सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराकर हज़ारो छात्रों ने की परीक्षा फीस वापस करने और छात्रवृत्ति, आवास राशि देने की मांग…

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराकर हज़ारो छात्रों ने की परीक्षा फीस वापस करने और छात्रवृत्ति, आवास राशि देने की मांग…

सत्र 2020-21पूरा गुजरने को है कॉलेज व स्कूल के छात्रों से परीक्षाएं न होने की स्थिति में भी पूरी परीक्षा फीस जमा करा ली गई है लेकिन अभी तक अनेकों छात्रों की छात्रवृत्ति और आवास योजना की राशि का भुगतान सरकार द्वारा नहीं किया गया है। जिससे छात्रों को विभिन्न समस्यों का सामना करना पड़ रहा है।

इसी बीच एक मुद्दा और देखने को मिला इंदौर के कुछ  इंजीनियरिंग कॉलेज के फाइनल इयर के छात्रों जिन्होंने स्कॉरलशिप आधार पर एडमिशन लिया था उनके एग्जाम फॉर्म कॉलेज द्वारा फॉरवर्ड नहीं किए गए चूंकि इस वर्ष चौथे वर्ष (2020-21) की स्कॉलरशिप आने में  विलंब होने के कारण छात्र फीस नहीं भर पा रहे हैं, उनके एग्जाम भी 12 जून से शुरू होने को है, 10 जून को यदि कॉलेज की फीस जमा नही कर सके तो एग्जाम वंचित रह जायेंगे। कॉलेज प्रशासन मानने को बिल्कुल तैयार नही है कहा जा रहा है कि कुछ भी करो लेकिन लास्ट डेट 10 जून तक फीस जमा करो तभी एग्जाम फॉर्म फॉरवर्ड करेंगें।

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इंदौर जिला कलेक्ट्रेट में जनजातीय विभाग के अधिकारी से भी कुछ छात्र जाकर मिले वहां से छात्रवृत्ति विभाग के द्वारा कॉलेज को एक आदेश भी जारी किया गया है लेकिन फिर भी कॉलेज प्रशासन मानने को तैयार नहीं है। छात्रों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत कि है निजी कॉलेजों के मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं की जा रही है। पीड़ित छात्रों की मांग है कि उनके एग्जाम फॉर्म कॉलेज द्वारा अभी फॉरवर्ड कर दिए जाएं और फीस स्कॉलरशिप आने पर उनसे ले ली जाएं।

इन सब समस्याओं को लेकर आज छात्र संगठन ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमिटी के आव्हान पर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा कर छात्रवृत्ति और आवास योजना की राशि का अविलंब भुगतान करने व परीक्षा ना होने की स्थिति में परीक्षा फीस वापस करने की शिकायत और मांग दर्ज सैंकड़ों छात्रों द्वारा कराई गई हैं । साथ ही मांग की कि किसी भी छात्र को चाहे वो सरकारी कॉलेज का हो या प्राइवेट कॉलेज का हो फीस के कारण उसको एग्जाम से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इंजीनियरिंग छात्रों का जो मामला चल रहा है उसका सरकार को तुरंत संज्ञान में लेना चाहिए और आदेश जारी कर उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए। और तुरंत प्रदेश के सभी छात्रों की छात्रवृति सरकार द्वारा दी जाए।

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पूरा देश पिछले दो साल से कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा है। लॉकडाउन के चलते लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं ऐसे में गरीब परिवार से जुड़े छात्र आर्थिक रूप से काफी कमजोर हो गए हैं और उनके लिए पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में सरकार को समय रहते उनकी आवास सहायता राशि और छात्रवृत्ति का भुगतान प्राथमिकता के साथ करना चाहिए था और उनसे ली जाने वाली परीक्षा और प्रवेश फीस में रियायत देनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा न करके  उल्टे परीक्षा न होने की स्थिति में भी परीक्षा फीस विभाग द्वारा पूरी जमा करा ली और उन्हें मिलने वाली सुविधाएं अभी तक नहीं दी गई हैं। नाम के लिए कुछ छात्रों की छात्रवृति डाली भी गई लेकिन सरकार द्वारा उसमे भी पिछले साल की तुलना में भारी कटौती की गई है जो कि अनुचित है। ऐसी स्थिति में कई छात्र अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए क्या मजबूर नही होंगे और अपना भविष्य बर्बाद होने का भय उन्हें परेशान नही करेगा?

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फीस व छात्रवृति आदि समस्याओं को लेकर छात्र पिछले एक साल से लगातार अलग-अलग माध्यमों से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं लेकिन सरकार की तरफ से उनकी आवाज को अनदेखा किया जा रहा है जो सरकार का छात्रों के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैये ही है। आज पूरे प्रदेश भर में छात्र सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं। छात्र उम्मीद करते हैं कि शासन उसकी मांग और शिकायत पर ध्यान देगा। हम उम्मीद करते है कि इस आपदा के समय सरकार उनकी समस्या का समाधान अविलंब करेगी।

Priyam Mishra



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