तारे इस तरह से आकार ले पाते| यानी इनके आकार लेने के पीछे एक और फोर्स काम कर रही थी| वह फोर्स डार्क मैटर ही थी| नॉर्मल मैटर में इतनी विविधता नहीं होती कि वह इस तरह से ग्रह नक्षत्र तारे या गैलेक्सी का निर्माण कर सकें| जब गेलेक्सी को आधुनिक कमरे से देखा गया तो पता चला कि जो दिख रहा है वो एक अद्रश्य मेटर के कारण ही इतना सधा हुआ, नियंत्रित, नियमित, व्यवस्थित और सुन्दर है| विज्ञान इस नतीजे पर पहुंचा कि इस अदृश्य शक्ति ने ही एक तारों के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई|
डार्क मैटर नॉर्मल मैटर को ग्रेविटी(गुरुत्वाकर्षण) देता है| ब्रह्मांड में मौजूद असंख्य गैलेक्सिया इतनी स्ट्रक्चर्ड है और डार्क मैटर से लगातार ऊर्जा लेकर ही गतिमान है| इनको एक स्ट्रक्चर्ड फॉर्मेट में लाने का काम भी डार्क मैटर ने किया| डार्क मैटर पूरे यूनिवर्स को एक सूत्र में बांधे रखता है| विज्ञान इसे डार्क मैटर कहता है लेकिन भारतीय धर्म दर्शन इसे ईश्वरीय चेतना शक्ति कहता है|

सदियों से यह बहस चली आ रही थी जड़ और चेतन में पहले कौन पैदा हुआ? जड़ से चेतन या चेतन से जड़?  लेकिन विज्ञान की नई थ्योरी से यह बात साफ हो गई कि पहले चेतन यानी डार्क मैटर आया, डार्क मैटर से ही नॉर्मल मैटर(जड़) पैदा हुआ|
डार्क मैटर की वजह से ही सितारे आज इस विश्व को रोशन कर रहे हैं| वरना पूरी दुनिया अंधकार में डूबी हुई होती|

अब ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर वैदिक थ्योरी  को जानने की कोशिश करते हैं?

सनातन साहित्य में विश्व की उत्पत्ति के रहस्य को ऋग्वेद, मुण्डक उपनिषद्, तैत्तिरीय उपनिषद, प्रश्नोपनिषद, छान्दोग्य उपनिषद, बृहदारण्यक उपनिषद्,महाभारत, शैव दर्शन में बहुत विस्तार से बताया गया है| अलंकारिक और गूढ़ शब्दाबली में होने के कारण विज्ञान ने पहले इन बातों पर गौर नहीं किया अब वे वैदिक साहित्य पढने में रूचि ले रहे हैं|

सृष्टि उत्पत्ति के पहले क्या था? इस विषय में विज्ञान का कहना था  कि Big Bang के बाद ही सृष्टि के नियम विकसित हुए,हमें Big Bang के पूर्व की स्थिति को जानने की कोई ज़रूरत नहीं है। आज विज्ञान को भी Bigbang से पहले जाने कि ज़रूरत पड़ रही है|

वेदों में सृष्टि उत्पत्ति से पहले क्या था यह भी बता दिया गया|
नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमाऽपरोयत्। किमावरीवः कुहकस्य शर्मन्नभः किमासीद्गहनं गभीरम्।। -ऋग्वेद
ऋग्वेद के इस सूत्र में बताया गया कि जब सृष्टि उत्पन्न नहीं हुई थी तब एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर और दूसरा जगत का कारण मौजूद था| उस समय परमाणु भी नहीं थे

तम आसीत्तमसा गुलमग्रेऽप्रकेतं सलितं सर्वमा इदम्। तुच्छ्येनावपिहितं यवासीत्तपसस्तन्माहिना जायतैकम्।।

उस समय अंधकार से घिरे हुए इस जगत को परमेश्वर ने अपनी शक्ति से कारण रूप से कार्य रूप में बदल दिया| यानी डार्क मैटर(ईश्वर) ने नॉर्मल मैटर(कारण) में प्रतिक्रिया पैदा कर इस सृष्टि की रचना(कार्य) की शुरुआत कर दी|

न मृत्युरासीदमृतं न तर्हि न रात्र्या अह्न आसीत्प्रकेतः। आनीदवातं स्वधया तदेकं तस्माद्धान्यन्न परः किं चनास।।

सृष्टि की उत्पत्ति से पहले कुछ भी नहीं था प्रकृति उर्जा रूप में परिवर्तित होकर अव्यक्त(INVISIBLE) थी|

‘सो कामयत। बहुस्यां प्रजायेयेति। स तपोऽतप्यत। स तपस्तप्त्वा इदं सर्वमसृजत। यदिद किञ्च। तत सृष्टावा तदेवानु प्राविशत्। तदनुप्रविश्य। सच्चत्यच्यामवत्। निरुक्तं चानिरुक्तं च। निलयन चानिलयन च। विज्ञानं चापिज्ञानं च। सत्यं चानृतं च। सत्यमभवत। यदिद किञ्च। तत्सत्यमित्या चक्षते

जब परमात्मा की एक से अनेक होने की इच्छा हुई| इक्षा से क्रिया की शुरुआत हो गई|  जो अदृश्य उर्जा में मैटर था वह ईश्वर के गुरुत्वाकर्षण बल से एक जगह इकट्ठा हो गया| एकत्रित पिंड में जब क्रिया के प्रभाव से तापमान बढ़ता चला गया तब अचानक पिंड फट पड़ा और उसी से विश्व का सर्जन शुरू हुआ|

सत्व रजस्तमसा सामयावस्था प्रकृतिः प्रकृतेर्महान् महतोऽहंकारोऽहंकारात् पञ्चतन्मात्राण्युभयमिन्द्रियं पञ्चतन्मात्रेयः स्थूल भूतानि पुरुष इति पञ्च विंशतिर्गण।।

जिसे विज्ञान नॉर्मल मैटर कह रहा है उसे वेदों ने प्रकृति कहा यानी दृश्य-मान पदार्थ|  इसी का सृजन पुरुष यानी चेतना शक्ति से हुआ जैसे विज्ञान ने डार्क मैटर कहा|  पुरुष - प्रकृति के संयोग से ही सृष्टि की रचना हुई|

ब्रह्मणस्पतिरेता सं कर्मारइवाधमत्। देवानां पूर्व्ये युगेऽसतः सद जायत।।

ऋग्वेद कहता है कि परमेश्वर ने दिव्य पदार्थ के परमाणुओं को लोहार के समान धोका, यानि अपने ताप से अपनी शक्ति से उन्हें गर्म किया| अव्यक्त (असत्) प्रकृति से (सत्) व्यक्त जगत् उत्पन्न किया।

अब श्रीमद भागवद में क्या लिखा है ये जान लें- सृष्टि रचना के पूर्व समस्त आत्मा की आत्मा एक पूर्ण परमात्मा ही थे-न द्रष्टा था न दृश्य! सृष्टि काल में अनेक वृत्तियों के भेद से जो अनेकता दिखायी देती है, वह भी वही थे; क्योंकि उनकी इच्छा अकेले रहने की थी, वे ही द्रष्टा होकर देखने लगे, परन्तु उन्हें दृश्य दिखायी नहीं पड़ा; क्योंकि उस समय वे ही अद्वितीय रूपसे प्रकाशित हो रहे थे। ऐसी अवस्थामें वे अपने असत के समान समझने लगे। वस्तुतः वे असत् नहीं थे, क्योंकि उनकी शक्तियाँ ही सोयी थीं। उनके ज्ञान का लोप नहीं हआ था॥ यह द्रष्टा और दृश्य का अनुसन्धान करने वाली शक्ति ही-कार्य कारण रूपा माया है।

भारतीय सनातन वेद पुराण की भाषा संस्कृत है| उनमें सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन धार्मिक दृष्टि लिए हुए है|  लेकिन उस लिखे हुए का मूल समझने की कोशिश करें तो वही है जिस पर आज विज्ञान पहुंचने की कोशिश कर रहा है| आखिर हजारों साल पहले वेद लिखने वाले व्यक्तियों को सृष्टि की उत्पत्ति का ज्ञान कैसे हुआ?  इसका उत्तर बहुत आसान है जैसे कि आज विज्ञान मानता है| हम सब में सृष्टि की उत्पत्ति करने वाले डार्क मैटर की मौजूदगी है| एक डीएनए में पूरे शरीर के गुणसूत्र समाहित होते हैं| उसी तरह मनुष्य में भी सृष्टि के आरंभ से लेकर अब तक की सारी यात्रा के गुणसूत्र और स्मृतियां मौजूद है|  कुछ खास तरह की आध्यात्मिक साधना से मनुष्य अपने मन को विश्व मन (यूनिवर्सल कॉन्शसनेस) से जोड़ने में सक्षम हो जाता है| उस समय ऋषि-मुनि लगातार तपस्या करते थे| इसी वजह से वे वैश्विक मन से जुड़े होते थे| और इस तरह का गूढ़ ज्ञान सहज उन तक पहुंच जाता था|

ATUL VINOD



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