रामायण: संघ परिवार से युद्ध… अब भगवान राम के ‘शरण’ में कम्युनिस्ट, रामायण पर ऑनलाइन चर्चा

रामायण: संघ परिवार से युद्ध… अब भगवान राम के ‘शरण’ में कम्युनिस्ट, रामायण पर ऑनलाइन चर्चा

श्रीराम

केरल की सियासत में एक नया नजारा देखने को मिल रहा है. अब भाकपा के पास आरएसएस के खिलाफ वैचारिक युद्ध का एक नया पैंतरा  है। पार्टी की मलप्पुरम जिला समिति ने रामायण पर ऑनलाइन चर्चा शुरू कर दी है।

भाकपा ने केरल में रामायण पर ऑनलाइन बातचीत शुरू की|

 

भगवान राम इन दिनों राजनीति में नई संभावनाओं के प्रतीक हैं। लगभग हर पार्टी के एजेंडे में भगवान राम सर्वोपरि है। अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने अपना ‘रंग’ बदल कर रामायण की ओर रुख कर लिया है। केरल में, पार्टी की मलप्पुरम जिला समिति ने रामायण पर ऑनलाइन बातचीत की एक श्रृंखला शुरू की है। इसे दक्षिणपंथी संगठनों और संघ परिवार (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई में एक नए हथियार के रूप में देखा जा रहा है|

 

Ramayana Newspuran

अपने फेसबुक पेज पर सात दिवसीय ऑनलाइन चर्चा की । पार्टी के राज्य स्तरीय नेता भी रामायण और राम पर बोल रहे हैं. रामायण और भारतीय विरासत इस संवाद श्रृंखला का शीर्षक है। 

 

माकपा के जिला सचिव पीके कृष्णदास ने कहा,” रामायण जैसे महाकाव्य हमारे देश की साझी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ता श्रृंखला के माध्यम से पार्टी ने यह समझने की कोशिश की है कि प्रगतिशील युग में रामायण को कैसे पढ़ा और समझा जाए।

 

समकालीन राजनीति के बारे में करते हुए सीपीआई के एम केशवन नायर ने कहा कि रामायण की राजनीति संघ परिवार से बहुत अलग थी। उन्होंने कहा, ‘भगवान राम को विरोधाभासी शक्तियों के वाहक के रूप में दिखाया गया है। 

 

कवि लीलाकृष्णन ने कहा कि साम्यवादियों की यह जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करें कि रामायण सांप्रदायिक ताकतों का हथियार ना बने। “हम रामायण की विविध प्रकृति के माध्यम से फासीवादी व्याख्याओं का मुकाबला कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।

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पिछले साल 5 अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर में भूमि पूजन कार्यक्रम में शिरकत की थी. वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ अपने साढ़े चार साल के शासन में 20 से ज्यादा बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं|

पीएम मोदी ने जून में अयोध्या से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा की थी. वहीं बहुजन समाज पार्टी ने भी अयोध्या से अपना ब्राह्मण सम्मेलन (प्रबोध गोष्ठी) शुरू किया। रामलला को देखने के बाद बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि हम ब्राह्मण हैं और रोज राम की पूजा करते हैं. इसके अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी संसद सत्र के बाद अयोध्या का दौरा कर सकते हैं|

 

बंगाल में दीदी को भी श्री राम की शरण लेनी पड़ी। आखिरकार क्या बीजेपी और आरएसएस अपने काम में कामयाब हो गए।

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